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दो कांवड़ियों की दुर्घटना में मौत
शाहजहांपुर/जलालाबाद।
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:56 PM IST
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सावन का अंतिम सोमवार दो परिवारों के लिए शुभ नहीं रहा। दोनों परिवारों के बेटों की सड़क हादसे में मौत से घर में मातम छा गया। एक कांवड़िया की गोला गोकर्णनाथ में जलाभिषेक करने के बाद घर लौटते समय ट्रैक्टर-ट्रॉली से गिरकर मौत हो गई। मृतक कांवड़िया जिला बरेली के थाना फरीदपुर अंतर्गत गांव गोपालपुर का रहने वाला था। जबकि दूसरे कांवड़िये का घटियाघाट से जल लेकर लौटते समय एक्सीडेंट हो गया, जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई। वह उचौलिया क्षेत्र का रहने वाला था।
जिला अस्पताल में मौजूद कांवड़ियों ने बताया कि वह लोग फरीदपुर से 18 अगस्त को कछला गंगा घाट पहुंचे थे और वहां से गंगाजल लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से गोला गोकर्णनाथ के लिए रवाना हुए। लगभग 75 कांवड़ियों का जत्था गोला गोकर्णनाथ पहुंचा, यहां 23 अगस्त को सुबह लगभग 10 बजे जलाभिषेक किया और कुछ देर विश्राम तथा जलपान के बाद सभी वापस चल दिए। सोमवार सुबह करीब पांच बजे बरेली मार्ग स्थित बंथरा शिव ढाबा के समीप पहुंचते ही उनका साथी गोपालपुर निवासी शिवपाल पुत्र कड़ेराम नींद की झोंक में ट्रॉली से नीचे गिर गया। अचानक गिरे शिवपाल का हाथ ट्रॉली की जंजीर में फंस गया, जिससे वह काफी दूर घिसटता रहा। उसके गिरते ही कांवड़ियों में हड़कंप मच गया। तत्काल ट्रॉली रोककर 108 एंबुलेंस बुलाई। बुरी तरह घायल शिवपाल ने जिला अस्पताल में आरंभिक उपचार के दौरान ही दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंचे परिवारवालों को पोस्टमार्टम के बाद शव सौंप दिया गया।
सोमवार सुबह ही घटियाघाट से गंगाजल लेकर गोला में जल अभिषेक करने जा रहे लखीमपुर खीरी के उचौलिया निवासी विनोद रस्तोगी और उनके इकलौते बेटे राहुल रस्तोगी की बाइक फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे पर गांव बझेड़ा के पास ट्रॉली से टकरा गई, जिसमें राहुल को गंभीर चोट लगी। लोगों की मदद से दोनों को सीएचसी लाया गया। राहुल को डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। राहुल के चाचा संतोष ने बताया कि उनके भाई विनोद अपने 28 वर्षीय इकलौते बेटे राहुल के साथ सुबह ही बाइक से घटियाघाट गंगा तट से जल लेने को निकले थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रॉली का पहिया राहुल के ऊपर से निकल गया।
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बेटे की मौत की खबर सुनकर मां बेहोश
पति और बेटे की दुर्घटना की खबर सुनकर पद्मा भी जिला अस्पताल पहुंच गई। उसे यह नहीं मालूम था कि उसका बेटा राहुल अब इस दुनिया में नहीं है। वह बार-बार डॉक्टरों से उसका इलाज करने को कहकर रोने लगती थी। इधर, विनोद भी बेटे की मौत से अनभिज्ञ इलाज की ही रट लगाए थे। मार्चरी में उसका शव रखने के दौरान मां उससे झकझोर रही थी। बेटे को मृत जानकर वह बार-बार पछाड़ें खाते हुए बेहोश होने लगी। मां को होश में लाने के लिए कई बार गंगाजल भी छिड़का गया।
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जिला अस्पताल में मौजूद कांवड़ियों ने बताया कि वह लोग फरीदपुर से 18 अगस्त को कछला गंगा घाट पहुंचे थे और वहां से गंगाजल लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से गोला गोकर्णनाथ के लिए रवाना हुए। लगभग 75 कांवड़ियों का जत्था गोला गोकर्णनाथ पहुंचा, यहां 23 अगस्त को सुबह लगभग 10 बजे जलाभिषेक किया और कुछ देर विश्राम तथा जलपान के बाद सभी वापस चल दिए। सोमवार सुबह करीब पांच बजे बरेली मार्ग स्थित बंथरा शिव ढाबा के समीप पहुंचते ही उनका साथी गोपालपुर निवासी शिवपाल पुत्र कड़ेराम नींद की झोंक में ट्रॉली से नीचे गिर गया। अचानक गिरे शिवपाल का हाथ ट्रॉली की जंजीर में फंस गया, जिससे वह काफी दूर घिसटता रहा। उसके गिरते ही कांवड़ियों में हड़कंप मच गया। तत्काल ट्रॉली रोककर 108 एंबुलेंस बुलाई। बुरी तरह घायल शिवपाल ने जिला अस्पताल में आरंभिक उपचार के दौरान ही दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंचे परिवारवालों को पोस्टमार्टम के बाद शव सौंप दिया गया।
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सोमवार सुबह ही घटियाघाट से गंगाजल लेकर गोला में जल अभिषेक करने जा रहे लखीमपुर खीरी के उचौलिया निवासी विनोद रस्तोगी और उनके इकलौते बेटे राहुल रस्तोगी की बाइक फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे पर गांव बझेड़ा के पास ट्रॉली से टकरा गई, जिसमें राहुल को गंभीर चोट लगी। लोगों की मदद से दोनों को सीएचसी लाया गया। राहुल को डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। राहुल के चाचा संतोष ने बताया कि उनके भाई विनोद अपने 28 वर्षीय इकलौते बेटे राहुल के साथ सुबह ही बाइक से घटियाघाट गंगा तट से जल लेने को निकले थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रॉली का पहिया राहुल के ऊपर से निकल गया।
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बेटे की मौत की खबर सुनकर मां बेहोश
पति और बेटे की दुर्घटना की खबर सुनकर पद्मा भी जिला अस्पताल पहुंच गई। उसे यह नहीं मालूम था कि उसका बेटा राहुल अब इस दुनिया में नहीं है। वह बार-बार डॉक्टरों से उसका इलाज करने को कहकर रोने लगती थी। इधर, विनोद भी बेटे की मौत से अनभिज्ञ इलाज की ही रट लगाए थे। मार्चरी में उसका शव रखने के दौरान मां उससे झकझोर रही थी। बेटे को मृत जानकर वह बार-बार पछाड़ें खाते हुए बेहोश होने लगी। मां को होश में लाने के लिए कई बार गंगाजल भी छिड़का गया।