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पुराने नोट थे इसलिए अस्पताल वालों ने नहीं दिया शव

Wed, 23 Nov 2016 11:29 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर Updated Wed, 23 Nov 2016 11:29 PM IST
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The old notes were therefore not given the bodies of hospital
हरीराम का फाइल फोटो।
500 और एक हजार के नोट बंद हुए तो लोगाें की संवेदना ही मर गई। शाहजहांपुर के पुवायां के एक बैंक गार्ड की मौत के बाद मिशन अस्पताल ने नई करेंसी न होने पर 27 घंटे तक शव नहीं दिया। मृतक का बेटा इधर से उधर रुपये के इंतजाम के लिए भटकता रहा। बाद में रिश्तेदार के एटीएम कार्ड से पेमेंट किया गया तब जाकर शव परिवार वालों को सौंपा गया। इसके बाद पुलिस और प्रशासन का लापरवाह चेहरा सामने आया। 
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पुवायां के कुंवरपुर निवासी 62 साल के हरीराम मुरादपुर गांव में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में गार्ड थे। 11 नवंबर को रात में बैंक बंद होने के बाद हरीराम पैदल ही गांव को चल दिए। जसवंत कृषि माल के पास बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। उन्हें बरेली के मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 22 नवंबर की रात 12:40 बजे उनकी मौत हो गई। हरीराम के बेटे संजय ने बताया कि अस्पताल वालों ने इलाज के पैसे जमा कराने को कहा, लेकिन उनके पास नई करेंसी नहीं थी। 500 और हजार के नोट अस्पताल ने लिए नहीं और शव देने से मना कर दिया। संजय दिन से लेकर रात तक इंतजाम करते रहे। बुधवार को एक रिश्तेदार के एटीएम कार्ड से अस्पताल को करीब 24 हजार रुपए दिए गए। तब 27 घंटे बाद शव मिला। संजय ने बताया कि उनसे स्वाइपिंग के 347 रुपए अस्पताल ने अतिरिक्त भी लिए।
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पुलिस ने पंचनामा तक नहीं भरा 
मृतक के बेटे विजय ने बताया कि बुधवार अपराह्न तीन बजे के बाद शव मिला तो पुलिस ने पंचनामा तक नहीं भरा। इसके बाद वे डीएम के पास गए जहां से उन्हें एडीएम सिटी के पास भेजा। यहां अनुमति मिलने के बाद कोतवाली गए तब पंचनामा भरा गया लेकिन शाम होने के चलते पोस्टमार्टम नहीं हुआ। अब परिवार वाले पिछले 36 घंटे से पोस्टमार्टम के लिए दौड़ रहे हैं।   
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यह गलत आरोप है। मौत के बाद उनके घर वाले मिलने ही नहीं आए और गायब हो गए। अगर संपर्क करते तो उनका शव दे दिया जाता। जब ये पैसे लेकर आए तब संपर्क  किया। इस समय लोग परेशान हैं इसलिए हम भी सहयोग कर रहे हैं। - अमिताभ, प्रशासनिक अधिकारी, मिशन अस्पताल 
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