{"_id":"6a95dcc0ca1513aa5201e86d","slug":"contract-drivers-services-terminated-upon-discovery-of-a-fake-medical-certificate-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1036-183282-2026-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: फर्जी चिकित्सीय प्रमाणपत्र मिलने पर संविदा चालक की सेवा समाप्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: फर्जी चिकित्सीय प्रमाणपत्र मिलने पर संविदा चालक की सेवा समाप्त
विज्ञापन
शाहजहांपुर। हरियाणा में मादक पदार्थ तस्करी के मामले में जेल जा चुके परिवहन निगम के संविदा चालक मोर सिंह पर कार्रवाई हुई है। चिकित्सीय प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद एआरएम ने उसकी सेवा समाप्त कर दी है।
गढ़िया रंगीन थाना क्षेत्र के गांव मौहटिया निवासी मोर सिंह लंबे समय तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहे थे। निगम की ओर से नोटिस भेजे जाने पर उसने गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए जवाब दिया। बीमारी के संबंध में उसने गढ़िया रंगीन आरोग्य केंद्र का शपथपत्र भी निगम को उपलब्ध कराया था। प्रमाणपत्र पर संदेह होने पर उसकी जांच सीएमओ स्तर से कराई गई। जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया।
इसी बीच जैतीपुर के खमरिया निवासी वीरभान ने शिकायत कर आरोप लगाया कि मोर सिंह के जेल जाने के बाद भी उसे ड्यूटी पर ज्वाइन करा दिया गया। शिकायत के आधार पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने जांच कराई। इसमें सामने आया कि मोर सिंह हरियाणा के रोहतक में मादक पदार्थ तस्करी के मामले में पुलिस अभिरक्षा में रहा था और बाद में जमानत पर रिहा हुआ।
विज्ञापन
सीएमओ की ओर से भी चिकित्सीय प्रमाणपत्र फर्जी होने की रिपोर्ट एआरएम को भेजी गई। एआरएम अरुण कुमार ने बताया कि जेल जाने और फर्जी चिकित्सीय प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के मामले को गंभीरता से लेते हुए चालक मोर सिंह की संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है।
विज्ञापन
गढ़िया रंगीन थाना क्षेत्र के गांव मौहटिया निवासी मोर सिंह लंबे समय तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहे थे। निगम की ओर से नोटिस भेजे जाने पर उसने गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए जवाब दिया। बीमारी के संबंध में उसने गढ़िया रंगीन आरोग्य केंद्र का शपथपत्र भी निगम को उपलब्ध कराया था। प्रमाणपत्र पर संदेह होने पर उसकी जांच सीएमओ स्तर से कराई गई। जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया।
विज्ञापन
इसी बीच जैतीपुर के खमरिया निवासी वीरभान ने शिकायत कर आरोप लगाया कि मोर सिंह के जेल जाने के बाद भी उसे ड्यूटी पर ज्वाइन करा दिया गया। शिकायत के आधार पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने जांच कराई। इसमें सामने आया कि मोर सिंह हरियाणा के रोहतक में मादक पदार्थ तस्करी के मामले में पुलिस अभिरक्षा में रहा था और बाद में जमानत पर रिहा हुआ।
विज्ञापन
सीएमओ की ओर से भी चिकित्सीय प्रमाणपत्र फर्जी होने की रिपोर्ट एआरएम को भेजी गई। एआरएम अरुण कुमार ने बताया कि जेल जाने और फर्जी चिकित्सीय प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के मामले को गंभीरता से लेते हुए चालक मोर सिंह की संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है।