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बैसाखी पर नहीं निकलेगा नगर कीर्तन
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शाहजहांपुर। अबकी बार बैसाखी पर नगर कीर्तन नहीं निकलेगा। इससे 13 अप्रैल को होने वाला बैसाखी पर्व घरों में मनाया जाएगा।
कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सिख समाज का प्रमुख पर्व बैसाखी 13 अप्रैल को होगा। इस मौके पर निकलने वाला नगर कीर्तन स्थगित कर दिया गया। गुरुद्वारे में बगैर मॉस्क के किसी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। दीवान हाल में संगत को बहुत देर रुकने की अनुमति नहीं होगी। कोरोना संक्रमण को देखते हुए बैसाखी पर होने वाले कार्यक्रम काफी सीमित कर दिए गए हैं। सभा के महामंत्री जुझार सिंह मोंगा ने बताया कि आयोजनों के संबंध में रविवार को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में बैठक बुलाई गई है। इसमें बैसाखी पर्व को मनाए जाने और आयोजन को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
बैसाखी के दिन हुई थी खालसा पंथ की स्थापना
जुझार सिंह ने बताया कि वर्ष 1699 में सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह ने अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। सबसे पहले गुरु गोविंद सिंह ने भाई दया सिंह, धरम सिंह, हिम्मत सिंह, मौकम सिंह और साहिब सिंह को अमृत छकाकर पांच प्यारों की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने खुद उनसे अमृत पान किया था।
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कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सिख समाज का प्रमुख पर्व बैसाखी 13 अप्रैल को होगा। इस मौके पर निकलने वाला नगर कीर्तन स्थगित कर दिया गया। गुरुद्वारे में बगैर मॉस्क के किसी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। दीवान हाल में संगत को बहुत देर रुकने की अनुमति नहीं होगी। कोरोना संक्रमण को देखते हुए बैसाखी पर होने वाले कार्यक्रम काफी सीमित कर दिए गए हैं। सभा के महामंत्री जुझार सिंह मोंगा ने बताया कि आयोजनों के संबंध में रविवार को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में बैठक बुलाई गई है। इसमें बैसाखी पर्व को मनाए जाने और आयोजन को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
बैसाखी के दिन हुई थी खालसा पंथ की स्थापना
जुझार सिंह ने बताया कि वर्ष 1699 में सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह ने अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। सबसे पहले गुरु गोविंद सिंह ने भाई दया सिंह, धरम सिंह, हिम्मत सिंह, मौकम सिंह और साहिब सिंह को अमृत छकाकर पांच प्यारों की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने खुद उनसे अमृत पान किया था।
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