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Shahjahanpur News: तीन लाख खर्च कर भी जिंदा नहीं रख पाए... मर गए 16 हजार पौधे
Sat, 25 Feb 2023 12:51 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sat, 25 Feb 2023 12:51 AM IST
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ग्राम राईखेड़ा के पास सूखी पड़ी पौध, गड्ढों से पौध नष्ट होने के बाद उगी घास। संवाद
शाहजहांपुर। दो दिन पहले आए बजट में सरकार भले ही प्रदेश में 2030 तक वृक्षावरण (वनाच्छादित) क्षेत्र 9.23 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का प्रावधान किया हो लेकिन अनदेखी और लापरवाही पौधों को जिंदा नहीं रहने दे रही है। लाखों रुपये खर्च करके पौधे लगाए तो जा रहे हैं, लेकिन उन्हें संरक्षित नहीं किया जा रहा है।
दो वर्षों में वन विभाग की ओर से लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे और उससे जुड़े संपर्क मार्गों पर किया गया पौधरोपण अनदेखी के चलते असफल हो गया है। यहां वर्ष 2021-22 और 2022-23 में कुल 16,500 पौधे लगाए गए थे, लेकिन इनमें से नाममात्र के ही पौधे जीवित हैं। करीब 16 हजार पौधे नष्ट हो गए हैं। वन विभाग बाढ़ को इसकी वजह बता रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी जांच कराने की भी बात कह रहे हैं।
वन विभाग की ओर से वर्ष 2020-21 में अजीजगंज डैम रोड से नगरिया मोड़ तक पांच हेक्टेयर भूमि में 5500, नेशनल हाईवे पर टोल प्लाजा से नगरिया मोड़ तक 5500, वर्ष 2022-23 में नगरिया मोड़ से कपसेड़ा तक पांच हेक्टेयर भूमि में 5500 पौधे यानी कुल 16,500 पौधे लगाए गए थे। ये पौधे अनदेखी के चलते नष्ट हो चुके हैं।
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अमूमन प्रतिवर्ष वन विभाग के पौधरोपण की सफलता प्रतिशत 90 फीसदी रहता है, लेकिन यहां सफलता 15-20 प्रतिशत से ज्यादा नजर नहीं आ रही है। हालत यह है कि जहां पौधे रोपे गए थे, वहां सिर्फ गड्ढे हैं। उनमें घास उग आई है। पौधों का अस्तित्व ही मिट गया है। गांव राईखेड़ा समेत कुछ स्थानों पर नाममात्र के पौधे जीवित बचे हैं। ये पौधे भी विभागीय लापरवाही के चलते सूख रहे हैं। पौधों से पत्ते नदारद हो चुके हैं।
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माली को बना दिया वन रक्षक
वन विभाग में माली के पद पर कार्यरत नरेश कुमार को वन रक्षक के पद पर अस्थाई नियुक्ति देकर राईखेड़ा बीट का प्रभारी बना दिया गया है। हाईवे और संपर्क मार्गों के किनारे 16,500 पौधे नरेश कुमार के ही कार्यकाल में ही रोपे गए थे। एक माली को स्थाई नियुक्ति देकर वनरक्षक नियुक्त करने एवं बड़ी बीट का प्रभार देना विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। चूंकि वनरक्षक प्रशिक्षित होते हैं। पौधों के रोपण और उनकी सुरक्षा के संबंध में उन्हें पूर्ण जानकारी होती है। ऐसे में अप्रशिक्षित कर्मी को चार्ज दिया जाना सवालों के घेरे में है। जबकि दो वनरक्षक धर्मेंद्र सिंह और संजीव कुमार को कार्यालय में अटैच रखा गया है।
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लगभग तीन लाख रुपये का नुकसान
वन विभाग की ओर से पौध तैयार करने, गड्ढे खुदान, खाद, पानी डालने एवं रोपण के लिए अलग-अलग मदों से बजट खर्च किया जाता है। ऐसे में पौधे नष्ट हो जाने पर लगभग तीन लाख रुपये के राजस्व की क्षति का आकलन है। उधर, वन विभाग की राईखेड़ा बीट प्रभारी नरेश कुमार का कहना है कि बाढ़ आ जाने के चलते पौधे नष्ट हो गए हैं। इनका रोपण दोबारा कराया जाएगा।
वर्जन
पौधरोपण असफल होने की जानकारी नहीं है। मामले की जांच गंभीरता से कराई जाएगी। यदि लापरवाही सामने आई तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - दिलीप श्रीवास्तव, एसडीओ, वन विभाग शाहजहांपुर।
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दो वर्षों में वन विभाग की ओर से लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे और उससे जुड़े संपर्क मार्गों पर किया गया पौधरोपण अनदेखी के चलते असफल हो गया है। यहां वर्ष 2021-22 और 2022-23 में कुल 16,500 पौधे लगाए गए थे, लेकिन इनमें से नाममात्र के ही पौधे जीवित हैं। करीब 16 हजार पौधे नष्ट हो गए हैं। वन विभाग बाढ़ को इसकी वजह बता रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी जांच कराने की भी बात कह रहे हैं।
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वन विभाग की ओर से वर्ष 2020-21 में अजीजगंज डैम रोड से नगरिया मोड़ तक पांच हेक्टेयर भूमि में 5500, नेशनल हाईवे पर टोल प्लाजा से नगरिया मोड़ तक 5500, वर्ष 2022-23 में नगरिया मोड़ से कपसेड़ा तक पांच हेक्टेयर भूमि में 5500 पौधे यानी कुल 16,500 पौधे लगाए गए थे। ये पौधे अनदेखी के चलते नष्ट हो चुके हैं।
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अमूमन प्रतिवर्ष वन विभाग के पौधरोपण की सफलता प्रतिशत 90 फीसदी रहता है, लेकिन यहां सफलता 15-20 प्रतिशत से ज्यादा नजर नहीं आ रही है। हालत यह है कि जहां पौधे रोपे गए थे, वहां सिर्फ गड्ढे हैं। उनमें घास उग आई है। पौधों का अस्तित्व ही मिट गया है। गांव राईखेड़ा समेत कुछ स्थानों पर नाममात्र के पौधे जीवित बचे हैं। ये पौधे भी विभागीय लापरवाही के चलते सूख रहे हैं। पौधों से पत्ते नदारद हो चुके हैं।
माली को बना दिया वन रक्षक
वन विभाग में माली के पद पर कार्यरत नरेश कुमार को वन रक्षक के पद पर अस्थाई नियुक्ति देकर राईखेड़ा बीट का प्रभारी बना दिया गया है। हाईवे और संपर्क मार्गों के किनारे 16,500 पौधे नरेश कुमार के ही कार्यकाल में ही रोपे गए थे। एक माली को स्थाई नियुक्ति देकर वनरक्षक नियुक्त करने एवं बड़ी बीट का प्रभार देना विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। चूंकि वनरक्षक प्रशिक्षित होते हैं। पौधों के रोपण और उनकी सुरक्षा के संबंध में उन्हें पूर्ण जानकारी होती है। ऐसे में अप्रशिक्षित कर्मी को चार्ज दिया जाना सवालों के घेरे में है। जबकि दो वनरक्षक धर्मेंद्र सिंह और संजीव कुमार को कार्यालय में अटैच रखा गया है।
लगभग तीन लाख रुपये का नुकसान
वन विभाग की ओर से पौध तैयार करने, गड्ढे खुदान, खाद, पानी डालने एवं रोपण के लिए अलग-अलग मदों से बजट खर्च किया जाता है। ऐसे में पौधे नष्ट हो जाने पर लगभग तीन लाख रुपये के राजस्व की क्षति का आकलन है। उधर, वन विभाग की राईखेड़ा बीट प्रभारी नरेश कुमार का कहना है कि बाढ़ आ जाने के चलते पौधे नष्ट हो गए हैं। इनका रोपण दोबारा कराया जाएगा।
वर्जन
पौधरोपण असफल होने की जानकारी नहीं है। मामले की जांच गंभीरता से कराई जाएगी। यदि लापरवाही सामने आई तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - दिलीप श्रीवास्तव, एसडीओ, वन विभाग शाहजहांपुर।

ग्राम राईखेड़ा के पास सूखी पड़ी पौध, गड्ढों से पौध नष्ट होने के बाद उगी घास। संवाद

ग्राम राईखेड़ा के पास सूखी पड़ी पौध, गड्ढों से पौध नष्ट होने के बाद उगी घास। संवाद