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अपहरणकर्ता निकला चाचा, मांगी थी 40 लाख की फिरौती

Sat, 25 Mar 2017 12:17 AM IST
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 25 Mar 2017 12:17 AM IST
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Kidnapper turned uncle, demanded Rs 40 lakh ransom
खुलासा - फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
 थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र के गांव दिलावरपुर भटकर के अपहृत छात्र राजबाबू की बृहस्पतिवार को सिंधौली क्षेत्र में शारदा नहर में उमरिया पुल के पास सूटकेस में लाश मिलनेे के बाद शुक्रवार को पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया। पकड़े गए लोगों में मृतक के रिश्ते के दादा और दादा के दो साले शामिल हैं। जबकि हत्यारोपी रिश्ते के दो चाचा फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पकड़े गए लोगों के पास से एक 315 बोर का तमंचा और एक बाइक भी बरामद हुई है।   
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एसपी सिटी कमल किशोर ने बताया कि पकड़े गए लोगों में सिंधौली के गांव रसूलपुर चठिया निवासी विष्णु दयाल पाल उर्र्फ लंगड़ा ने बताया वे लोेग नौकरी पाने के लिए दलाल को रिश्वत देने के कारण काफी कर्ज में डूब गए थे। इस कर्ज से मुक्तिपाने के लिए उसने पहले अपने चचेरे भाई हाकिम अली के बेटे अनुरागपाल का 30 अप्रैल 2016 को अपहरण कर लिया था। अनुराग पाल बरेली में मेडिकल का छात्र था। उसकी फिरौती में एक करोड़ रुपये की मांग की थी। बाद में साठ लाख रुपये घरवालों से देने का कहा था। रुपये नहीं मिलने पर अनुराग की हत्या कर उसकी लाश एक ट्रेन में रख दी। इस घटना में बरेली पुलिस के हाथों साफ बच निकलने के कारण उनके हौसले बुलंद थे और फिर उसने अपने बहनोई रामचंद्र मिशन क्षेत्र के गांव दिलावरपुर भटकर निवासी नरेशपाल उर्फ फौजी के  तहेरे भाई भाईलाल के पौत्र राजबाबू पुत्र प्रदीप का अपहरण कर लिया। एसपी सिटी ने बताया कि 30 दिसंबर को राजबाबू अपने गांव से मिश्रीपुर स्थित बुद्धन की चक्की पर गेहूं पिसवाने साइकिल से गया था। यहीं से राजबाबू के लापता होने की खबर घरवालों को मिली थी। इसी दिन शाम को तीस लाख फिरौती का फोन भी घरवालों के पास आया था। मामले में रिपोर्ट अपहरण में दर्ज करने के बाद पुलिस घटना के खुलासे में लगी थी। क्राइम ब्रांच की स्वॉट टीम प्रभारी हिमांशु निगम के नेतृत्व में सर्विलांस टीम को लगाया गया था। अपहृत राजाबाबू के दादा नरेशपाल उर्फ फौजी फिरौती की रकम दिलवाने में मध्यस्थता  करने लगा और एक बार उसके मोबाइल पर राजबाबू का फोन आया। बस यहीं से फौजी शक के दायरे में आ गया और इसी दिन 27 मार्च को राजबाबू की हत्या कर दी गई। पुलिस टीम ने उससे कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपहरण की घटना से लेकर हत्या तक का राज खोल दिया। इसके बाद पुलिस ने फौजी के दोनों साले विष्णु उर्फ लंगड़ा व विजय कुमार पाल को भी गिरफ्तार कर लिया। विजय की निशानदेही पर राजबाबू की लाश शारदा नहर उमरिया पुल के पास सूटकेस में बरामद कर ली। एसपी सिटी ने बताया कि एसपी केबी सिंह ने घटना का खुलासा करने वाली टीम को पांच हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। 
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किराए के मकान में की हत्या
गिरफ्तार किए गए हत्यारोपी विष्णु दयाल और उसके भाई विजय व भांजे अजय ने शहर में तारीन टिकली मोहल्ले में मोहन नर्सिंग होम के सामने राजेंद्र खन्ना का मकान तीसरी मंजिल पर तीन हजार रुपये में किराए पर लिया था। अजय ने मकान स्वामी को बताया था कि वह बिहार पटना में एक छोटे से रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर की नौकरी करता है। जबकि उसकी नौकरी नहीं लगी। अपहरण के बाद राजबाबू को इसी किराए के मकान में रखा था और उसे भी लालच दे दिया था कि पिता से रकम मिलने के बाद उसे भी दस लाख मिल जाएंगे। हत्यारोपी उसी से खाना भी बनवाते थे। सिंधौली के रसूलपुर चठिया निवासी मेडिकल के छात्र की भी इसी मकान मेें हत्या की थी। पुलिस ने यहां से उस डंडे को भी बरामद कर लिया। जिससे राजबाबू की हत्या की गई।  उसमें खून लगा है। कमरे में भी खून के छींटे मिले हैं। लखनऊ की फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटा लिए हैं।।
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क्राइम पेट्रोल से सीखा अपहरण का तरीका
एसपी सिटी को पूछताछ में विष्णु दयाल  उर्फ लंगड़ा ने बताया कि वह कंप्यूटर में डिप्लोमा होल्डर है। उसने क्राइम पेट्रोल देखकर सीखा था कि अपराध करने के बाद किस तरह से पुलिस से बचा जाए। इस लिए वह मोबाइल का बहुत ही सावधानी पूर्वक इस्तेमाल करता था। यह लोग ट्रेनों में सफर करने के दौरान फिरौती के लिए फोन करते थे, ताकि पुलिस को सही लोकेशन का पता न चल पाए। राजबाबू की फिरौती की रकम के लिए भी घरवालों को हरदोई, संडीला व जिले में निगोही रोड पर सतवां गांव के पास बुलाया। परिवार वाले रकम लेकर गए भी, लेकिन पकड़े जाने के डर से सामने नहीं आए। उन्हें शक था कि पहचान होने पर पकड़े जाएंगे। 



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इसलिए हो गए थे कर्जदार
मृतक के सगे दादा भाईलाल के तहेरे भाई नरेशपाल ने अपने बेटे अजय और भतीजे संजीत व साले लंगड़ा की रेलवे मेें नौकरी के लिए एक दलाल का रुपया दिया था, लेकिन वह दलाल रुपया लेकर फरार हो गया। नौकरी भी नही दिलवाई। इससे ये लोग कर्जदार थे।
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