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गड्ढे में डूबकर दो छात्रों की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहजहांपुर
Updated Wed, 03 Aug 2016 11:27 PM IST
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सरोज
- फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
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क्षेत्र के गांव रसकूपा बहादुरपुर में बुधवार को प्राथमिक स्कूल के पास बने गड्ढे में डूबकर दो छात्रों की मौत हो गई। छात्रों की मौत से ग्रामीणों में नाराजगी है। कुछ दिन पहले ही ईंट भट्ठा ठेकेदारों ने खेत की खुदाई करके स्कूल के पास खतरनाक गड्ढा बना दिया था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। दोनों बच्चों की मौत से घरों में कोहराम मच गया है।
गांव के धनपाल का 12 वर्षीय बेटा सरोज प्राथमिक स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ाई करता है और गांव के ही स्वर्गीय वीरपाल का बेटा 10 वर्षीय बेटा कक्षा तीन का छात्र है। दोनों स्कूल की छुट्टी होने के बाद दिन में करीब डेढ़ बजे गड्ढे पास खेलने चले गए। खेलते-खेलते दोनों का पैर फिसल गया, जिससे दोनों गड्ढे में गिर गए। दोनों बच्चों को पानी में डूबता देखकर पास में खेल रहे बच्चों ने घर पहुंचकर उनके डूबने की सूचना दी। मौके पर पहुंचे बच्चों के परिवार वालों ने ग्रामीणों की मदद से दोनों बच्चों को गड्ढे से बाहर निकाला, लेकिन जब तक दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। गांव में खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी हो गई। सूचना पर आसपास के गांव के लोग भी मौके पर पहुंच गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
बच्चों की मौत से ग्रामीणों में रोष
ग्रामीणों में रोष है कि स्कूल के पास ईंट भट्ठा ठेकेदार ने इतना गहरा और बड़ा गड्ढा क्यों खोद दिया, जिससे हादसा हो गया। ग्रामीणों ने कहा कि मिट्टी का खनन अवैध रूप से किया गया है। मामले की जांच कराकर खेत स्वामी और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। घटना की सूचना पर तहसीलदार मामले की जांच करने पहुंचे हैं।
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बड़े बेटेे सरोज की मौत से घर में कोहराम
धनपाल का सबसे बड़ा बेटा सरोज था। उससे छोटी बेटी सलोनी और बेटा जीतू है। सरोज की मौत से मां गीता का रो-रोककर बुरा हाल है। परिवार वाले कह रहे है कि उन्हें नहीं पता था कि यह गड्ढा उनके बेटे के लिए काल बन जाएगा।
अनिकेत की मौत से विधवा मां बेसुध
अनिकेत के पिता वीरपाल की तीन साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। अनिकेत अपने बड़े भाइयों अरविंद और परविंदर में सबसे छोटा था। बेटे की मौत से मां गुड्डी बेसुध हो गई हैं। परिवार की महिलाएं गुड्डी को समझाने का प्रयास कर रही हैं।
दोनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अवैध खनन से मिट्टी की खुदाई कराई गई इसकी जांच कराई जा रही है। मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।
- हरिराम त्रिपाठी, इंस्पेक्टर कांट
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गांव के धनपाल का 12 वर्षीय बेटा सरोज प्राथमिक स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ाई करता है और गांव के ही स्वर्गीय वीरपाल का बेटा 10 वर्षीय बेटा कक्षा तीन का छात्र है। दोनों स्कूल की छुट्टी होने के बाद दिन में करीब डेढ़ बजे गड्ढे पास खेलने चले गए। खेलते-खेलते दोनों का पैर फिसल गया, जिससे दोनों गड्ढे में गिर गए। दोनों बच्चों को पानी में डूबता देखकर पास में खेल रहे बच्चों ने घर पहुंचकर उनके डूबने की सूचना दी। मौके पर पहुंचे बच्चों के परिवार वालों ने ग्रामीणों की मदद से दोनों बच्चों को गड्ढे से बाहर निकाला, लेकिन जब तक दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। गांव में खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी हो गई। सूचना पर आसपास के गांव के लोग भी मौके पर पहुंच गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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बच्चों की मौत से ग्रामीणों में रोष
ग्रामीणों में रोष है कि स्कूल के पास ईंट भट्ठा ठेकेदार ने इतना गहरा और बड़ा गड्ढा क्यों खोद दिया, जिससे हादसा हो गया। ग्रामीणों ने कहा कि मिट्टी का खनन अवैध रूप से किया गया है। मामले की जांच कराकर खेत स्वामी और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। घटना की सूचना पर तहसीलदार मामले की जांच करने पहुंचे हैं।
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बड़े बेटेे सरोज की मौत से घर में कोहराम
धनपाल का सबसे बड़ा बेटा सरोज था। उससे छोटी बेटी सलोनी और बेटा जीतू है। सरोज की मौत से मां गीता का रो-रोककर बुरा हाल है। परिवार वाले कह रहे है कि उन्हें नहीं पता था कि यह गड्ढा उनके बेटे के लिए काल बन जाएगा।
अनिकेत की मौत से विधवा मां बेसुध
अनिकेत के पिता वीरपाल की तीन साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। अनिकेत अपने बड़े भाइयों अरविंद और परविंदर में सबसे छोटा था। बेटे की मौत से मां गुड्डी बेसुध हो गई हैं। परिवार की महिलाएं गुड्डी को समझाने का प्रयास कर रही हैं।
दोनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अवैध खनन से मिट्टी की खुदाई कराई गई इसकी जांच कराई जा रही है। मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।
- हरिराम त्रिपाठी, इंस्पेक्टर कांट