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तहसील के रिकार्ड रूम में खंगाले जा रहे मऊ रसूलपुर के राजस्व अभिलेख
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जलालाबाद/ अल्हागंज। गांव मऊ रसूलपुर में सरकारी और सार्वजनिक महत्व की जमीनों पर अवैध कब्जा बरकरार रखने के लिए भूमाफिया द्वारा राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से खसरा-खतौनी और अन्य राजस्व अभिलेख गायब करा दिए जाने के करीब डेढ़ दशक पुराने मामले मेें प्रशासनिक जांच शुरू हो जाने से इस करतूत में शामिल लोग बचाव के रास्ते खोजने में जुट गए हैं। उधर, गांव के उन गरीब परिवारों में भी उम्मीद की किरण जागी है, जिन्हें जरूरी अभिलेख नहीं होने के कारण अभी तक विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। इस बीच, तहसील में अधिकारियों ने वहां के अभिलेखागार में गांव का रिकॉर्ड खंगालने की कवायद शुरू करा दी है।
क्षेत्र के गांव चिलौआ निवासी सपा नेता एवं पूर्व जेल विजिटर रामवीर सोमवंशी ने बीते शनिवार को अल्हागंज थाना परिसर में आयोजित समाधान दिवस में मऊ रसूलपुर के कुछ ग्रामीणों को अधिकारियों के सामने पेश कर बताया था कि गांव मेें विभिन्न योजनाओं के तमाम पात्र लोग निवास कर रहे हैं, लेकिन तहसील के रिकार्ड में ग्राम पंचायत के खसरा, खतौनी, नक्शा, जिल्द आदि राजस्व अभिलेख नहीं मिलने से यह सभी लोग विभिन्न योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। सपा नेता सोमवंशी ने अधिकारियों को यह भी बताया कि जरूरी अभिलेख नहीं होने से गांव के लोगों की जमीनों के बैनामे, दाखिल-खारिज, विरासत आदि अन्य जरूरी कामों में भी रुकावट पड़ रही है। डीएम के आदेश पर जांच की शुरुआत तहसील के रिकार्ड रूम से हुई, लेकिन अभी इसमेें कोई कामयाबी नहीं मिल सकी है।
ग्रामीणों की समस्याएं, उन्हीं की जुबानी
मां फुलवाशा देवी की विधवा पेंशन नहीं बन पा रही है क्योंकि इसमें लेखपाल की रिपोर्ट लगना अनिवार्य है। मां के नाम पिता ने पांच बीघा भूमि खरीदी थी, लेकिन दाखिल खारिज में अड़चन पड़ रही है और पिता के निधन के बाद विरासत भी दर्ज नहीं हो सकी।
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-अभिषेक श्रीवास्तव, मऊ रसूलपुर
मेरा पुत्र विकलांग है। उसकी पेंशन बंधवाने के लिए शुरू में काफी प्रयास किए, लेकिन गांव के सरकारी अभिलेख गायब होने के कारण यह काम नहीं हो सका। कृषि भूमि का रिकार्ड नहीं होने से बैंक वाले किसान क्रेडिट कार्ड बनाने में भी आनाकानी कर रहे हैं।
-भोला कश्यप, मऊ रसूलपुर
पति रामशरण का स्वर्गवास हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2010 में जमीन खरीदी थी, लेकिन उसकी रजिस्ट्री और दाखिल खारिज का काम अभी तक अटका है। पति के नाम दर्ज जमीन पर गांव के कुछ लोगों का कब्जा है और किसी प्रकार गुजर-बसर कर रही हूं।
-रामरती कश्यप, मऊ रसूलपुर
डीएम ने मऊ रसूलपुर के मामले में एसडीएम को जांच सौंपी है। इसके बाद बिंदुवार समस्याओं को एकत्रित किया जा रहा है। तहसील के रिकार्ड में भी गांव के अभिलेख तलाश किए जा रहे हैं। पात्रों की स्थलीय जांच का तब तक कोई नतीजा नहीं निकलेगा, जब तक कि अभिलेख नही होंगे। समस्याओं के निस्तारण के लिए लोगों से मिलने वाली जानकारी को आधार बनाया जाएगा। साथ ही जन समस्याओं के स्थायी निस्तारण को अभिलेख दोबारा बनवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- अजय कुमार, तहसीलदार, जलालाबाद
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क्षेत्र के गांव चिलौआ निवासी सपा नेता एवं पूर्व जेल विजिटर रामवीर सोमवंशी ने बीते शनिवार को अल्हागंज थाना परिसर में आयोजित समाधान दिवस में मऊ रसूलपुर के कुछ ग्रामीणों को अधिकारियों के सामने पेश कर बताया था कि गांव मेें विभिन्न योजनाओं के तमाम पात्र लोग निवास कर रहे हैं, लेकिन तहसील के रिकार्ड में ग्राम पंचायत के खसरा, खतौनी, नक्शा, जिल्द आदि राजस्व अभिलेख नहीं मिलने से यह सभी लोग विभिन्न योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। सपा नेता सोमवंशी ने अधिकारियों को यह भी बताया कि जरूरी अभिलेख नहीं होने से गांव के लोगों की जमीनों के बैनामे, दाखिल-खारिज, विरासत आदि अन्य जरूरी कामों में भी रुकावट पड़ रही है। डीएम के आदेश पर जांच की शुरुआत तहसील के रिकार्ड रूम से हुई, लेकिन अभी इसमेें कोई कामयाबी नहीं मिल सकी है।
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ग्रामीणों की समस्याएं, उन्हीं की जुबानी
मां फुलवाशा देवी की विधवा पेंशन नहीं बन पा रही है क्योंकि इसमें लेखपाल की रिपोर्ट लगना अनिवार्य है। मां के नाम पिता ने पांच बीघा भूमि खरीदी थी, लेकिन दाखिल खारिज में अड़चन पड़ रही है और पिता के निधन के बाद विरासत भी दर्ज नहीं हो सकी।
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-अभिषेक श्रीवास्तव, मऊ रसूलपुर
मेरा पुत्र विकलांग है। उसकी पेंशन बंधवाने के लिए शुरू में काफी प्रयास किए, लेकिन गांव के सरकारी अभिलेख गायब होने के कारण यह काम नहीं हो सका। कृषि भूमि का रिकार्ड नहीं होने से बैंक वाले किसान क्रेडिट कार्ड बनाने में भी आनाकानी कर रहे हैं।
-भोला कश्यप, मऊ रसूलपुर
पति रामशरण का स्वर्गवास हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2010 में जमीन खरीदी थी, लेकिन उसकी रजिस्ट्री और दाखिल खारिज का काम अभी तक अटका है। पति के नाम दर्ज जमीन पर गांव के कुछ लोगों का कब्जा है और किसी प्रकार गुजर-बसर कर रही हूं।
-रामरती कश्यप, मऊ रसूलपुर
डीएम ने मऊ रसूलपुर के मामले में एसडीएम को जांच सौंपी है। इसके बाद बिंदुवार समस्याओं को एकत्रित किया जा रहा है। तहसील के रिकार्ड में भी गांव के अभिलेख तलाश किए जा रहे हैं। पात्रों की स्थलीय जांच का तब तक कोई नतीजा नहीं निकलेगा, जब तक कि अभिलेख नही होंगे। समस्याओं के निस्तारण के लिए लोगों से मिलने वाली जानकारी को आधार बनाया जाएगा। साथ ही जन समस्याओं के स्थायी निस्तारण को अभिलेख दोबारा बनवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- अजय कुमार, तहसीलदार, जलालाबाद