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दलित रोहित की हत्या के मामले में दरोगा समेत सात पर रिपोर्ट
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Wed, 02 Nov 2016 11:47 PM IST
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प्रेमप्रसंग के मामले में आन के लिए दलित रोहित की हत्या के मामले में उसकी प्रेमिका, प्रेमिका के पिता, भाइयों, चाचा और पुवायां कोतवाली के दरोगा सहित सात लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की विवेचना सीओ अरुण कुमार करेंगे। एसपी ने दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया है।
बता दें कि 31 अक्तूबर को गांव जेबा के पास खाई में एक नर कंकाल बरामद हुआ था। कपड़ों और जूतों से गांव पुरेना निवासी रामदास ने उसकी अपने पुत्र रोहित के रूप में शिनाख्त की थी। रामदास ने बताया कि रोहित का प्रेम प्रसंग पड़ोस के गांव की युवती से चल रहा था। 17 सितंबर को रोहित युवती को अपने साथ ले गया और दिल्ली में आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। युवती के परिवार के लोगों ने इस मामले में पुलिस को तहरीर दी थी और पुलिस से साठगांठ कर ली। इस पर पुवायां कोतवाली में तैनात दरोगा सुनील त्रिपाठी और युवती के घर वाले 17 सितंबर को ही उसके घर गए और जमकर तोड़फोड़ की। इसके बाद पुलिस ने 24 सितंबर को युवती और रोहित को दिल्ली से पकड़ लिया। युवती रोहित के साथ रहने पर अड़ी रही तो पुलिस ने उसे जबरन परिवार के लोगों के साथ भेज दिया। इसके बाद रोहित दिल्ली चला गया। युवती के परिवार के लोगों ने दरोगा सुनील त्रिपाठी और रोहित की प्रेमिका की मदद से रोहित को 17 अक्तूबर को यह कहकर पुवायां बुलाया कि युवती उसके बिना जान देने पर आमादा है। वह पुवायां आ जाए तो दोनों की शादी करा दी जाएगी। रोहित पुवायां आया तो दरोगा, रोहित की प्रेमिका, एक अन्य युवती, प्रेमिका के पिता और उसके तीन भाइयों ने रोहित की हत्या कर शव जेबा गांव के पास ईख में फेंक दिया। रोहित के गायब होने पर उसके पिता ने पुवायां कोतवाली और एसपी को प्रार्थनापत्र दिया। इसमें रोहित के साथ अनहोनी की आशंका जताते हुए उसे तलाशने की गुहार की गई थी लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि रामदास की तहरीर के आधार पर आईपीसी की धारा 147, 148, 302, 201, 3 (1), एससी-एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। विवेचना सीओ करेंगे।
रोहित का दलित होना बन गया अभिशाप
पुवायां। गांव पुरेना निवासी रोहित दलित परिवार से था, जबकि उसकी प्रेमिका ऊंची जाति की थी। लड़की के परिवार के लोगों को जब इस प्रेम प्रसंग का पता चला तो वे भड़क गए। उन्हें यह कतई गवारा नहीं था कि उनकी लड़की किसी दलित बिरादरी के युवक से शादी करे। इस कारण लड़की पर पाबंदियां लगा दी गईं, लेकिन रोहित और उसकी प्रेमिका ने बंदिशों को दरकिनार करते हुए दिल्ली जाकर आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। रोहित की इस हिमाकत पर लड़की वालों का खून खौल उठा। लड़की वालों ने पुवायां कोतवाली में तैनात दरोगा से बात की और जाति बिरादरी का हवाला देकर मदद मांगी तो दरोगा की सलाह पर बदनामी के भय से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। सिर्फ लड़की की गुमशुदगी का तस्करा दर्ज कराया गया। दरोगा ने कानून की हद से बाहर जाकर गुमशुदगी के आधार पर ही रोहित के घर में जमकर तोड़फोड़ की और फिर दिल्ली जाकर प्रेमी युगल को पकड़ लिया और पुवायां ले आया। पुवायां में रोहित और लड़की पक्ष से कार्रवाई नहीं चाहने की बात का शपथपत्र लेकर लड़की को बिना कोर्ट में पेश किए उसके परिवार को सौंप दिया गया। रोहित को भी छोड़ दिया गया।
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रोहित के परिवार को लगा कि अब मामला शांत हो गया है, लेकिन लड़की वालों के मन में तो बदले की आद धधक रही थी। एक बार फिर से दरोगा की मदद ली गई। रोहित के पिता रामदास का आरोप है कि दरोगा की योजना पर ही रोहित को पुवायां बुलाने के लिए उसकी प्रेमिका से ही फोन कराया गया। इसके बाद परिवार वालों ने लड़की के जान देने पर आमादा होने की बात कहते हुए रोहित को शादी करा देने का वादा किया। 17 अक्तूबर को रोहित पुवायां पहुंचा तो दरोगा और लड़की के परिवार वालों ने उसकी हत्या कर शव ईख में फेंक दिया। रामदास को न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उनका कहना है कि बेटे के हत्यारों को वह सजा दिलाकर ही दम लेंगे।
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बता दें कि 31 अक्तूबर को गांव जेबा के पास खाई में एक नर कंकाल बरामद हुआ था। कपड़ों और जूतों से गांव पुरेना निवासी रामदास ने उसकी अपने पुत्र रोहित के रूप में शिनाख्त की थी। रामदास ने बताया कि रोहित का प्रेम प्रसंग पड़ोस के गांव की युवती से चल रहा था। 17 सितंबर को रोहित युवती को अपने साथ ले गया और दिल्ली में आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। युवती के परिवार के लोगों ने इस मामले में पुलिस को तहरीर दी थी और पुलिस से साठगांठ कर ली। इस पर पुवायां कोतवाली में तैनात दरोगा सुनील त्रिपाठी और युवती के घर वाले 17 सितंबर को ही उसके घर गए और जमकर तोड़फोड़ की। इसके बाद पुलिस ने 24 सितंबर को युवती और रोहित को दिल्ली से पकड़ लिया। युवती रोहित के साथ रहने पर अड़ी रही तो पुलिस ने उसे जबरन परिवार के लोगों के साथ भेज दिया। इसके बाद रोहित दिल्ली चला गया। युवती के परिवार के लोगों ने दरोगा सुनील त्रिपाठी और रोहित की प्रेमिका की मदद से रोहित को 17 अक्तूबर को यह कहकर पुवायां बुलाया कि युवती उसके बिना जान देने पर आमादा है। वह पुवायां आ जाए तो दोनों की शादी करा दी जाएगी। रोहित पुवायां आया तो दरोगा, रोहित की प्रेमिका, एक अन्य युवती, प्रेमिका के पिता और उसके तीन भाइयों ने रोहित की हत्या कर शव जेबा गांव के पास ईख में फेंक दिया। रोहित के गायब होने पर उसके पिता ने पुवायां कोतवाली और एसपी को प्रार्थनापत्र दिया। इसमें रोहित के साथ अनहोनी की आशंका जताते हुए उसे तलाशने की गुहार की गई थी लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि रामदास की तहरीर के आधार पर आईपीसी की धारा 147, 148, 302, 201, 3 (1), एससी-एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। विवेचना सीओ करेंगे।
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रोहित का दलित होना बन गया अभिशाप
पुवायां। गांव पुरेना निवासी रोहित दलित परिवार से था, जबकि उसकी प्रेमिका ऊंची जाति की थी। लड़की के परिवार के लोगों को जब इस प्रेम प्रसंग का पता चला तो वे भड़क गए। उन्हें यह कतई गवारा नहीं था कि उनकी लड़की किसी दलित बिरादरी के युवक से शादी करे। इस कारण लड़की पर पाबंदियां लगा दी गईं, लेकिन रोहित और उसकी प्रेमिका ने बंदिशों को दरकिनार करते हुए दिल्ली जाकर आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। रोहित की इस हिमाकत पर लड़की वालों का खून खौल उठा। लड़की वालों ने पुवायां कोतवाली में तैनात दरोगा से बात की और जाति बिरादरी का हवाला देकर मदद मांगी तो दरोगा की सलाह पर बदनामी के भय से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। सिर्फ लड़की की गुमशुदगी का तस्करा दर्ज कराया गया। दरोगा ने कानून की हद से बाहर जाकर गुमशुदगी के आधार पर ही रोहित के घर में जमकर तोड़फोड़ की और फिर दिल्ली जाकर प्रेमी युगल को पकड़ लिया और पुवायां ले आया। पुवायां में रोहित और लड़की पक्ष से कार्रवाई नहीं चाहने की बात का शपथपत्र लेकर लड़की को बिना कोर्ट में पेश किए उसके परिवार को सौंप दिया गया। रोहित को भी छोड़ दिया गया।
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रोहित के परिवार को लगा कि अब मामला शांत हो गया है, लेकिन लड़की वालों के मन में तो बदले की आद धधक रही थी। एक बार फिर से दरोगा की मदद ली गई। रोहित के पिता रामदास का आरोप है कि दरोगा की योजना पर ही रोहित को पुवायां बुलाने के लिए उसकी प्रेमिका से ही फोन कराया गया। इसके बाद परिवार वालों ने लड़की के जान देने पर आमादा होने की बात कहते हुए रोहित को शादी करा देने का वादा किया। 17 अक्तूबर को रोहित पुवायां पहुंचा तो दरोगा और लड़की के परिवार वालों ने उसकी हत्या कर शव ईख में फेंक दिया। रामदास को न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उनका कहना है कि बेटे के हत्यारों को वह सजा दिलाकर ही दम लेंगे।