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स्मैकिए और जुआरियों का अड्डा है काला मठ
Updated Sat, 14 Apr 2018 07:40 PM IST
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स्मैकिए और जुआरियों का अड्डा है काला मठ
पूरे दिन होता रहता है जुआ और पड़े रहते है स्मैकिये
कई जिलों के जुआरी जुआ खेलने आते हैं यहां
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां।
पुवायां में जिस काला मठ पर बृहस्पतिवार रात वृद्ध बाबूराम की हत्या की गई है, वहां पूरे दिन स्मैकिए और जुआरी जमा रहते हैं। यही वजह है कि संभ्रात लोग उधर जाने से कतराते रहते हैं।
काला मठ की पहचान यूं तो एक मंदिर की है, लेकिन इसकी पहचान जुआरियों के अड्डे की भी है। काला मठ जुएं के सुरक्षित अड्डे के रूप में आसपास के जिलों तक जाना जने लगा है। यहां खीरी, पीलीभीत, बदायूं तक के जुआरी जुआ खेलने आते हैं। स्मैकिए भी पूरा दिन यहीं जमे रहते हैं। नशा अधिक होने पर स्मैकिए मंदिर परिसर में ही लेट जाते हैं।
काला मठ मंदिर नगर से सटा हुआ है। मंदिर परिसर में बाग के साथ ही घनी झाड़ियां भी हैं। लोग इधर कम ही जाते हैं। मंदिर के पास हैंडपंप लगा होने और लेटने आदि की व्यवस्था होने के चलते स्मैकिए पूरे दिन यहीं पड़े रहते हैं। कुछ स्मैकिए तो रात को भी यहां से नहीं जाते। किसी का अंतिम संस्कार आदि होने पर ही यहां भीड़ होती है, नहीं तो पूरे दिन सन्नाटा ही रहता है। जुआरियों का भी यह पसंदीदा स्थान है। कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के चलते यहां पूरे दिन जुआ होता है।
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पूरे दिन होता रहता है जुआ और पड़े रहते है स्मैकिये
कई जिलों के जुआरी जुआ खेलने आते हैं यहां
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां।
पुवायां में जिस काला मठ पर बृहस्पतिवार रात वृद्ध बाबूराम की हत्या की गई है, वहां पूरे दिन स्मैकिए और जुआरी जमा रहते हैं। यही वजह है कि संभ्रात लोग उधर जाने से कतराते रहते हैं।
काला मठ की पहचान यूं तो एक मंदिर की है, लेकिन इसकी पहचान जुआरियों के अड्डे की भी है। काला मठ जुएं के सुरक्षित अड्डे के रूप में आसपास के जिलों तक जाना जने लगा है। यहां खीरी, पीलीभीत, बदायूं तक के जुआरी जुआ खेलने आते हैं। स्मैकिए भी पूरा दिन यहीं जमे रहते हैं। नशा अधिक होने पर स्मैकिए मंदिर परिसर में ही लेट जाते हैं।
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काला मठ मंदिर नगर से सटा हुआ है। मंदिर परिसर में बाग के साथ ही घनी झाड़ियां भी हैं। लोग इधर कम ही जाते हैं। मंदिर के पास हैंडपंप लगा होने और लेटने आदि की व्यवस्था होने के चलते स्मैकिए पूरे दिन यहीं पड़े रहते हैं। कुछ स्मैकिए तो रात को भी यहां से नहीं जाते। किसी का अंतिम संस्कार आदि होने पर ही यहां भीड़ होती है, नहीं तो पूरे दिन सन्नाटा ही रहता है। जुआरियों का भी यह पसंदीदा स्थान है। कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के चलते यहां पूरे दिन जुआ होता है।
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