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मोनू को लेकर लौटी पुलिस
रोजा, शाहजहांपुर
Updated Fri, 09 Jan 2015 12:10 AM IST
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कबूतरबाजों द्वारा बेचे गए किशोर मोनू गुप्ता को तो पुलिस सहारनपुर से बरामद करके ले आई, मगर राजू के अलावा दूसरे कबूतरबाज बताए गए भरत पर पुलिस ने अभी हाथ नहीं डाला है। न ही उस फार्म हाउस मालिक को पुलिस अभियुक्त मान रही है, जिसके यहां मोनू मिला।
रोजा कस्बे की गली नंबर 15 के रहने वाले मोनू और यहां के राजेश गुप्ता को करीब डेढ़ माह पहले यहां का राजू और मेरठ का रहने वाला उसका साथी भरत नौकरी का झांसा देकर हरिद्वार ले गए थे। फिर दोनों को बेच दिया गया। राजेश मुजफ्फरनगर में बेचा गया था, जहां से वह किसी तरह बचकर तीन जनवरी की शाम यहां आ गया था। इसके बाद अगले दिन पुलिस ने छापा मारकर राजू को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके यहां एक और किशोर विजय बरामद हुआ था। पुलिस ने अगले दिन मुकदमा दर्ज करने के बाद मोनू की बरामदगी के प्रयास शुरू किये। बुधवार को पुलिस टीम देवबंद (सहारनपुर) में बताए गए स्थान पर पहुंची। मंगलोर थाना क्षेत्र के छोटा सांपला में मुमताज खां के फार्म हाउस पर मोनू मिल गया। इंस्पेक्टर अजीत सिंह के मुताबिक भरत का पता ही नहीं चल रहा, इसलिए वह अभी पकड़ में नहीं आ सका है। वहीं मुमताज को अभियुक्त न मानने की बात कहते हुए बताया कि फार्म हाउस पर किसी को बंधक नहीं बनाया गया था, सब स्वतंत्र होकर काम कर रहे थे। कुछ और किशोर भी वहां थे, जिन्होंने किसी तरह के जबरन काम कराने से मना किया।
मोनू बोला, जानवरों की तरह लिया जाता था काम
बरामद हुए मोनू गुप्ता ने बताया कि उसे सुबह एक कप चाय पिलाने के बाद जानवरों की तरह खेत में खुदाई, निराई कराने के लिए भेज दिया जाता था। ज्यादा काम होने पर मना करते ही उसकी पिटाई की जाती थी। कोई बंधक भाग न निकले, इसके लिए असलहाधारी तैनात रहते थे। शाम के वक्त ही खाना दिया जाता था और एक गोदामनुमा कमरे में कई लोगों को एक साथ रखा जाता था। पिछले डेढ़ माह में पगार के नाम पर एक भी पैसा नहीं दिया गया, साथ ही किसी की मोबाइल फोन से बात तक नहीं कराई जाती थी।
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डेढ़ माह बाद मोनू के घर में दिखा जश्नी माहौल
मोनू की बरामदगी की खबर जब कस्बे में पहुंची तो उसके घर में जश्न सा माहौल हो गया। चार जनवरी को मां बिटटा देवी और पिता ताराचन्द गुप्ता को अपने बेटे मोनू गुप्ता के सहारनपुर में बंधक होने की बात पता चली थी तो तभी से वे अन्न-जल त्याग कर बेटे की सलामती की दुआ मांग रहे थे। बृहस्पतिवार की भोर जब रोजा पुलिस मोनू गुप्ता को लेकर थाने पहुंची तो परिवार वाले एक दूसरे को मिठाई खिलाने लगे। यद्यपि मोनू अभी विधिक प्रक्रिया के चलते शुक्रवार को ही घर पहुंच पाएगा। शुक्रवार को उसका मेडिकल परीक्षण और कोर्ट में बयान होने हैं।
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रोजा कस्बे की गली नंबर 15 के रहने वाले मोनू और यहां के राजेश गुप्ता को करीब डेढ़ माह पहले यहां का राजू और मेरठ का रहने वाला उसका साथी भरत नौकरी का झांसा देकर हरिद्वार ले गए थे। फिर दोनों को बेच दिया गया। राजेश मुजफ्फरनगर में बेचा गया था, जहां से वह किसी तरह बचकर तीन जनवरी की शाम यहां आ गया था। इसके बाद अगले दिन पुलिस ने छापा मारकर राजू को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके यहां एक और किशोर विजय बरामद हुआ था। पुलिस ने अगले दिन मुकदमा दर्ज करने के बाद मोनू की बरामदगी के प्रयास शुरू किये। बुधवार को पुलिस टीम देवबंद (सहारनपुर) में बताए गए स्थान पर पहुंची। मंगलोर थाना क्षेत्र के छोटा सांपला में मुमताज खां के फार्म हाउस पर मोनू मिल गया। इंस्पेक्टर अजीत सिंह के मुताबिक भरत का पता ही नहीं चल रहा, इसलिए वह अभी पकड़ में नहीं आ सका है। वहीं मुमताज को अभियुक्त न मानने की बात कहते हुए बताया कि फार्म हाउस पर किसी को बंधक नहीं बनाया गया था, सब स्वतंत्र होकर काम कर रहे थे। कुछ और किशोर भी वहां थे, जिन्होंने किसी तरह के जबरन काम कराने से मना किया।
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मोनू बोला, जानवरों की तरह लिया जाता था काम
बरामद हुए मोनू गुप्ता ने बताया कि उसे सुबह एक कप चाय पिलाने के बाद जानवरों की तरह खेत में खुदाई, निराई कराने के लिए भेज दिया जाता था। ज्यादा काम होने पर मना करते ही उसकी पिटाई की जाती थी। कोई बंधक भाग न निकले, इसके लिए असलहाधारी तैनात रहते थे। शाम के वक्त ही खाना दिया जाता था और एक गोदामनुमा कमरे में कई लोगों को एक साथ रखा जाता था। पिछले डेढ़ माह में पगार के नाम पर एक भी पैसा नहीं दिया गया, साथ ही किसी की मोबाइल फोन से बात तक नहीं कराई जाती थी।
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डेढ़ माह बाद मोनू के घर में दिखा जश्नी माहौल
मोनू की बरामदगी की खबर जब कस्बे में पहुंची तो उसके घर में जश्न सा माहौल हो गया। चार जनवरी को मां बिटटा देवी और पिता ताराचन्द गुप्ता को अपने बेटे मोनू गुप्ता के सहारनपुर में बंधक होने की बात पता चली थी तो तभी से वे अन्न-जल त्याग कर बेटे की सलामती की दुआ मांग रहे थे। बृहस्पतिवार की भोर जब रोजा पुलिस मोनू गुप्ता को लेकर थाने पहुंची तो परिवार वाले एक दूसरे को मिठाई खिलाने लगे। यद्यपि मोनू अभी विधिक प्रक्रिया के चलते शुक्रवार को ही घर पहुंच पाएगा। शुक्रवार को उसका मेडिकल परीक्षण और कोर्ट में बयान होने हैं।