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प्रतिबंधित पशु तस्करों का पुलिस टीम पर हमला
शाहजहांपुर
Updated Mon, 30 Mar 2015 11:36 PM IST
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प्रतिबंधित पशुओं और मांस तस्करों ने जिले में दो स्थानों पर पुलिस टीम पर फायरिंग करके जाने से मारने की कोशिश की। हालांकि सक्रियता के चलते पुलिसकर्मी घायल नहीं हुए, लेकिन पशु तस्करों के इस दुस्साहस से पुलिसकर्मी भी हैरान हैं। पशु तस्करों के ऐसे कृत्य से आम लोग तो इन्हें रोकने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
पहला मामला
पुलिस टीम पर की फायरिंग, बाल-बाल बचा दरोगा
शाहजहांपुर/कांट। प्रतिबंधित पशुओं का मांस बेचने का धंधा करने वाले गैंग को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उन लोगों ने फायर कर दिया। इससे एक सब-इंस्पेक्टर बाल-बाल बच गए। फायरिंग करने के आरोपी एक व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ लिया, जबकि उसके दो साथी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सोमवार की सुबह करीब पौने पांच बजे कांट के मोहल्ला गहरैया में तालाब के किनारे प्रतिबंधित पशुओं की हत्या कर मांस बेचने के लिए तैयारी करने सूचना मिलने पुलिस को मिली। इस पर एसआई राकेश यादव, हमराह, ओमपाल यादव, कांस्टेबिल विनीत कुमार और सफदर हुसैन के साथ मौके पर पहुंचे। इसकी भनक प्रतिबंधित पशु मांस के धंधेबाजों को लग गई। इस पर गुड्डू पुत्र शब्बीर ने पुलिस टीम पर फायर कर दिया। हालांकि किसी तरह से पुलिस ने उसे पकड़ लिया। जबकि उसके दो साथी मोनू पुत्र शब्बीर और तौसीफ पुत्र पुत्तन मौके से फरार हो गए। ये तीनों तकिया मोहल्ले के निवासी हैं। पुलिस ने इन पर जान से मारने की नीयत से फायर करने, अवैध रूप से असलहा रखने और प्रतिबंधित पशुओं की हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया।
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दूसरा मामला
पशु तस्करों ने की पुलिस पर ट्रक चढ़ाने की कोशिश
खेड़ा बझेड़ा। जैतीपुर पुलिस ने रविवार रात करीब साढ़ेे तीन बजे प्रतिबंधित पशुओं से भरे ट्रक पकड़ लिया है। साथ पशुओं को ग्रामीणों के सुपुर्द कर दिया गया। प्रतिबंधित पशुओं के तस्करों ने पुलिस पर ट्रक चढ़ाकर जान से मारने की कोशिश भी की थी।
एसओ आशुतोष सिंह ने बताया कि रविवार रात को गौहापुर सुरजुपुर तिराहे पर चेकिंग कर रहा था। इसी दौरान एक ट्रक आता दिखाई दिया। जब ट्रक को रोकने को संकेत दिया तो चालक ने ट्रक ऊपर ही सीधा कर दिया। इसमें पुलिस के जवान बाल-बाल बच गए। ट्रक सुरजुपुर-फतेहगंज मार्ग दौड़ा दिया गया। पुलिस टीम के साथ पीछा करने पर तस्कर ट्रक रोड पर छोड़ अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए। बताते हैं कि यह ट्रक खासतौर पर पशु तस्करी के लिए ही बनाया गया है। ट्रक की बाडी को दो भागों में बाटा गया है। करीब सात फिट पर एक लोहे का पर्दा बनाया गया है। इसके पीछे पशुओं को एक दूसरे के ऊपर डाल रखा था और आगे बाडी में बैरियर को तोड़ने में सक्षम बंफर लगाए गए हैं। इससे यदि बैरियर तोड़ने की जरूरत पड़े तो ट्रक को कोई नुकसान न हो। पुलिस ने 12 पशुओं को कब्जे में लेकर ग्रामीणों के सुपुर्द कर गोवध अधिनियम पशु क्रूरता व जान से मारने के प्रयास में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। इस कार्य में एसओ आशुतोष सिंह, एसआई राजकुमार, राजवीर सिंह, नरेश, अजय, रविशंकर, रुपेंद्र आदि रहे।
पहले भी कर चुके हैं हमला
प्रतिबंधित पशुओं के कारोबारी अपने धंधे के विरोध में आने वाली हर बाधा से निपटने के लिए तैयार हैं। अब ये पशु तस्कर पुलिस टीम पर भी हमला करने से बाज नहीं आते हैं। इन लोगों के यह हौसले देखकर आमजन रोकना तो दूर इन लोगों के खिलाफ मुंह खोलने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।
पशु मांस तस्करी को लेकर हुए वाजिदखेल में बवाल
शहर के मोहल्ला वाजिदखेल में प्रतिबंधित पशुओं के मांस की जमकर तस्करी की जाती थी। इसमें भी एक बड़ा गैंग सक्रिय था। यहां पर मांस पकड़े जाने पर जमकर बवाल हुआ था। इसी मामले में एक इंस्पेक्टर ने मांस तस्करों का भंडाफोड़ करने में सहायता करने वाली तारा गुप्ता को भी मारापीटा था। इसके बाद जमकर धरना-प्रदर्शन हुए थे। इस पर डीएम ने पशु तस्करी पर सख्ती की थी, लेकिन उसका परिणाम लंबे समय तक देखने को नहीं मिला है।
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पहला मामला
पुलिस टीम पर की फायरिंग, बाल-बाल बचा दरोगा
शाहजहांपुर/कांट। प्रतिबंधित पशुओं का मांस बेचने का धंधा करने वाले गैंग को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उन लोगों ने फायर कर दिया। इससे एक सब-इंस्पेक्टर बाल-बाल बच गए। फायरिंग करने के आरोपी एक व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ लिया, जबकि उसके दो साथी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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सोमवार की सुबह करीब पौने पांच बजे कांट के मोहल्ला गहरैया में तालाब के किनारे प्रतिबंधित पशुओं की हत्या कर मांस बेचने के लिए तैयारी करने सूचना मिलने पुलिस को मिली। इस पर एसआई राकेश यादव, हमराह, ओमपाल यादव, कांस्टेबिल विनीत कुमार और सफदर हुसैन के साथ मौके पर पहुंचे। इसकी भनक प्रतिबंधित पशु मांस के धंधेबाजों को लग गई। इस पर गुड्डू पुत्र शब्बीर ने पुलिस टीम पर फायर कर दिया। हालांकि किसी तरह से पुलिस ने उसे पकड़ लिया। जबकि उसके दो साथी मोनू पुत्र शब्बीर और तौसीफ पुत्र पुत्तन मौके से फरार हो गए। ये तीनों तकिया मोहल्ले के निवासी हैं। पुलिस ने इन पर जान से मारने की नीयत से फायर करने, अवैध रूप से असलहा रखने और प्रतिबंधित पशुओं की हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया।
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दूसरा मामला
पशु तस्करों ने की पुलिस पर ट्रक चढ़ाने की कोशिश
खेड़ा बझेड़ा। जैतीपुर पुलिस ने रविवार रात करीब साढ़ेे तीन बजे प्रतिबंधित पशुओं से भरे ट्रक पकड़ लिया है। साथ पशुओं को ग्रामीणों के सुपुर्द कर दिया गया। प्रतिबंधित पशुओं के तस्करों ने पुलिस पर ट्रक चढ़ाकर जान से मारने की कोशिश भी की थी।
एसओ आशुतोष सिंह ने बताया कि रविवार रात को गौहापुर सुरजुपुर तिराहे पर चेकिंग कर रहा था। इसी दौरान एक ट्रक आता दिखाई दिया। जब ट्रक को रोकने को संकेत दिया तो चालक ने ट्रक ऊपर ही सीधा कर दिया। इसमें पुलिस के जवान बाल-बाल बच गए। ट्रक सुरजुपुर-फतेहगंज मार्ग दौड़ा दिया गया। पुलिस टीम के साथ पीछा करने पर तस्कर ट्रक रोड पर छोड़ अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए। बताते हैं कि यह ट्रक खासतौर पर पशु तस्करी के लिए ही बनाया गया है। ट्रक की बाडी को दो भागों में बाटा गया है। करीब सात फिट पर एक लोहे का पर्दा बनाया गया है। इसके पीछे पशुओं को एक दूसरे के ऊपर डाल रखा था और आगे बाडी में बैरियर को तोड़ने में सक्षम बंफर लगाए गए हैं। इससे यदि बैरियर तोड़ने की जरूरत पड़े तो ट्रक को कोई नुकसान न हो। पुलिस ने 12 पशुओं को कब्जे में लेकर ग्रामीणों के सुपुर्द कर गोवध अधिनियम पशु क्रूरता व जान से मारने के प्रयास में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। इस कार्य में एसओ आशुतोष सिंह, एसआई राजकुमार, राजवीर सिंह, नरेश, अजय, रविशंकर, रुपेंद्र आदि रहे।
पहले भी कर चुके हैं हमला
प्रतिबंधित पशुओं के कारोबारी अपने धंधे के विरोध में आने वाली हर बाधा से निपटने के लिए तैयार हैं। अब ये पशु तस्कर पुलिस टीम पर भी हमला करने से बाज नहीं आते हैं। इन लोगों के यह हौसले देखकर आमजन रोकना तो दूर इन लोगों के खिलाफ मुंह खोलने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।
पशु मांस तस्करी को लेकर हुए वाजिदखेल में बवाल
शहर के मोहल्ला वाजिदखेल में प्रतिबंधित पशुओं के मांस की जमकर तस्करी की जाती थी। इसमें भी एक बड़ा गैंग सक्रिय था। यहां पर मांस पकड़े जाने पर जमकर बवाल हुआ था। इसी मामले में एक इंस्पेक्टर ने मांस तस्करों का भंडाफोड़ करने में सहायता करने वाली तारा गुप्ता को भी मारापीटा था। इसके बाद जमकर धरना-प्रदर्शन हुए थे। इस पर डीएम ने पशु तस्करी पर सख्ती की थी, लेकिन उसका परिणाम लंबे समय तक देखने को नहीं मिला है।