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लक्ष्मीपुर में वोटरों पर लाठीचार्ज
खुटार।
Updated Fri, 09 Oct 2015 11:43 PM IST
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गांव लक्ष्मीपुर में बैलेट पेपर पर बने चुनाव चिह्नों में गड़बड़ी की शिकायत पर वोटर और मतदान अभिकर्ताओं में खूब गर्मागर्मी हुई। वोटरों और पूर्व प्रधान के अंदर घुसने पर मतदान अभिकर्ता ने आपत्ति कर दी। इस पर मामला विवाद में बदल गया, एसओ खुटार मौके पर पहुंचे और भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। इसमें छह लोग घायल हो गए, जबकि एक घर में घुसकर पुलिस ने जमकर तोड़फोड़ की। इससे एक घंटा मतदान बंद रहा।
गांव लक्ष्मीपुर के स्कूल में बीडीसी वार्ड संख्या 34 दिलीपपुर और वार्ड संख्या 33 लक्ष्मीपुर के वोट पड़ रहे थे। वार्ड 33 में चार और 34 में छह प्रत्याशी मैदान में हैं। वार्ड संख्या 34 पर वोट डालने आए कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनको चार निशान वाला बैलेट पेपर दिया जा रहा है, जबकि छह लोग चुनाव लड़ रहे हैं। इसको लेकर बूथ पर माहौल गरम हो गया। इस बीच एक पूर्व प्रधान बूथ में घुसने लगा तो एक मतदान अभिकर्ता ने आपत्ति कर दी। इसको लेकर विवाद और बढ़ गया। झगड़े की जानकारी पाकर एसओ खुटार जसवीर सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस के लाठीचार्ज में गांव लक्ष्मीपुर के रामसिंह की 60 वर्षीय पत्नी फूलमती, इसी गांव के हरिओम, परविंदर सिंह, परिमाल, श्याम सिंह और उनकी नौ वर्षीय पुत्री राधा घायल हो गए। पुलिस ने श्याम सिंह के घर में घुसकर तोड़फोड़ भी की। पुलिस की पिटाई से फूलमती मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिसके बाद बूथ पर वोट डालने आए लोग भाग खड़े हुए। इस दौरान लगभग एक घंटे तक मतदान बंद रहा। बाद में प्रत्याशियों ने लोगों को समझाकर मतदान शुरू कराया।
पुलिस की पिटाई के बाद उत्तेजित लोग और महिलाएं लाठी, डंडे लेकर बूथ के पास रोड पर जमा हो गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सूचना पाकर डीएम शुभ्रा सक्सेना, एसपी बबलू कुमार फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी लेकर लोगों को समझाकर घरों को भेजा। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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मदद की गुहार पर भी नहीं
पसीजे डीएम और एसपी
खुटार। गांव लक्ष्मीपुर में विवाद की जानकारी पाकर डीएम शुभ्रा सक्सेना और एसपी बबलू कुमार मौके पर पहुंचे तो फूलमती एक चारपाई पर बेहोश पड़ी थीं। अधिकारियों ने उनकी ओर कोई तवज्जो नहीं दी। फूलमती के पति रामसिंह ने डीएम, एसपी से गरीबी का वास्ता देते हुए पत्नी का इलाज कराने के लिए एंबुलेंस बुलाने और मदद की गुहार की, लेकिन दोनों अधिकारी मौके से चले गए। देर शाम तक फूलमती बेहाशी की हालत में घर में पड़ी हुई थी।
बूथ पर भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने लोगों को मौके से खदेड़ दिया। मतपत्र गलत दिए जाने की बात जांच में साबित नहीं हुई है। इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई।
- शुभ्रा सक्सेना, जिलाधिकारी, शाहजहांपुर
गांव लक्ष्मीपुर के तमाम लोग बूथ पर आ गए थे। पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ दिया। घरों में तोड़फोड़ और लाठी चार्ज की बात गलत है। मतदान की निष्पक्षता बनाए रखने को जो जरूरी होगा किया जाएगा।
- बबलू कुमार, एसपी शाहजहांपुर
पीरू में भी भीड़ को
पुलिस ने खदेड़ा
पुवायां। गांव पीरू में वोटर आईडी में नाम सही नहीं होने पर वोट नहीं डालने देने पर वोटरों ने हंगामा कर दिया। जिससे बूथ के पास गांव के लोगों की भीड़ जमा हो गई। जानकारी पाकर प्रेक्षक जेपी सगर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने बूथ के पास भीड़ लगाए लोगों को लाठियां फटकार कर दूर तक खदेड़ दिया।
गांव जुझारपुर में पोलिंग पार्टी में शामिल एक कर्मचारी वोट डालने वालों के पास मतदान पेटिका के पास जाकर खड़ा हो जाता था। इसको लेकर एजेंटो ने आपत्ति जताई। इसके बाद एक वोटर ने कर्मचारी को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद कर्मचारी अपनी सीट पर बैठा। एजेंटों ने इसकी शिकायत अधिकारियों से भी की। इसके अलावा भी कुछ बूथों पर छिटपुट विवाद हुए, लेकिन इसकी अधिकारिक शिकायत नहीं की गई।
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गांव लक्ष्मीपुर के स्कूल में बीडीसी वार्ड संख्या 34 दिलीपपुर और वार्ड संख्या 33 लक्ष्मीपुर के वोट पड़ रहे थे। वार्ड 33 में चार और 34 में छह प्रत्याशी मैदान में हैं। वार्ड संख्या 34 पर वोट डालने आए कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनको चार निशान वाला बैलेट पेपर दिया जा रहा है, जबकि छह लोग चुनाव लड़ रहे हैं। इसको लेकर बूथ पर माहौल गरम हो गया। इस बीच एक पूर्व प्रधान बूथ में घुसने लगा तो एक मतदान अभिकर्ता ने आपत्ति कर दी। इसको लेकर विवाद और बढ़ गया। झगड़े की जानकारी पाकर एसओ खुटार जसवीर सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस के लाठीचार्ज में गांव लक्ष्मीपुर के रामसिंह की 60 वर्षीय पत्नी फूलमती, इसी गांव के हरिओम, परविंदर सिंह, परिमाल, श्याम सिंह और उनकी नौ वर्षीय पुत्री राधा घायल हो गए। पुलिस ने श्याम सिंह के घर में घुसकर तोड़फोड़ भी की। पुलिस की पिटाई से फूलमती मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिसके बाद बूथ पर वोट डालने आए लोग भाग खड़े हुए। इस दौरान लगभग एक घंटे तक मतदान बंद रहा। बाद में प्रत्याशियों ने लोगों को समझाकर मतदान शुरू कराया।
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पुलिस की पिटाई के बाद उत्तेजित लोग और महिलाएं लाठी, डंडे लेकर बूथ के पास रोड पर जमा हो गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सूचना पाकर डीएम शुभ्रा सक्सेना, एसपी बबलू कुमार फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी लेकर लोगों को समझाकर घरों को भेजा। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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मदद की गुहार पर भी नहीं
पसीजे डीएम और एसपी
खुटार। गांव लक्ष्मीपुर में विवाद की जानकारी पाकर डीएम शुभ्रा सक्सेना और एसपी बबलू कुमार मौके पर पहुंचे तो फूलमती एक चारपाई पर बेहोश पड़ी थीं। अधिकारियों ने उनकी ओर कोई तवज्जो नहीं दी। फूलमती के पति रामसिंह ने डीएम, एसपी से गरीबी का वास्ता देते हुए पत्नी का इलाज कराने के लिए एंबुलेंस बुलाने और मदद की गुहार की, लेकिन दोनों अधिकारी मौके से चले गए। देर शाम तक फूलमती बेहाशी की हालत में घर में पड़ी हुई थी।
बूथ पर भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने लोगों को मौके से खदेड़ दिया। मतपत्र गलत दिए जाने की बात जांच में साबित नहीं हुई है। इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई।
- शुभ्रा सक्सेना, जिलाधिकारी, शाहजहांपुर
गांव लक्ष्मीपुर के तमाम लोग बूथ पर आ गए थे। पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ दिया। घरों में तोड़फोड़ और लाठी चार्ज की बात गलत है। मतदान की निष्पक्षता बनाए रखने को जो जरूरी होगा किया जाएगा।
- बबलू कुमार, एसपी शाहजहांपुर
पीरू में भी भीड़ को
पुलिस ने खदेड़ा
पुवायां। गांव पीरू में वोटर आईडी में नाम सही नहीं होने पर वोट नहीं डालने देने पर वोटरों ने हंगामा कर दिया। जिससे बूथ के पास गांव के लोगों की भीड़ जमा हो गई। जानकारी पाकर प्रेक्षक जेपी सगर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने बूथ के पास भीड़ लगाए लोगों को लाठियां फटकार कर दूर तक खदेड़ दिया।
गांव जुझारपुर में पोलिंग पार्टी में शामिल एक कर्मचारी वोट डालने वालों के पास मतदान पेटिका के पास जाकर खड़ा हो जाता था। इसको लेकर एजेंटो ने आपत्ति जताई। इसके बाद एक वोटर ने कर्मचारी को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद कर्मचारी अपनी सीट पर बैठा। एजेंटों ने इसकी शिकायत अधिकारियों से भी की। इसके अलावा भी कुछ बूथों पर छिटपुट विवाद हुए, लेकिन इसकी अधिकारिक शिकायत नहीं की गई।