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देवरों से जान बचाते हुए भटक रही उषा
शाहजहांपुर
Updated Fri, 09 Jan 2015 12:00 AM IST
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थाना कांट क्षेत्र के गांव सिमरिया गंधार में रहने वाली वाली उषा के पति राजाराम की दो साल पहले मौत हो चुकी है। पति की मौत के बाद देवरों ने उसके हिस्से की जमीन पर कब्जा कर लिया है। देवरों से अपनी जान बचाने को उषा कई दिनों से अपनी दो साल की बेटी कंचन के साथ जिला अस्पताल में भटक रही है। उसके दो बच्चों का कहीं पता नहीं है।
जिला अस्पताल रैन बसेरा में मिली उषा ने बताया कि उसके पति राजाराम की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद उसके हिस्से में आठ बीघा जमीन आई थी। देवर श्यामू और गुड्डू की जमीन पर नीयत खराब हो गई। कब्जे की नीयत से उसके देवर उसे प्रताड़ित करने लगे। देवरों ने उसकी कई बार पिटाई भी की और जान से मारने की धमकी दी। गरीबी की वजह से अगर कोई गांव वाला उसकी मदद करता है तो उसके देवर उससे भी झगड़ा करने लगते थे। करीब एक सप्ताह पहले उषा के देवरों ने उसे मारने का प्रयास किया, किसी तरह से वह छोटी बेटी कंचन को लेकर गांव से भाग आई। गांव में उसके दो बेटे आठ वर्षीय सूरज और 12 वर्षीय अमित रह गए हैं। उषा ने आशंका जताई कि उसके बेटों की जान को खतरा है। बृहस्पतिवार की सुबह कुछ लोगों ने जिला अस्पताल के रैन बसेरा में उषा को दो साल के बच्चे के साथ ठंड में उसे कांपते हुए देखा तो उससे पूछताछ करने लगे। उषा ने सुबकते हुए अपना पूरा दुखड़ा सुना दिया। यह सुनकर कांशीराम कॉलोनी में रहने वाली शालिनी ने अपने घर से गर्म कपड़े लाकर उषा को दिए। कुछ लोगों ने थाना कांट के इंस्पेक्टर से संपर्क कर उसे सुरक्षा दिलाने के लिए थाने भेज दिया है।
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जिला अस्पताल रैन बसेरा में मिली उषा ने बताया कि उसके पति राजाराम की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद उसके हिस्से में आठ बीघा जमीन आई थी। देवर श्यामू और गुड्डू की जमीन पर नीयत खराब हो गई। कब्जे की नीयत से उसके देवर उसे प्रताड़ित करने लगे। देवरों ने उसकी कई बार पिटाई भी की और जान से मारने की धमकी दी। गरीबी की वजह से अगर कोई गांव वाला उसकी मदद करता है तो उसके देवर उससे भी झगड़ा करने लगते थे। करीब एक सप्ताह पहले उषा के देवरों ने उसे मारने का प्रयास किया, किसी तरह से वह छोटी बेटी कंचन को लेकर गांव से भाग आई। गांव में उसके दो बेटे आठ वर्षीय सूरज और 12 वर्षीय अमित रह गए हैं। उषा ने आशंका जताई कि उसके बेटों की जान को खतरा है। बृहस्पतिवार की सुबह कुछ लोगों ने जिला अस्पताल के रैन बसेरा में उषा को दो साल के बच्चे के साथ ठंड में उसे कांपते हुए देखा तो उससे पूछताछ करने लगे। उषा ने सुबकते हुए अपना पूरा दुखड़ा सुना दिया। यह सुनकर कांशीराम कॉलोनी में रहने वाली शालिनी ने अपने घर से गर्म कपड़े लाकर उषा को दिए। कुछ लोगों ने थाना कांट के इंस्पेक्टर से संपर्क कर उसे सुरक्षा दिलाने के लिए थाने भेज दिया है।
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