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Shahjahanpur News: घर में बनाएं नो मोबाइल जोन...परिवार के साथ बिताएं समय

Sun, 26 Oct 2025 12:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 26 Oct 2025 12:53 AM IST
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Create a no-mobile zone at home...spend time with your family
गुरुनानक पाठशाला कन्या हाईस्कूल में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में उप​स्थित मनोचिकित्सक डॉ. अ​भि
शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने कहा कि मोबाइल का अधिक इस्तेमाल न केवल हमें मानसिक तौर पर कमजोर कर रहा है बल्कि शारीरिक अक्षमता का शिकार भी बना रहा है। इससे बचने के लिए हमें घर के एक हिस्से को नो मोबाइल जोन बनाना चाहिए। साथ ही सुबह उठते ही या रात में सोने से पहले मोबाइल देखना बंद करना चाहिए। डॉ. अभिनव अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शनिवार को गुरुनानक पाठशाला कन्या हाईस्कूल में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं को संबोधित कर रहे थे।
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डाॅ. अभिनव ने कहा कि वर्तमान में मानसिक अस्वस्थता का एक बड़ा कारण मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल है। इसके दुष्प्रभाव नजर आने लगे हैं। घर में नो-मोबाइल जोन बनाना चाहिए। उस स्थान पर लिखकर टांग दें कि यहां मोबाइल का इस्तेमाल करना मना है। खासतौर पर भोजन करते समय लोगों को मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि सुबह उठते ही लोग सबसे पहले मोबाइल चेक करते हैं। यह अच्छी आदत नहीं है। कई बार सुबह-सुबह मोबाइल के जरिये दूरदराज हुई कोई अप्रिय घटना की खबर देखकर मन में घबराहट पैदा हो जाती है। इसका प्रभाव दिनचर्या पर पड़ता है। इसी तरह रात में सोने से पहले भी मोबाइल देखना नुकसानदायक है।
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सोने के लिए बेड पर जाते समय हमारा दिमाग दिनभर किए गए कामकाज को लांग टर्म मेमोरी के रूप में मस्तिष्क में संरक्षित करता है। मोबाइल देखने से यह प्रक्रिया बाधित होती है। प्रधानाचार्य हरमीत कौर ने छात्राओं को मोबाइल की बजाय किताबों को पढ़ने की सलाह दी। छात्राओं को अखबार पढ़ना क्यों जरूरी है और सर्वाइकल कैंसर के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान करीब 50 छात्राएं उपस्थित रहीं। सुचिता, पूजा वर्मा, ललिता, रमा यादव, कंचन मिश्रा आदि मौजूद रहीं।
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शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दें
मोबाइल का अधिक इस्तेमाल शारीरिक गतिवधियों को भी प्रभावित करता है। हम खेलकूद या दूसरी शारीरिक क्रियाओं को देने वाले समय को मोबाइल में गवां देते हैं। इससे हमारे मन-मस्तिष्क पर थकान हावी होती है। ब्रेन के केमिकल बाधित होते हैं। आंखें कमजोर होती हैं, गर्दन-कंधे में दर्द पैदा होता है, नींद खराब होती है, साथ ही बैठने की मुद्रा भी बिगड़ जाती है। इससे बचने के लिए दिन में कम से कम 20 मिनट का समय शारीरिक गतिविधियों के लिए निकालें। अगर बाहर खेलने नहीं जा सकते तो घर की छत पर टहलें। अन्य तरह की मानसिक-शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लें। मोबाइल का इस्तेमाल केवल जरूरत पड़ने पर ही करें। बेहतर होगा कि एक हॉबी विकसित करें। खाली समय में ड्राइंग-पेंटिंग, लोगों से बातचीत करने की आदत डालें। उन चीजों को करने की कोशिश करें जिससे डर लगता हो।

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खुद की तुलना दूसरों से न करें
डॉ. अभिनव ने बताया कि तकनीक हमारे इस्तेमाल के लिए बनी है लेकिन हम खुद इस्तेमाल हो रहे हैं। तकनीक हमें हाईजैक कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आने के बाद हम उस पर हद से ज्यादा निर्भर होने लगे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया में दूसरों को खुद से बेहतर देखकर हमारे अंदर आत्मविश्वास की कमी आने लगी है। हम दूसरों से खुद की तुलना करने लग जाते हैं जिससे मानसिक तौर पर परेशान हो जाते हैं। इसलिए सोशल मीडिया से दूरी बनाएं और पढ़ाई-लिखाई में ध्यान देकर अपना कॅरिअर बेहतर करें।
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