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एक एकड़ खेत में एक क्विंटल गेहूं, सदमे में किसान की मौत
निगोही।
Updated Wed, 15 Apr 2015 12:22 AM IST
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एक एकड़ में मात्र एक क्विंटल गेहूं निकलने का एक बुजुर्ग किसान को इतना गहरा सदमा बैठा कि उनकी सांसें ही थम गईं। घटना के बाद से किसान के घर में कोहराम मचा है।
निगोही क्षेत्र के गांव ढकिया तिवारी निवासी 70 वर्षीय रामभरोसे के पास मात्र एक एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने गांव वालों से कर्जा लेकर इसमें गेहूं की फसल बोई थी। जरूरत के हिसाब से खाद-पानी भी लगाया। फसल भी अच्छी हुई। रामभरोसे को उम्मीद थी कि लोगों का कर्ज अदा करने के बाद भी उन्हें ठीक-ठाक बचत हो जाएगी लेकिन कुदरत ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पिछले दिनों आंधी और बारिश से सारी फसल खेत में ही बिछ गई। रामभरोसे ने उस वक्त खुद को यह तसल्ली दे ली कि फसल गिरी ही है लेकिन उत्पादन बहुत कम नहीं होगा। सोमवार शाम उन्होंने कंबाइन से गेहूं की कटाई-गहाई कराई तो एक एकड़ में मात्र एक क्विंटल ही गेहूं निकला।
यह देख बुजुर्ग रामभरोसे सन्न रह गए। घर लौटे और गश खाकर जमीन पर गिर गए। घरवाले अभी उन्हें डॉक्टर के यहां ले जाने का उपक्रम कर रही रहे थे कि उनकी सांसें थम गईं। इससे घर में कोहराम मच गया। सूचना पर लेखपाल सतीशकुमार, कानूनगो रघुराज घर पहुंचे। उन्होंने घरवालों से फसल को हुए नुकसान के बारे में जानकारी ली। इधर, काननूनगो का कहना है कि रामभरोसे ने अपना खेत गांव के ही संजय को पटके पर दिया था। रुपया भी पेशगी ले लिया था। लिहाजा फसल खराब होने से उन्हें सदमा पहुंचने का सवाल ही नहीं उठता। वह कई वर्षों से खेत पर भी नहीं गए थे।
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निगोही क्षेत्र के गांव ढकिया तिवारी निवासी 70 वर्षीय रामभरोसे के पास मात्र एक एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने गांव वालों से कर्जा लेकर इसमें गेहूं की फसल बोई थी। जरूरत के हिसाब से खाद-पानी भी लगाया। फसल भी अच्छी हुई। रामभरोसे को उम्मीद थी कि लोगों का कर्ज अदा करने के बाद भी उन्हें ठीक-ठाक बचत हो जाएगी लेकिन कुदरत ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पिछले दिनों आंधी और बारिश से सारी फसल खेत में ही बिछ गई। रामभरोसे ने उस वक्त खुद को यह तसल्ली दे ली कि फसल गिरी ही है लेकिन उत्पादन बहुत कम नहीं होगा। सोमवार शाम उन्होंने कंबाइन से गेहूं की कटाई-गहाई कराई तो एक एकड़ में मात्र एक क्विंटल ही गेहूं निकला।
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यह देख बुजुर्ग रामभरोसे सन्न रह गए। घर लौटे और गश खाकर जमीन पर गिर गए। घरवाले अभी उन्हें डॉक्टर के यहां ले जाने का उपक्रम कर रही रहे थे कि उनकी सांसें थम गईं। इससे घर में कोहराम मच गया। सूचना पर लेखपाल सतीशकुमार, कानूनगो रघुराज घर पहुंचे। उन्होंने घरवालों से फसल को हुए नुकसान के बारे में जानकारी ली। इधर, काननूनगो का कहना है कि रामभरोसे ने अपना खेत गांव के ही संजय को पटके पर दिया था। रुपया भी पेशगी ले लिया था। लिहाजा फसल खराब होने से उन्हें सदमा पहुंचने का सवाल ही नहीं उठता। वह कई वर्षों से खेत पर भी नहीं गए थे।
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