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छात्र का अपहरण कर भागे बदमाशों ने बेरीकेडिंग तोड़ी
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Sun, 04 Sep 2016 11:00 PM IST
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रोडवेज बस में सवार छात्र का अपहरण कर सफरी कार से भाग रहे बदमाशों को रोकने का प्रयास किया गया तो उन्होंने पुलिस बेरीकेडिंग को ही क्षतिग्रस्त कर दिया। पुवायां में दरोगा पर कार चढ़ाकर उसे मारने की कोशिश की गई, लेकिन आखिर में पुलिस ने उन्हें दबोच ही लिया।
गांव रघुनाथपुर निवासी विनोद सिंह का पुत्र अमरेंद्र सिंह अपने रिश्ते के चाचा ओपी सिंह के साथ बस से दवा लेने शाहजहांपुर जा रहा था। वह बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र है। पुवायां शाहजहांपुर मार्ग पर लक्ष्य स्कूल के पास सफारी कार सवार पांच बदमाशों ने बस को रुकवा लिया और अमरेंद्र सिंह को अपनी कार में डालकर पुवायां की ओर भागने लगे। भतीजे के अपहरण से हतप्रभ ओपी सिंह ने कोरोंकुइयां चौकी प्रभारी को फोन कर घटना की जानकारी दी और अमरेंद्र के पिता को भी मामले से अवगत कराया।
सूचना पाकर कोरोकुंइया पुलिस ने शाहजहांपुर-पुवायां मार्ग पर बेरिकेडिंग लगाकर अपहरणकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह कार से बेरिकेडिंग को तोड़कर पुवायां की ओर भाग निकले। उधर, पुवायां पुलिस ने राजीव चौक पर रिक्शे, टेंपो आदि खड़े कराकर घेराबंदी कर ली। कार नजदीक आने पर दरोगा सीताराम ने कार चालक को रुकने का इशारा किया तो उसने दरोगा पर ही कार चढ़ाने का प्रयास किया, दरोगा ने छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। इस दौरान दरोगा गुड्डू सिंह, नासिर खां, सिपाही सुरेश यादव, उदयवीर आदि ने कार को रोक लिया और कार सवार पांचों बदमाश दबोच लिए गए। कार में अपहृत छात्र अमरेंद्र भी बरामद हो गया।
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अपहरण करने वालों को कोतवाली लाया गया। इस दौरान दोनों पक्षों से सैकड़ों लोग कोतवाली पहुंच गए। अमरेंद्र के पिता विनोद सिंह की तहरीर पर पुलिस ने पुवायां के गांव खजुरिया के सलिल वर्मा, पुवायां के आशीष, गोलू, सोनू और एक अज्ञात युवक के खिलाफ अपराध संख्या निल पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। विनोद के अनुसार पुत्र का अपहरण जान से मारने की नियत से किया गया था। मामले की जांच सिंधौली पुलिस करेगी।
सदर बाजार, सिंधौली पुलिस सीमा विवाद में उलझी
पुवायां। छात्र अमरेंद्र सिंह के अपहरण का मामला पहले थाना सदर बाजार का बताया जा रहा था। सदर थाने की पुलिस सूचना पाकर पुवायां पहुंची और मामले की जानकारी की तो पता चला कि घटना सिंधौली कोतवाली क्षेत्र में हुई है। इसके बाद दोनों थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल की जांच की। पुवायां कोतवाली प्रभारी राजेश सिंह ने बताया कि मामला सिंधौली थाना क्षेत्र का पाया गया है, इसलिए विवेचना सिंधौली पुलिस करेगी।
पहले दर्ज कराई रिपोर्ट
फिर किया राजीनामा
पुवायां। छात्र अमरेंद्र सिंह के पिता विनोद सिंह ने पुवायां पुलिस को तहरीर दी, लेकिन पुलिस मामले को केवल मारपीट बताकर रिपोर्ट दर्ज करने से कतराती रही। इसके बाद मामले की शिकायत डीआईजी से की गई, तो अधिकारियों के आदेश पर पांच युवकों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। कुछ देर बाद दोनों पक्षों में समझौता होने की बात सामने आई और राजीनामे का एक शपथ पत्र पुलिस को दिया गया। इस पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने और फिर राजीनामा करने पर वादी पक्ष को फटकार लगाते हुए राजीनामा लेने से इंकार कर दिया। पुलिस ने कहा कि अब मामले में सिंधौली पुलिस ही कोई कार्रवाई करेगी। एक आरोपी सलिल वर्मा पूर्व जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेंद्र वर्मा का पुत्र होने के कारण कोतवाली में दिन भर नेतागिरी होती रही।
पुलिस ने नहीं लिखाई रिपोर्ट
पुवायां। अपहरण करने के बाद भाग रहे कार सवार बदमाशों ने पुवायां में एक दरोगा को जान से मारने की नीयत से कार चढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन दरोगा की ओर से इस मामले में कोई रिपोर्ट नहीं दर्ज कराया जाना चर्चा में रहा। उधर, अमरेंद्र सिंह का अपहरण क्यों किया गया? उसकी आरोपियों से क्या रंजिश है? इस बारे में भी अभी कोई पक्ष बोलने को तैयार नहीं है।
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गांव रघुनाथपुर निवासी विनोद सिंह का पुत्र अमरेंद्र सिंह अपने रिश्ते के चाचा ओपी सिंह के साथ बस से दवा लेने शाहजहांपुर जा रहा था। वह बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र है। पुवायां शाहजहांपुर मार्ग पर लक्ष्य स्कूल के पास सफारी कार सवार पांच बदमाशों ने बस को रुकवा लिया और अमरेंद्र सिंह को अपनी कार में डालकर पुवायां की ओर भागने लगे। भतीजे के अपहरण से हतप्रभ ओपी सिंह ने कोरोंकुइयां चौकी प्रभारी को फोन कर घटना की जानकारी दी और अमरेंद्र के पिता को भी मामले से अवगत कराया।
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सूचना पाकर कोरोकुंइया पुलिस ने शाहजहांपुर-पुवायां मार्ग पर बेरिकेडिंग लगाकर अपहरणकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह कार से बेरिकेडिंग को तोड़कर पुवायां की ओर भाग निकले। उधर, पुवायां पुलिस ने राजीव चौक पर रिक्शे, टेंपो आदि खड़े कराकर घेराबंदी कर ली। कार नजदीक आने पर दरोगा सीताराम ने कार चालक को रुकने का इशारा किया तो उसने दरोगा पर ही कार चढ़ाने का प्रयास किया, दरोगा ने छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। इस दौरान दरोगा गुड्डू सिंह, नासिर खां, सिपाही सुरेश यादव, उदयवीर आदि ने कार को रोक लिया और कार सवार पांचों बदमाश दबोच लिए गए। कार में अपहृत छात्र अमरेंद्र भी बरामद हो गया।
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अपहरण करने वालों को कोतवाली लाया गया। इस दौरान दोनों पक्षों से सैकड़ों लोग कोतवाली पहुंच गए। अमरेंद्र के पिता विनोद सिंह की तहरीर पर पुलिस ने पुवायां के गांव खजुरिया के सलिल वर्मा, पुवायां के आशीष, गोलू, सोनू और एक अज्ञात युवक के खिलाफ अपराध संख्या निल पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। विनोद के अनुसार पुत्र का अपहरण जान से मारने की नियत से किया गया था। मामले की जांच सिंधौली पुलिस करेगी।
सदर बाजार, सिंधौली पुलिस सीमा विवाद में उलझी
पुवायां। छात्र अमरेंद्र सिंह के अपहरण का मामला पहले थाना सदर बाजार का बताया जा रहा था। सदर थाने की पुलिस सूचना पाकर पुवायां पहुंची और मामले की जानकारी की तो पता चला कि घटना सिंधौली कोतवाली क्षेत्र में हुई है। इसके बाद दोनों थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल की जांच की। पुवायां कोतवाली प्रभारी राजेश सिंह ने बताया कि मामला सिंधौली थाना क्षेत्र का पाया गया है, इसलिए विवेचना सिंधौली पुलिस करेगी।
पहले दर्ज कराई रिपोर्ट
फिर किया राजीनामा
पुवायां। छात्र अमरेंद्र सिंह के पिता विनोद सिंह ने पुवायां पुलिस को तहरीर दी, लेकिन पुलिस मामले को केवल मारपीट बताकर रिपोर्ट दर्ज करने से कतराती रही। इसके बाद मामले की शिकायत डीआईजी से की गई, तो अधिकारियों के आदेश पर पांच युवकों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। कुछ देर बाद दोनों पक्षों में समझौता होने की बात सामने आई और राजीनामे का एक शपथ पत्र पुलिस को दिया गया। इस पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने और फिर राजीनामा करने पर वादी पक्ष को फटकार लगाते हुए राजीनामा लेने से इंकार कर दिया। पुलिस ने कहा कि अब मामले में सिंधौली पुलिस ही कोई कार्रवाई करेगी। एक आरोपी सलिल वर्मा पूर्व जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेंद्र वर्मा का पुत्र होने के कारण कोतवाली में दिन भर नेतागिरी होती रही।
पुलिस ने नहीं लिखाई रिपोर्ट
पुवायां। अपहरण करने के बाद भाग रहे कार सवार बदमाशों ने पुवायां में एक दरोगा को जान से मारने की नीयत से कार चढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन दरोगा की ओर से इस मामले में कोई रिपोर्ट नहीं दर्ज कराया जाना चर्चा में रहा। उधर, अमरेंद्र सिंह का अपहरण क्यों किया गया? उसकी आरोपियों से क्या रंजिश है? इस बारे में भी अभी कोई पक्ष बोलने को तैयार नहीं है।