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हत्या नहीं, हादसा था रमेश की मौत!
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 06 May 2015 11:14 PM IST
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थाना सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला बाडूजई प्रथम में छह दिन पहले रिक्शा चालक रमेश की हत्या के मामले में पुलिस ने अब नई कहानी पेश की है। इसके मुताबिक रमेश की हत्या नहीं हुई, बल्कि भांजे के धक्का देने से रमेश गिर गया और सिर में चोट लगने से उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में प्रताप के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
मोहल्ला बाडूजई प्रथम में रहने वाला रिक्शा चालक रमेश शराब पीने का आदी था। रमेश के माता-पिता की मौत कई साल पहले हो गई थी। रमेश की बहन नन्ही अपनी बेटी संजीवनी उर्फ नेहा, मोहनी, बेटा प्रताप और विशाल के साथ रमेश के मकान में रहती थी। नन्हीं के पति रामविलास की एक साल पहले मौत हो गई थी। रमेश ने 31 जनवरी 2015 की रात नन्ही को उसके बच्चों के साथ घर से निकाल दिया था। रमेश अपना मकान बेचना चाहता था। मकान करीब 20 से 25 लाख रुपये कीमत का है। रमेश के मकान के सामने रहने वाला राजकुमार उसका मकान खरीदना चाहता था। इसलिए राजकुमार ने पेशगी के रूप में रमेश को 50 हजार रुपये भी दे दिए थे। राजकुमार मकान का अगला हिस्सा खरीदना चाहता था, जबकि रमेश पूरा मकान बेचना चाहता था। इसे लेकर दोनों में झगड़ा भी हुआ था।
इंस्पेक्टर जेपी तिवारी के मुताबिक हत्या से कुछ दिन पहले से रमेश काफी शराब पीने लगा था। रमेश की हालत बिगड़ते देख राजकुमार ने 28 अप्रैल को नन्ही के घर जाकर बताया कि रमेश का इलाज कराओ नहीं तो उसका रुपया मर जाएगा। इस पर नन्ही ने कहा था कि जिंदा रहे या रमेश मर जाए, उसे कोई मतलब नहीं है। बताते हैं कि 30 अप्रैल की सुबह नन्ही का बेटा प्रताप रमेश के घर आया था। उस वक्त रमेश शराब के नशे में था। रमेश ने प्रताप को अपने घर से जाने के लिए कहा तो दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। गुस्से में प्रताप ने रमेश का धक्का दे दिया। रमेश जमीन पर गिरा और उसके सिर में ईंट घुस गई। चोट लगने से रमेश के सिर से खून निकलने लगा। खून देखकर प्रताप घबरा गया और वह मकान में अंदर से कुंडी लगाकर दीवार पर चढ़कर भाग गया। पुलिस के मुताबिक रमेश कई घंटे तक तड़पता रहा। शाम को पड़ोसी प्रेमबाबू ने अपनी छत से रमेश को जमीन पर पड़े हुए हिलते-ढुलते देखा था। प्रेमबाबू ने सुबह फिर रेमश को वहीं पड़ा देखा तो मोहल्ले वालों को सूचना दी। मोहल्ले वालों की सूचना पर प्रताप और उसकी मां नन्ही और रमेश की बड़ी बहन फूल देवी, उनके पति श्रीनाथ रमेश के घर पहुंचे थे। इसके बाद सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस पहुंची थी।
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छह दिन हिरासत में रखने के बाद
प्रताप से सच जान सकी पुलिस
रमेश की हत्या की खबर मिलने पर पुलिस जब रमेश के घर पहुंची थी तो प्रताप वहां मौजूद था। शक के आधार पर पुलिस ने उसे उसी वक्त हिरासत में ले लिया था। तब से प्रताप थाने में ही था। अगर प्रताप के धक्के से रमेश की मौत हुई थी तो पुलिस को इतनी सी बात पता करने में छह दिन कैसे लग गए। वह लकड़ी का पटला इस कहानी से कहां गायब हो गया जिससे वार कर पुलिस ने हत्या करने की बात कही थी। दरअसल इस पटले पर खून के धब्बे थे। रमेश की हत्या की खबर सुनकर प्रताप ही सबसे पहले अपनी मां के साथ घटनास्थल पर पहुंचा था। पुलिस के मुताबिक, धक्के से जब प्रताप गिरा और उसके सिर से खून निकलने लगा तो प्रताप घबराकर भाग गया। वही प्रताप रमेश की मौत की खबर सुनकर कैसे मौके पर पहुंच गया। आखिर उसमें इतनी हिम्मत कहां से आ गई, जबकि अभी वह बालिग भी नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मकान के लालच में किसी और ने रमेश की हत्या की हो और पुलिस ने उसे बचाने के लिए प्रताप को मोहरा बना लिया हो। पुलिस छह दिनों से प्रताप को थाने में बैठाए हुए थी। पुलिस की हिरासत में अच्छे-अच्छे टूट जाते हैं, प्रताप तो अभी बच्चा है, फिर उससे सच उगलवाने में इतना वक्त कैसे लग गया। पुलिस के पास तकनीकी रूप से ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं है, जिसमें प्रताप को हत्या के लिए दोषी ठहराया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट आने से मौत होना बताई गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि चोट किस चीज से आई है।
प्रताप, आरटीओ कार्यालय में दलाली करता है। वह अक्सर रमेश के पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति के यहां आता-जाता रहता था। घटना के दिन भी प्रताप, रमेश के घर आया था। रमेश ने शराब के नशे में प्रताप को पकड़ने की कोशिश की तो प्रताप ने रमेश को धक्का दे दिया। इससे प्रताप के सिर में जमीन पर पड़ीर् इंट घुस गई। खून देखकर प्रताप घबराकर भाग गया और रमेश की मौत हो गई।
-जेपी तिवारी, इंस्पेक्टर थाना सदर बाजार
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मोहल्ला बाडूजई प्रथम में रहने वाला रिक्शा चालक रमेश शराब पीने का आदी था। रमेश के माता-पिता की मौत कई साल पहले हो गई थी। रमेश की बहन नन्ही अपनी बेटी संजीवनी उर्फ नेहा, मोहनी, बेटा प्रताप और विशाल के साथ रमेश के मकान में रहती थी। नन्हीं के पति रामविलास की एक साल पहले मौत हो गई थी। रमेश ने 31 जनवरी 2015 की रात नन्ही को उसके बच्चों के साथ घर से निकाल दिया था। रमेश अपना मकान बेचना चाहता था। मकान करीब 20 से 25 लाख रुपये कीमत का है। रमेश के मकान के सामने रहने वाला राजकुमार उसका मकान खरीदना चाहता था। इसलिए राजकुमार ने पेशगी के रूप में रमेश को 50 हजार रुपये भी दे दिए थे। राजकुमार मकान का अगला हिस्सा खरीदना चाहता था, जबकि रमेश पूरा मकान बेचना चाहता था। इसे लेकर दोनों में झगड़ा भी हुआ था।
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इंस्पेक्टर जेपी तिवारी के मुताबिक हत्या से कुछ दिन पहले से रमेश काफी शराब पीने लगा था। रमेश की हालत बिगड़ते देख राजकुमार ने 28 अप्रैल को नन्ही के घर जाकर बताया कि रमेश का इलाज कराओ नहीं तो उसका रुपया मर जाएगा। इस पर नन्ही ने कहा था कि जिंदा रहे या रमेश मर जाए, उसे कोई मतलब नहीं है। बताते हैं कि 30 अप्रैल की सुबह नन्ही का बेटा प्रताप रमेश के घर आया था। उस वक्त रमेश शराब के नशे में था। रमेश ने प्रताप को अपने घर से जाने के लिए कहा तो दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। गुस्से में प्रताप ने रमेश का धक्का दे दिया। रमेश जमीन पर गिरा और उसके सिर में ईंट घुस गई। चोट लगने से रमेश के सिर से खून निकलने लगा। खून देखकर प्रताप घबरा गया और वह मकान में अंदर से कुंडी लगाकर दीवार पर चढ़कर भाग गया। पुलिस के मुताबिक रमेश कई घंटे तक तड़पता रहा। शाम को पड़ोसी प्रेमबाबू ने अपनी छत से रमेश को जमीन पर पड़े हुए हिलते-ढुलते देखा था। प्रेमबाबू ने सुबह फिर रेमश को वहीं पड़ा देखा तो मोहल्ले वालों को सूचना दी। मोहल्ले वालों की सूचना पर प्रताप और उसकी मां नन्ही और रमेश की बड़ी बहन फूल देवी, उनके पति श्रीनाथ रमेश के घर पहुंचे थे। इसके बाद सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस पहुंची थी।
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छह दिन हिरासत में रखने के बाद
प्रताप से सच जान सकी पुलिस
रमेश की हत्या की खबर मिलने पर पुलिस जब रमेश के घर पहुंची थी तो प्रताप वहां मौजूद था। शक के आधार पर पुलिस ने उसे उसी वक्त हिरासत में ले लिया था। तब से प्रताप थाने में ही था। अगर प्रताप के धक्के से रमेश की मौत हुई थी तो पुलिस को इतनी सी बात पता करने में छह दिन कैसे लग गए। वह लकड़ी का पटला इस कहानी से कहां गायब हो गया जिससे वार कर पुलिस ने हत्या करने की बात कही थी। दरअसल इस पटले पर खून के धब्बे थे। रमेश की हत्या की खबर सुनकर प्रताप ही सबसे पहले अपनी मां के साथ घटनास्थल पर पहुंचा था। पुलिस के मुताबिक, धक्के से जब प्रताप गिरा और उसके सिर से खून निकलने लगा तो प्रताप घबराकर भाग गया। वही प्रताप रमेश की मौत की खबर सुनकर कैसे मौके पर पहुंच गया। आखिर उसमें इतनी हिम्मत कहां से आ गई, जबकि अभी वह बालिग भी नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मकान के लालच में किसी और ने रमेश की हत्या की हो और पुलिस ने उसे बचाने के लिए प्रताप को मोहरा बना लिया हो। पुलिस छह दिनों से प्रताप को थाने में बैठाए हुए थी। पुलिस की हिरासत में अच्छे-अच्छे टूट जाते हैं, प्रताप तो अभी बच्चा है, फिर उससे सच उगलवाने में इतना वक्त कैसे लग गया। पुलिस के पास तकनीकी रूप से ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं है, जिसमें प्रताप को हत्या के लिए दोषी ठहराया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट आने से मौत होना बताई गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि चोट किस चीज से आई है।
प्रताप, आरटीओ कार्यालय में दलाली करता है। वह अक्सर रमेश के पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति के यहां आता-जाता रहता था। घटना के दिन भी प्रताप, रमेश के घर आया था। रमेश ने शराब के नशे में प्रताप को पकड़ने की कोशिश की तो प्रताप ने रमेश को धक्का दे दिया। इससे प्रताप के सिर में जमीन पर पड़ीर् इंट घुस गई। खून देखकर प्रताप घबराकर भाग गया और रमेश की मौत हो गई।
-जेपी तिवारी, इंस्पेक्टर थाना सदर बाजार