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पेट्रोल पंपों पर खूब चले बंद नोट
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:33 PM IST
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नोटबंदी
- फोटो : अमर उजाला
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पुराने नोट चलाने का अंतिम दिन घोषित होने से उमड़ी भीड़
टेलीफोन, बिजली विभाग के कैश काउंटरों पर लगीं कतारें
केंद्र सरकार के नोटबंदी लागू करने के बाद पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बदले जाने का 24 नवंबर आखिरी दिन घोषित होने के कारण बृहस्पतिवार को प्रतिबंधित नोट जिले के पेट्रोल पंपों समेत टेलीफोन एक्सचेंज और बिजली विभाग के कैश काउंटरों पर खूब चलाए गए। पेट्रोल पंप पर पुराने नोट लेकर आने वालों की सुबह से भीड़ जुटने लगी। इसी तरह टेलीफोन और बिजली के बिल जमा करने वालों में पुराने नोट खपाने की होड़ लगी रही। इस बीच, आरबीआई से करेंसी नहीं मिल पाने से बैंक शाखाओं में नोटों का संकट बरकरार रहा।
बता दें कि पुराने नोट बदलने की केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार तक छूट दिए जाने की घोषणा की थी। इसी के साथ पॉवर कारपोरेशन और बीएसएनएल के अफसरों ने भी इसी अवधि तक प्रतिबंधित नोटों से बिजली-टेलीफोन के बिल जमा करने का ऑफर दिया था। बंद हो चुके नोट खपाने का आखिरी मौका हाथ से न निकलने देने की जद्दोजहद में लोग सुबह नौ बजे के बाद से पेट्रोल पंपों और अन्य विभागोें के कैश काउंटरों पर जमा होने लगे।
पेट्रोलियम फिलिंग स्टेशनों पर वाहन के साथ दस-बीस लीटर वाली केन लेकर लोग सुबह से जमा होने लगे। उन्होंने जरूरत भर का पेट्रोल-डीजल वाहनों में भराने के बाद बाकी तेल केनों में भरकर पुराने नोटों का निपटारा किया। टेलीफोन एक्सचेंज के कैश काउंटर पर भी बिल जमा करने वाले पोस्टपेड कनेक्शन धारक सुबह से दोपहर बाद तक उमड़ते रहे। प्रीपेड सिम वालों ने भी खूब रिचार्ज कराए। पॉवर कारपोरेशन के बहादुरगंज और गोविंदगंज समेत ककरा कलां, हथौड़ा, रोजा आदि उपकेंद्रों पर कैश काउंटर शाम तक खुले रखे गए, जिससे कि किसी भी उपभोक्ता को बिल जमा किए बगैर निराश नहीं लौटना पड़े।
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इस तरह बैंकों के आगे लगने वाली कतारें बृहस्पतिवार को इन सभी स्थानों पर डाइवर्ट हो गईं। हालांकि, बैंकों में भी विभिन्न काउंटरों पर भीड़ रही, लेकिन लाइनें केवल एटीएम के बाहर तभी तक दिखीं, जब तक वहां कैश उपलब्ध रहा। बैंक पहुंचने वालों में ज्यादातर ऐसे खातेदार थे, जो नोटबंदी के बाद से उमड़ रही भीड़ के कारण बैंकिंग से जुड़े अन्य काम नहीं कर पा रहे थे। बैंक स्टाफ ने बुजुर्गों के पुराने नोट बदलने के अतिरिक्त केवल अपने खातेदारों के कामों को प्राथमिकता दी।
मेडिकल स्टोर स्वामी ने जमा कराए छोटे नोट
छोटे नोटों की किल्लत से जूझ रहे बैंक प्रबंधन को व्यापारी वर्ग का लगातार सहयोग मिल रहा है। गुरुवार को फाइन मेडिकल एजेंसी के स्वामी रहबर अली खां इंडियन बैंक के अपने खाते में जमा करने के लिए सौ, पचास, बीस और दस रुपये के नोटों की गड्डियां लेकर पहुंचे तो बैंक स्टाफ ने उनका गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि नोटबंदी लागू होने के बाद से रहबर अली रोजना छोटे नोट जमा करने के लिए ला रहे हैं।
डीएम से भुगतान कराने की लगाई गुहार
बैंक खाते में रकम होने पर भी भुगतान के लिए टालमटोल किए जाने से परेशान लोगों ने डीएम राम गणेश से भुगतान कराने की गुहार लगाई है। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की केरूगंज शाखा के खातेदार अमित कुमार, कन्हैया अग्रवाल, रोहित सक्सेना आदि ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि दस दिन से बैंक के चक्कर काटने पर भी धनराशि नहीं मिली, जबकि बैंक में भुगतान के लिए कैश रहता है। उधर, हद्दफ चौकी के पास रहने वाले श्रमिक परवेज अली ने डीएम को बताया कि वह मजदूरी करते हैं और काम के बदले पांच सौ के तीन नोट और एक नोट हजार का मिला। पुराने नोट कई दिन दौड़ लगाने पर भी किसी बैंक शाखा पर नहीं बदले गए जबकि घर में कुछ खाने को कुछ नहीं बचा है। डीएम ने दोनों मामलों में अग्रणी बैंक प्रबंधक को जन सामान्य की समस्या का समाधान कराने के निर्देश दिए हैं।
दिसंबर में बेटी की शादी, निकासी को चार ने किया आवेदन
शाहजहांपुर। जिले में एसबीआई की शाखाओं और एटीएम पर सौ और दो हजार रुपयों के नोट का भुगतान से पहले की तुलना में बृहस्पतिवार तक ग्राहकों की भीड़ काफी कम हो गई। टाउन हाल स्थित मेन ब्रांच में ग्राहकों कतार लगनी भी बंद हो गई है। इस बीच दिसंबर में होने वाली बेटी के शादी के लिए एकमुश्त ढाई लाख रुपये का भुगतान प्राप्त करने के लिए चार अभिभावकों ने एसबीआई मेन ब्रांच में बृहस्पतिवार को आवेदन किया। चीफ मैनेजर संतोष कुमार झा ने बताया कि पहले नौ बेटियों के शादियों के लिए उनके अभिभावकों को ढाई - ढाई लाख रुपये एकमुश्त भुगतान कर दिए गए हैं।
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टेलीफोन, बिजली विभाग के कैश काउंटरों पर लगीं कतारें
केंद्र सरकार के नोटबंदी लागू करने के बाद पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बदले जाने का 24 नवंबर आखिरी दिन घोषित होने के कारण बृहस्पतिवार को प्रतिबंधित नोट जिले के पेट्रोल पंपों समेत टेलीफोन एक्सचेंज और बिजली विभाग के कैश काउंटरों पर खूब चलाए गए। पेट्रोल पंप पर पुराने नोट लेकर आने वालों की सुबह से भीड़ जुटने लगी। इसी तरह टेलीफोन और बिजली के बिल जमा करने वालों में पुराने नोट खपाने की होड़ लगी रही। इस बीच, आरबीआई से करेंसी नहीं मिल पाने से बैंक शाखाओं में नोटों का संकट बरकरार रहा।
बता दें कि पुराने नोट बदलने की केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार तक छूट दिए जाने की घोषणा की थी। इसी के साथ पॉवर कारपोरेशन और बीएसएनएल के अफसरों ने भी इसी अवधि तक प्रतिबंधित नोटों से बिजली-टेलीफोन के बिल जमा करने का ऑफर दिया था। बंद हो चुके नोट खपाने का आखिरी मौका हाथ से न निकलने देने की जद्दोजहद में लोग सुबह नौ बजे के बाद से पेट्रोल पंपों और अन्य विभागोें के कैश काउंटरों पर जमा होने लगे।
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पेट्रोलियम फिलिंग स्टेशनों पर वाहन के साथ दस-बीस लीटर वाली केन लेकर लोग सुबह से जमा होने लगे। उन्होंने जरूरत भर का पेट्रोल-डीजल वाहनों में भराने के बाद बाकी तेल केनों में भरकर पुराने नोटों का निपटारा किया। टेलीफोन एक्सचेंज के कैश काउंटर पर भी बिल जमा करने वाले पोस्टपेड कनेक्शन धारक सुबह से दोपहर बाद तक उमड़ते रहे। प्रीपेड सिम वालों ने भी खूब रिचार्ज कराए। पॉवर कारपोरेशन के बहादुरगंज और गोविंदगंज समेत ककरा कलां, हथौड़ा, रोजा आदि उपकेंद्रों पर कैश काउंटर शाम तक खुले रखे गए, जिससे कि किसी भी उपभोक्ता को बिल जमा किए बगैर निराश नहीं लौटना पड़े।
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इस तरह बैंकों के आगे लगने वाली कतारें बृहस्पतिवार को इन सभी स्थानों पर डाइवर्ट हो गईं। हालांकि, बैंकों में भी विभिन्न काउंटरों पर भीड़ रही, लेकिन लाइनें केवल एटीएम के बाहर तभी तक दिखीं, जब तक वहां कैश उपलब्ध रहा। बैंक पहुंचने वालों में ज्यादातर ऐसे खातेदार थे, जो नोटबंदी के बाद से उमड़ रही भीड़ के कारण बैंकिंग से जुड़े अन्य काम नहीं कर पा रहे थे। बैंक स्टाफ ने बुजुर्गों के पुराने नोट बदलने के अतिरिक्त केवल अपने खातेदारों के कामों को प्राथमिकता दी।
मेडिकल स्टोर स्वामी ने जमा कराए छोटे नोट
छोटे नोटों की किल्लत से जूझ रहे बैंक प्रबंधन को व्यापारी वर्ग का लगातार सहयोग मिल रहा है। गुरुवार को फाइन मेडिकल एजेंसी के स्वामी रहबर अली खां इंडियन बैंक के अपने खाते में जमा करने के लिए सौ, पचास, बीस और दस रुपये के नोटों की गड्डियां लेकर पहुंचे तो बैंक स्टाफ ने उनका गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि नोटबंदी लागू होने के बाद से रहबर अली रोजना छोटे नोट जमा करने के लिए ला रहे हैं।
डीएम से भुगतान कराने की लगाई गुहार
बैंक खाते में रकम होने पर भी भुगतान के लिए टालमटोल किए जाने से परेशान लोगों ने डीएम राम गणेश से भुगतान कराने की गुहार लगाई है। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की केरूगंज शाखा के खातेदार अमित कुमार, कन्हैया अग्रवाल, रोहित सक्सेना आदि ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि दस दिन से बैंक के चक्कर काटने पर भी धनराशि नहीं मिली, जबकि बैंक में भुगतान के लिए कैश रहता है। उधर, हद्दफ चौकी के पास रहने वाले श्रमिक परवेज अली ने डीएम को बताया कि वह मजदूरी करते हैं और काम के बदले पांच सौ के तीन नोट और एक नोट हजार का मिला। पुराने नोट कई दिन दौड़ लगाने पर भी किसी बैंक शाखा पर नहीं बदले गए जबकि घर में कुछ खाने को कुछ नहीं बचा है। डीएम ने दोनों मामलों में अग्रणी बैंक प्रबंधक को जन सामान्य की समस्या का समाधान कराने के निर्देश दिए हैं।
दिसंबर में बेटी की शादी, निकासी को चार ने किया आवेदन
शाहजहांपुर। जिले में एसबीआई की शाखाओं और एटीएम पर सौ और दो हजार रुपयों के नोट का भुगतान से पहले की तुलना में बृहस्पतिवार तक ग्राहकों की भीड़ काफी कम हो गई। टाउन हाल स्थित मेन ब्रांच में ग्राहकों कतार लगनी भी बंद हो गई है। इस बीच दिसंबर में होने वाली बेटी के शादी के लिए एकमुश्त ढाई लाख रुपये का भुगतान प्राप्त करने के लिए चार अभिभावकों ने एसबीआई मेन ब्रांच में बृहस्पतिवार को आवेदन किया। चीफ मैनेजर संतोष कुमार झा ने बताया कि पहले नौ बेटियों के शादियों के लिए उनके अभिभावकों को ढाई - ढाई लाख रुपये एकमुश्त भुगतान कर दिए गए हैं।