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नौटंकी शैली में मंच पर उतरा ‘मैकबेथ’
शाहजहांपुर
Updated Mon, 12 Jan 2015 12:10 AM IST
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गांधी भवन प्रेक्षागृह में महान नाटककार शेक्सपीयर के नाटक ‘मैकबेथ’ का प्रभावी मंचन किया गया। विशेषता यह थी कि एनएसडी प्रशिक्षु शहर के युवा रंगकर्मी तारिक खान और नेहपाल गौतम ने नौटंकी शैली में रूपांतरित कर नाटक मंचित कराया। करीब दो दर्जन महिला-पुरुष कलाकारों ने अभिनय कर अपनी छाप छोड़ी।
मैकबेथ एक त्रासदी नाटक है, जिसे 1603-1607 के बीच लिखा गया। यह राजा जेम्स की ताजपोशी समारोह के लिए लिखा गया था। बताया जाता है कि 11वीं शताब्दी की एक घटना से प्रेरित होकर शेक्सपीयर ने इसे लिखा था। संदेश नाट्य संस्था के बैनर तले इस नाटक का मंचन तैयार करने में निर्देशक द्वय तारिक खान और नेहपाल गौतम ने कड़ी मेहनत की। नौटंकी शैली में मंच पर नाटक को उतारने के लिए अपने जमाने की ख्यातिलब्ध राधा रानी का सहयोग लिया गया। यह वही राधा रानी है, जिनकी कभी अपनी नौटंकी कंपनी हुआ करती थी। इसमें उन्होंने कानपुरी और हाथरसी शैलियों का सुंदर ढंग से समावेश किया है।
नाटक मंचन में राजशेखर अग्निहोत्री, सुहेल खान, प्रीति मिश्रा, राजेश भारती, शिवा शर्मा, संजीव मिश्रा, मोहित पाठक, प्रेम कुमार, नगिंदर सिंह, राहुल वाजपेयी, रमीज अहमद, धीरज राठौर, धर्मेंद्र कुमार, शुभम श्रीवास्तव, विजेंद्र सिंह, आतिफा जरीफ, विकास सागर, गोविंद सैनी, सुरभि सिंह, मोनिका सागर, कुमुद कांत, अनूप वाजपेयी, अरुण वर्मा, करन शुक्ला, महेंद्र कुमार, वीरेंद्र पाल, जगदीश नागर और राजेंद्र पाल शामिल रहे।
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ध्वनि, प्रकाश, मंच सज्जा, रूप सज्जा, वस्त्र विन्यास आदि व्यवस्थाओं में विशाला महाले, अतीक अहमद, विवेक कनौजिया, सौरभ पोद्दार, ऐनुल हक, आशीष शुक्ला, फैसल खान, महमूद खान, आशीष सक्सेना, जूही खान, दीपक तिवारी, अमन मलिक आदि का सहयोग रहा। संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी जरीफ मलिक आनंद ने किया।
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मैकबेथ एक त्रासदी नाटक है, जिसे 1603-1607 के बीच लिखा गया। यह राजा जेम्स की ताजपोशी समारोह के लिए लिखा गया था। बताया जाता है कि 11वीं शताब्दी की एक घटना से प्रेरित होकर शेक्सपीयर ने इसे लिखा था। संदेश नाट्य संस्था के बैनर तले इस नाटक का मंचन तैयार करने में निर्देशक द्वय तारिक खान और नेहपाल गौतम ने कड़ी मेहनत की। नौटंकी शैली में मंच पर नाटक को उतारने के लिए अपने जमाने की ख्यातिलब्ध राधा रानी का सहयोग लिया गया। यह वही राधा रानी है, जिनकी कभी अपनी नौटंकी कंपनी हुआ करती थी। इसमें उन्होंने कानपुरी और हाथरसी शैलियों का सुंदर ढंग से समावेश किया है।
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नाटक मंचन में राजशेखर अग्निहोत्री, सुहेल खान, प्रीति मिश्रा, राजेश भारती, शिवा शर्मा, संजीव मिश्रा, मोहित पाठक, प्रेम कुमार, नगिंदर सिंह, राहुल वाजपेयी, रमीज अहमद, धीरज राठौर, धर्मेंद्र कुमार, शुभम श्रीवास्तव, विजेंद्र सिंह, आतिफा जरीफ, विकास सागर, गोविंद सैनी, सुरभि सिंह, मोनिका सागर, कुमुद कांत, अनूप वाजपेयी, अरुण वर्मा, करन शुक्ला, महेंद्र कुमार, वीरेंद्र पाल, जगदीश नागर और राजेंद्र पाल शामिल रहे।
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ध्वनि, प्रकाश, मंच सज्जा, रूप सज्जा, वस्त्र विन्यास आदि व्यवस्थाओं में विशाला महाले, अतीक अहमद, विवेक कनौजिया, सौरभ पोद्दार, ऐनुल हक, आशीष शुक्ला, फैसल खान, महमूद खान, आशीष सक्सेना, जूही खान, दीपक तिवारी, अमन मलिक आदि का सहयोग रहा। संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी जरीफ मलिक आनंद ने किया।