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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Sonu was the owner of two parts of the property

संपत्ति के दो हिस्सों का मालिक बन गया था सोनू

Sat, 22 Apr 2017 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर Updated Sat, 22 Apr 2017 12:08 AM IST
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दिनेश के सगे छोटे भाई राकेश की संपत्ति का सोनू हिस्सेदार बन गया था। इसी वजह से दिनेश और उसके बेटे सोनू के खून के प्यासे हो गए।
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सोनू की पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी, इसलिए वह अपने मकान में अकेले ही रहता था। पांच साल पहले सोनू के सौतेले भाई राकेश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। राकेश की मौत के बाद उसकी पत्नी आरती को अपने सगे जेठ दिनेश व उसके बेटेे संतोष व आशुतोष से कोई सहारा नहीं मिला तो उसने सौतेले देवर सोनू का दामन थाम लिया। 
सोनू ने राकेश के बच्चों गोलू और रूपाली की परवरिश करनी शुरू कर दी। इसलिए सोनू दिनेश के सगे भाई राकेश की संपत्ति का वारिस उसकी पत्नी के जरिये बन गया। बस यहीं से दिनेश और सोनू के बीच संपत्ति का विवाद गहरा गया। नौ फरवरी को सोनू बाइक से आरती के साथ शाहजहांपुर से लौट रहा था। रास्ते में अज्ञात वाहन की चपेट में आने से दोनों लोग घायल हो गए। इस हादसे में कुछ देर बाद आरती की मौत हो गई और सोनू इलाज के बाद सही हो गया। आरती की मौत के बाद पक्का हो गया कि अब आरती को पति से वारिस में मिली संपत्ति सोनू को मिल जाएगी। सोनू को रास्ते से हटाने के लिए दिनेश का बेटा संतोष लग गया और इसी का परिणाम हत्या के रूप में सामने आ गया। हालांकि आरती के सामने ही कई बार विवाद हुआ था और पंचायतें भी हुईं, लेकिन विवाद थमा नहीं। 
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पुलिस लापरवाही से हुई वारदात
दस दिन पहले भी संतोष व आशुतोष व दिनेश ने सोनू व उसके भतीजे गोलू और रूपाली को पीटा था। सूचना पर 100 डायल पुलिस गांव पहुंची भी, लेकिन कोई कार्रवाई किए बिना ही वापस लौट गई। इससे उन लोगों के हौसले और भी बढ़ गए। 
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रामकिशन की दूसरी शादी में पत्नी संग आया था सोनू
मृतक सोनू के पिता रामकिशन ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी में सोनू अपनी मां के साथ रामकिशन के घर आया था, जबकि रामकिशन को पहली पत्नी से दो बेटे दिनेश और राकेश पहले से ही थे। दिनेश ने कभी भी सोनू को अपना भाई नहीं माना, दोनों के बीच बचपन से ही मनमुटाव चलता रहा, जो बड़े होकर संपत्ति बंटवारे में खूनी दुश्मनी के रूप में सामने आ गया।  

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रूपाली की कैसे होगी परवरिश
घटना के बाद रूपाली बिल्कुल अकेली रह गई। उसके पिता राकेश की पहले ही फांसी से मौत हो गई थी, चाचा सोनू ने सहारा दिया तो इसी दौरान मां आरती भी हादसे में चल बसी। अब चाचा सोनू और भाई गोलू की हत्या के बाद वह अकेली रह गई है। हालांकि उसके मामा उसे ढांढस बंधा रहे हैं।
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