{"_id":"4500d54557897e41e3b1b7b828224d9b","slug":"proceeds-derived-from-the-deceased-s-bank-account-fraud-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मृतक के बैंक खाते से धोखाधड़ी से निकाली रकम","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मृतक के बैंक खाते से धोखाधड़ी से निकाली रकम
शाहजहांपुर।
Updated Thu, 24 Dec 2015 11:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के मोहल्ला झंडा कलां निवासी निजाकत खां की मौत के बाद इलाहाबाद बैंक की गोविंदगंज स्थित शाखा मेें उनके खाते से किसी ने धोखाधड़ी करके हजारों रुपये की जमा धनराशि आहरित कर ली। इस मामले में मृतक के बेटे ने पिता की मौत की सूचना देने पर भी उनका खाता बंद नहीं किए जाने पर बैंक की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए शाखा प्रबंधक को कानूनी नोटिस भेजा है।
दरअसल, झंडा कलां के निजाकत खां को अप्रैल 2013 में लकवा हो जाने के कारण उनके हाथ-पैरों ने काम करना बंद कर दिया। तभी से बीमारी के चलते वह बैंक खाते का संचालन नहीं कर पाए। आठ दिसंबर 2013 को बीमारी से उनकी मौत होने पर इसकी सूचना उनके पुत्र ताहिर खां ने बैंक को दे दी। इसके बावजूद खाता बंद नहीं किया और उसका संचालन जारी रहा। पिता द्वारा बैंक खाते में छोड़ी गई रकम पर दावा किए जाने के दौरान ताहिर को पता चला कि खातेदार की मौत के बाद एक बार एक हजार रुपये जमा हुए और दो बार में 61 हजार रुपये निकाल लिए गए।
अपनी पड़ताल जारी रखते हुए ताहिर ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन करके शाखा प्रबंधक से खाते की वर्तमान स्थिति और जमा रकम के बारे में जानकारी मांगी तो मृतक खातेदार के साथ धोखाधड़ी जाहिर हो गई। आरटीआई आवेदन के जवाब में बैंक के सहायक महाप्रबंधक एवं केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी एके दीक्षित ने यह भी स्पष्ट किया कि खाते में लेन देन को चेक बुक जारी की गई है और निजाकत खां के निधन से संबंधित सूचना बैंक को प्रस्तुत नहीं की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, झंडा कलां के निजाकत खां को अप्रैल 2013 में लकवा हो जाने के कारण उनके हाथ-पैरों ने काम करना बंद कर दिया। तभी से बीमारी के चलते वह बैंक खाते का संचालन नहीं कर पाए। आठ दिसंबर 2013 को बीमारी से उनकी मौत होने पर इसकी सूचना उनके पुत्र ताहिर खां ने बैंक को दे दी। इसके बावजूद खाता बंद नहीं किया और उसका संचालन जारी रहा। पिता द्वारा बैंक खाते में छोड़ी गई रकम पर दावा किए जाने के दौरान ताहिर को पता चला कि खातेदार की मौत के बाद एक बार एक हजार रुपये जमा हुए और दो बार में 61 हजार रुपये निकाल लिए गए।
विज्ञापन
अपनी पड़ताल जारी रखते हुए ताहिर ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन करके शाखा प्रबंधक से खाते की वर्तमान स्थिति और जमा रकम के बारे में जानकारी मांगी तो मृतक खातेदार के साथ धोखाधड़ी जाहिर हो गई। आरटीआई आवेदन के जवाब में बैंक के सहायक महाप्रबंधक एवं केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी एके दीक्षित ने यह भी स्पष्ट किया कि खाते में लेन देन को चेक बुक जारी की गई है और निजाकत खां के निधन से संबंधित सूचना बैंक को प्रस्तुत नहीं की गई है।
विज्ञापन