{"_id":"e49b5abbe87534734b69b2401066971d","slug":"culturalal-hindi-news-6","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंगलुरु के कलाकारों ने जमाया रंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंगलुरु के कलाकारों ने जमाया रंग
शाहजहांपुर
Updated Thu, 18 Dec 2014 12:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- शाहजहांपुर रंग महोत्सव के दूसरे दिन भी चला आसाम और उड़ीसा के कलाकारों का जादू
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर रंग महोत्सव के दूसरे दिन भी गांधी भवन सभागार देश की विभिन्न लोक कलाओं और भाषाओं का गवाह बना। बुधवार को दोपहर बाद शुरू हुई शास्त्रीय एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता का शुभारंभ आसाम के लोक नृत्य विहू से हुआ। इसके बाद उड़ीसा और बाद में महाराष्ट्र के लावणी नृत्य ने दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर किया।
अखिल भारतीय नाट्य और लोक नृत्य महोत्सव देखने के लिए प्रेक्षागृह दर्शकों से खचाखच भरा था, जिसमें महिलाओं की संख्या भी खासी थी। प्रतियोगिता से पूर्व आसाम की भाष्यवती कोलिता ने विहू नृत्य प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। इसी कड़ी में उड़ीसा के श्रद्धांजलि साड़ंगी और आसाम की ही मृदुस्मिता सोहरिया ने विहू लोकनृत्य पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की तालियां बटोरीं। इसके बाद शुरू हुई शास्त्रीय संगीत पर आधारित लोकनृत्य प्रतियोगिता में बंगलुरु (कर्नाटक) की टीम ने कर्नाटक जनपद मेला (तीन नृत्यों का संगम) प्रस्तुत कर अपनी छाप छोड़ी।
निर्णायक मंडल में उड़ीसा के डॉ. बसंत शैकिया और लखनऊ की प्रभा मौर्य शामिल रहीं। डॉ. सुरेश चंद्र मिश्र ने संचालन में दूसरे दिन की प्रतियोगिताओं का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीओ सिटी राजेश्वर सिंह और उद्योगपति अशोक अग्रवाल, समाजसेवी मनोज खुराना ने मां शारदे तथा अमर शहीद पं. राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठा. रोशन सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप जलाकर किया।
विज्ञापन
बरेली की प्रस्तुति प्रतियोगिता से बाहर
लोकनृत्य प्रतियोगिता में बिंदास नाट्य अकादमी बरेली की प्रस्तुति को निर्णायकों ने प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया। संस्था की कलाकार ट्विंकल बिंदास ने महाराष्ट्र के लोकनृत्य लावणी पर अपनी प्रस्तुति दी थी। चूंकि आयोजन में फिल्मी गीतों पर डांस करने पर प्रतिबंध है, लिहाजा निर्णायकों ने उनकी प्रस्तुति को रोका तो नहीं, लेकिन उसे प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर रंग महोत्सव के दूसरे दिन भी गांधी भवन सभागार देश की विभिन्न लोक कलाओं और भाषाओं का गवाह बना। बुधवार को दोपहर बाद शुरू हुई शास्त्रीय एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता का शुभारंभ आसाम के लोक नृत्य विहू से हुआ। इसके बाद उड़ीसा और बाद में महाराष्ट्र के लावणी नृत्य ने दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर किया।
अखिल भारतीय नाट्य और लोक नृत्य महोत्सव देखने के लिए प्रेक्षागृह दर्शकों से खचाखच भरा था, जिसमें महिलाओं की संख्या भी खासी थी। प्रतियोगिता से पूर्व आसाम की भाष्यवती कोलिता ने विहू नृत्य प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। इसी कड़ी में उड़ीसा के श्रद्धांजलि साड़ंगी और आसाम की ही मृदुस्मिता सोहरिया ने विहू लोकनृत्य पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की तालियां बटोरीं। इसके बाद शुरू हुई शास्त्रीय संगीत पर आधारित लोकनृत्य प्रतियोगिता में बंगलुरु (कर्नाटक) की टीम ने कर्नाटक जनपद मेला (तीन नृत्यों का संगम) प्रस्तुत कर अपनी छाप छोड़ी।
विज्ञापन
निर्णायक मंडल में उड़ीसा के डॉ. बसंत शैकिया और लखनऊ की प्रभा मौर्य शामिल रहीं। डॉ. सुरेश चंद्र मिश्र ने संचालन में दूसरे दिन की प्रतियोगिताओं का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीओ सिटी राजेश्वर सिंह और उद्योगपति अशोक अग्रवाल, समाजसेवी मनोज खुराना ने मां शारदे तथा अमर शहीद पं. राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठा. रोशन सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप जलाकर किया।
विज्ञापन
बरेली की प्रस्तुति प्रतियोगिता से बाहर
लोकनृत्य प्रतियोगिता में बिंदास नाट्य अकादमी बरेली की प्रस्तुति को निर्णायकों ने प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया। संस्था की कलाकार ट्विंकल बिंदास ने महाराष्ट्र के लोकनृत्य लावणी पर अपनी प्रस्तुति दी थी। चूंकि आयोजन में फिल्मी गीतों पर डांस करने पर प्रतिबंध है, लिहाजा निर्णायकों ने उनकी प्रस्तुति को रोका तो नहीं, लेकिन उसे प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया।