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नाबालिग साले का गला घोंटने वाले को उम्रकैद
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Wed, 21 Sep 2016 12:11 AM IST
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साले का गला घोंटने वाले को उम्रकैद
- फोटो : श्ााहजहांपुर उत्तर प्रदेश्ा
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मीरानपुर कटरा में सास के 100 वर्ग प्लाट को हथियाने एवं सास की पूरी संपत्ति हड़पने को 15 वर्षीय साले शिवम की गला घोंटकर हत्या करने वाले जीजा गोपाल उर्फ गोपी को विशेष न्यायाधीश शाहिद रजा ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसला सुनकर मृतक की मां और मूलरूप से बरेली के भुता थाना क्षेत्र के बेवल बसंतपुर गांव की निवासी कमलेश चौहान और परिवारीजनों ने कहा कि फैसले से कलेजे को ठंडक पहुंची है।
घटना से करीब 12 साल पहले कमलेश चौहान के पति का स्वर्गवास हो गया था और भुता में ससुराल वाले पैतृक संपत्ति व खेती को लेकर परिवार के दूसरे सदस्यों से रंजिश की स्थिति बनी हुई थी। उनके तीन बेटियां और एक बेटा शिवम था जो कि तिलहर में 10 वीं में पढ़ रहा था। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की शादी जैतीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नवादा निवासी गोपाल उर्फ गोपी से तीन साल पहले कर दी थी। गोपी ने अपनी सास के प्रति सहानुभूति जताते हुए उसे अपने विश्वास में लिया और उससे भुता की चार बीघे जमीन बिकवाकर मीरानपुर कटरा कस्बे में एक 100 वर्ग का प्लाट दिलवा दिया। वह सास के भुता वाली संपत्ति की भी देखरेख करने लगा और उससे होने वाली आय का हिसाब खुद ही रखने लगा जिससे कमलेश के ससुराल वालों से इसके बीच अनबन गहरी हो गई। इस बीच सास का विश्वास हासिल करने के बाद वह उससे 100 वर्ग गज वाला प्लाट अपने नाम करने को कई बार कह चुका था लेकिन वह टाल गईं। उन्हें इस बात लेकर दामाद के प्रति कोई संदेह नहीं उपजा था। वर्ष 2013 में 15 मार्च को परीक्षा का दौर चल रहा था और उस दिन अपराह्न दो बजे उसने घर लौटे शिवम को मोबाइल पर संपर्क कर बाजार में बुलवाया। शिवम मोबाइल कूपन रिचार्ज कराने की बात अपनी मां से कहकर बाजार गया तो फिर वापस नहीं लौटा। देर शाम को गोपी घर लौट आया और बाजार गए बेटे के देर तक घर न लौटने से परेशान को सास के साथ मिलकर शिवम की तलाश में जुटा। रात बीत गई। अगली सुबह कमलेश को अपने रिश्तेदारों से जानकारी मिली कि 15 मार्च को अपराह्न ढाई बजे शिवम अपने जीजा के सात बाइक पर कटरा के कसरक रेलवे फाटक से होकर खुदागंज वाले रास्ते पर जाता दिखा था। उसके बाद तो कमलेश का माथा ठनका और वह सीधे थाने पहुंचीं और दामाद पर शक जताते हुए संपत्ति के लालच में बेटे को अगवा कर लिए जाने एवं हत्या की आशंका संबंधी तहरीर दी।
उसके बाद पुलिस ने गोपी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की लेकिन वह 24 घंटे तक पुलिस को छकाता रहा। आखिरकार 17 मार्च 2013 को पुलिस की सख्ती और तर्क के आगे वह टूट गया और नाबालिग साले की हत्या करने की बात कबूली। बताया कि वह खुदागंज से आगे भुता वाले मार्ग पर नहर के पास देरतक साले को घुमाता रहा और सूर्यास्त के बाद अंधेरा होने पर घने गन्ने के खेत में शिवम का गला घोंट दिया। उस दौरान छटपटाते शिवम द्वारा बचने के प्रयास में गीले माटी आदि गोपी के शरीर पर लगे लेकिन दबाया गया गला जीजा ने तब तक घोंट रखा था जबतक की गर्दन लुढ़क नहीं गई। फिर शव को उसने पास के ही खेतों में जाने वाली नाली में डाल दिया और बाइक से वापस घर आकर पत्नी से गंदे कपड़े धुलवाए एवं खुद पूरी तसल्ली से देर तक नहाया। मामले की विवेचना कर रहे मीरानपुर कटरा थानाध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव ने गोपी की निशानदेही पर लाश को बरामद किया। फिर साक्ष्यों और तथ्यों के साथ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। सरकारी वकील सुनील कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत सात गवाहों के बयान व तर्क को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया।
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मोबाइल कॉल डिटेल से खुला कातिल का भेद
शाहजहांपुर। मीरानपुर कटरा थाना क्षेत्र में 15 मार्च 2013 की दोपहर को संदिग्ध हाल में गायब हुए दसवीं के छात्र शिवम की हत्या का भेद मोबाइल कॉल डिटेल रिपोर्ट में मिले कॉलर व रिसीवर के लोकेशनों के आधार पर हुआ। घटना वाले दिन अपराह्न एक बजे के बाद से शिवम और गोपी के बीच कई बार बात हुई। अपराह्न दो बजे के बाद दोनों के मोबाइल का टॉवर खुदागंज और उससे आगे भुता वाले के करीब मिला। शाम से शिवम का मोबाइल बंद हो गया जबकि गोपी के मोबाइल पर फरीदपुर होते हुए नेशनल हाईवे से मीरानरपुर कटरा को जाते हुए मिला था। हालांकि पूछताछ में पुलिस को गोपी ने खुदागंज जाने की बात नकार दी थी और जैतीपुर स्थित अपने गांव नवादा का जिक्र किया था। कॉल डिटेल के आधार पर एसओ नरेंद्र सिंह यादव ने जब उसके लोकेशनों का ब्योरा गोपी के सामने रखा तो वह भक्क रह गया और अपना अपराध कबूल कर लिया।
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घटना से करीब 12 साल पहले कमलेश चौहान के पति का स्वर्गवास हो गया था और भुता में ससुराल वाले पैतृक संपत्ति व खेती को लेकर परिवार के दूसरे सदस्यों से रंजिश की स्थिति बनी हुई थी। उनके तीन बेटियां और एक बेटा शिवम था जो कि तिलहर में 10 वीं में पढ़ रहा था। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की शादी जैतीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नवादा निवासी गोपाल उर्फ गोपी से तीन साल पहले कर दी थी। गोपी ने अपनी सास के प्रति सहानुभूति जताते हुए उसे अपने विश्वास में लिया और उससे भुता की चार बीघे जमीन बिकवाकर मीरानपुर कटरा कस्बे में एक 100 वर्ग का प्लाट दिलवा दिया। वह सास के भुता वाली संपत्ति की भी देखरेख करने लगा और उससे होने वाली आय का हिसाब खुद ही रखने लगा जिससे कमलेश के ससुराल वालों से इसके बीच अनबन गहरी हो गई। इस बीच सास का विश्वास हासिल करने के बाद वह उससे 100 वर्ग गज वाला प्लाट अपने नाम करने को कई बार कह चुका था लेकिन वह टाल गईं। उन्हें इस बात लेकर दामाद के प्रति कोई संदेह नहीं उपजा था। वर्ष 2013 में 15 मार्च को परीक्षा का दौर चल रहा था और उस दिन अपराह्न दो बजे उसने घर लौटे शिवम को मोबाइल पर संपर्क कर बाजार में बुलवाया। शिवम मोबाइल कूपन रिचार्ज कराने की बात अपनी मां से कहकर बाजार गया तो फिर वापस नहीं लौटा। देर शाम को गोपी घर लौट आया और बाजार गए बेटे के देर तक घर न लौटने से परेशान को सास के साथ मिलकर शिवम की तलाश में जुटा। रात बीत गई। अगली सुबह कमलेश को अपने रिश्तेदारों से जानकारी मिली कि 15 मार्च को अपराह्न ढाई बजे शिवम अपने जीजा के सात बाइक पर कटरा के कसरक रेलवे फाटक से होकर खुदागंज वाले रास्ते पर जाता दिखा था। उसके बाद तो कमलेश का माथा ठनका और वह सीधे थाने पहुंचीं और दामाद पर शक जताते हुए संपत्ति के लालच में बेटे को अगवा कर लिए जाने एवं हत्या की आशंका संबंधी तहरीर दी।
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उसके बाद पुलिस ने गोपी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की लेकिन वह 24 घंटे तक पुलिस को छकाता रहा। आखिरकार 17 मार्च 2013 को पुलिस की सख्ती और तर्क के आगे वह टूट गया और नाबालिग साले की हत्या करने की बात कबूली। बताया कि वह खुदागंज से आगे भुता वाले मार्ग पर नहर के पास देरतक साले को घुमाता रहा और सूर्यास्त के बाद अंधेरा होने पर घने गन्ने के खेत में शिवम का गला घोंट दिया। उस दौरान छटपटाते शिवम द्वारा बचने के प्रयास में गीले माटी आदि गोपी के शरीर पर लगे लेकिन दबाया गया गला जीजा ने तब तक घोंट रखा था जबतक की गर्दन लुढ़क नहीं गई। फिर शव को उसने पास के ही खेतों में जाने वाली नाली में डाल दिया और बाइक से वापस घर आकर पत्नी से गंदे कपड़े धुलवाए एवं खुद पूरी तसल्ली से देर तक नहाया। मामले की विवेचना कर रहे मीरानपुर कटरा थानाध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव ने गोपी की निशानदेही पर लाश को बरामद किया। फिर साक्ष्यों और तथ्यों के साथ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। सरकारी वकील सुनील कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत सात गवाहों के बयान व तर्क को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया।
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मोबाइल कॉल डिटेल से खुला कातिल का भेद
शाहजहांपुर। मीरानपुर कटरा थाना क्षेत्र में 15 मार्च 2013 की दोपहर को संदिग्ध हाल में गायब हुए दसवीं के छात्र शिवम की हत्या का भेद मोबाइल कॉल डिटेल रिपोर्ट में मिले कॉलर व रिसीवर के लोकेशनों के आधार पर हुआ। घटना वाले दिन अपराह्न एक बजे के बाद से शिवम और गोपी के बीच कई बार बात हुई। अपराह्न दो बजे के बाद दोनों के मोबाइल का टॉवर खुदागंज और उससे आगे भुता वाले के करीब मिला। शाम से शिवम का मोबाइल बंद हो गया जबकि गोपी के मोबाइल पर फरीदपुर होते हुए नेशनल हाईवे से मीरानरपुर कटरा को जाते हुए मिला था। हालांकि पूछताछ में पुलिस को गोपी ने खुदागंज जाने की बात नकार दी थी और जैतीपुर स्थित अपने गांव नवादा का जिक्र किया था। कॉल डिटेल के आधार पर एसओ नरेंद्र सिंह यादव ने जब उसके लोकेशनों का ब्योरा गोपी के सामने रखा तो वह भक्क रह गया और अपना अपराध कबूल कर लिया।