UP Nikay Chunav: त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा शाहजहांपुर के पहले महापौर का चुनाव, कांटे की टक्कर
शाहजहांपुर के पहले मेयर के चुनाव में भाजपा और सपा के बीच भले सीधी टक्कर दिख रही हो, लेकिन कांग्रेस चौंका सकती है। बसपा भी मुकाबले में तीसरा कोण बनाने के लिए जोर लगाती दिख रही है।
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शाहजहांपुर में नगर निगम के पहले महापौर का चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले में फंसता दिखाई दे रहा है। भाजपा और सपा के बीच भले सीधी टक्कर दिख रही हो, लेकिन कांग्रेस चौंका सकती है। बसपा भी मुकाबले में तीसरा कोण बनाने के लिए जोर लगाती दिख रही है।
नौ अप्रैल को चुनाव की घोषणा के बाद सपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अर्चना वर्मा को महापौर प्रत्याशी घोषित किया था। भाजपा नामांकन की आखिरी तारीख से एक दिन पहले यानी 23 अप्रैल तक प्रत्याशी चयन पर खामोश रही। सपा के लिए चुनाव ठीकठाक चल रहा था।
ऐन वक्त पर पलट गई थी कहानी
प्रत्याशी को चुनाव जिताने के लिए गुणा-भाग लगाया जा रहा था कि 23 अप्रैल को कहानी ही पलट गई। अर्चना वर्मा लखनऊ में भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। भाजपा के इस वार से सपा बमुश्किल संभल पाई। रात में ही सपा ने माला राठौर को प्रत्याशी तय कर लिया और अगले दिन उनका नामांकन करा दिया।
सपा को नए सिरे से करनी पड़ी तैयारी
भाजपा के इस कदम से सपा को नए सिरे से सारी तैयारी करनी पड़ी। चूंकि अर्चना वर्मा की तैयारी पहले से चल रही थी, इसका उन्हें फायदा मिला। हालांकि सपा ने नए सिरे से मतदाताओं के बीच जाकर सहानुभूति का लाभ लेने का प्रयास किया। सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां प्रत्याशी के साथ पूरे जोर-शोर से भाजपा पर धोखेबाजी का आरोप लगाते हुए प्रचार करते रहे।
वहीं कांग्रेस ने निकहत इकबाल और बसपा ने शगुफ्ता अंजुम को प्रत्याशी बनाया है। दोनों ही प्रत्याशियों की नजर सपा के वोट बैंक पर है। बसपा प्रत्याशी अनुसूचित जाति के वोट बैंक को भी अपने साथ मानकर मजबूती से लड़ने का दावा कर रही हैं।