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... आखिर क्यों नहीं होती ओवरलोड वाहनों की चेकिंग

Fri, 10 Mar 2017 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर। Updated Fri, 10 Mar 2017 12:40 AM IST
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Why not wait for overloaded vehicles?
overload - फोटो : amar ujala
पुलिस पर चेकिंग के नाम पर रुपयों की वसूली तो कभी बदसलूकी के आरोप लगते रहे हैं। अधिकारियों तक शिकायतें पहुंची भी तो संबंधित पुलिस अधिकारियों ने आरोपों को खारिज कर दिया।  यह अलग बात है कि उनके दावों को रोड पर दौड़ते डग्गामार और भूसी से भरे ओवरलोड वाहन चुनौती दे रहे हैं। पूर्व विधायक चेतराम के बेटे अनुज के साथ अभद्रता और फिर पुलिस के साथ मारपीट के मामले ने सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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इन ओवरलोड वाहनों के कारण कई वड़े हादसे भी हुए। इन हादसों के बाद कुछ दिन तक तो पुलिस की सख्ती नजर आई, लेकिन बाद में डग्गामार वाहन फिर से दौड़ने लगे। वर्ष 2013 में पुवायां रोड पर पीरू गांव के नजदीक डग्गामार वाहन पलटने से पुवायां इंटर कालेज के प्रधानाचार्य सहित छह लोगों की मौत हो गई थी। वर्ष 2014 में सिंधौली में पेट्रोल पंप के सामने मैजिक खड़े ट्रक में पीछे घुसी तो उसमें नौ लोगों की जान चली गई थी। वर्ष 2014 में जलालाबाद रोड पर उबरिया मंदिर के पास हुए हादसे में छह लोगों की जान चली गई थी। वर्ष 2015 में पिपरौला गांव के पास चार लोगों की मौत ओवरलोड ट्रक पलटने से हो गई थी। बड़े-बड़े हादसों के बाद भी पुलिस का चेकिंग अभियान मात्र दोपहिया वाहनों तक ही सीमित रहा। यदि पुलिस का चेकिंग अभियान इन ओवरलोड वाहनों को ध्यान में रखकर चले तो काफी हद तक ओवरलोड वाहनों पर अंकुश के साथ हादसों को रोका जा सकता है। वहीं पुलिस का कहना है कि ओवरलोड डग्गामार वाहनों  पर भी कार्रवाई होती है। 
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