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कोलाघाट पुल: क्षतिग्रस्त पुल के अन्य कई पिलर की होगी तकनीकी जांच
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कोलाघाट पुल के पास बंद पड़ा बोरिंग का कार्य । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर/जलालाबाद। रामगंगा के कोलाघाट पुल का पिलर धसने से क्षतिग्रस्त हुए हिस्से के आसपास के अन्य कई पिलर भी दलदल में धसने की आशंका जताई जा रही है। पुल ढहने की जांच को लखनऊ और बरेली से आईं सेतु निर्माण निगम के अभियंताओं की टीमों ने धंसे हुए पिलर के पास मिट्टी की जांच के लिए बोरिंग कर वहां से मृदा के कई नमूने लिए हैं।
निगम के अभियंताओं का मानना है कि नदी में तेज बहाव के कारण मिट्टी कटने से पुल के अन्य कई पिलर भी दलदली जमीन में धंस सकते हैं। इसके लिए अन्य कई पिलर के आसपास भी मिट्टी की जांच कराई जाएगी जो कि नदी की मुख्य धारा के नजदीक हैं। इस बीच वहां पैंटून पुल के लिए सामान पहुंचने लगा है, लेकिन लोगों की आवागमन से जुड़ी दिक्कतें जस की तस बनी हुई हैं।
पिलर धसने की वजह जानने को मृदा परीक्षण के लिए होने वाली बोरिंग का कार्य शनिवार को दूसरे दिन भी ठप रहा। मौके पर किसी जिम्मेदार अधिकारी के मौजूद न होने से अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि परीक्षण के इस कार्य को आगे सेतु निर्माण की टीम ही करेगी या किसी प्राइवेट एजेंसी की सहायता ली जाएगी।
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गत 29 नवंबर को पिलर के जमीन में समा जाने से तीन टुकड़ों में बंटे कोला पुल की जांच को यहां पहुंचे अधिकारियों के लिए यह मामला हैरान करने वाला था। धंसे पिलर के पास बोरिंग के जरिए मृदा परीक्षण के लिए सेतु निर्माण निगम लखनऊ की सॉयल इन्वेस्टिगेशन की टीम 30 नवंबर को यहां पहुंच गई। इस टीम ने काम शुरू करते हुए बोरिंग के जरिए मिट्टी के 12 नमूने लिए।
टीम को सात अलग अलग होने वाली बोरिंग के जरिये विभिन्न नमूनों को एकत्र कर जांच को लैब भेजा जाना था, लेकिन यह कार्य एक दिन चलकर ही बंद हो गया। बताया कि अब मृदा परीक्षण का यह कार्य किसी प्राइवेट कंपनी से कराया जाएगा, जो शनिवार तक कार्यस्थल पर पहुंच जाएगी, लेकिन आज टीम के न पहुंचने से यह कार्य ठप रहा।
हालांकि, क्षेत्र के लोगों को इस बात की तसल्ली है कि पैंटून पुल बनाने का सामान कोलाघाट पहुंचने लगा है। शनिवार को पैंटून पुल बनाने को चार कछुए, कुछ गार्डर व लोहे के पटले कटरी इलाके में पहुंच गए, लेकिन लोनिवि ने रास्ता बनाने को अभी तक कोई कार्य शुरू नहीं किया है जबकि राहगीरों को दलदली रेतीला इलाका पैदल तय करने में सबसे ज्यादा मुसीबत उठानी पड़ रही है।
कटरी के रेतीले रास्ते पर घिसटने को मजबूर दिव्यांग
जलालाबाद। खेत का हाल जानने की चिंता ने मिर्जापुर क्षेत्र के गांव बीघापुर कसारी निवासी दिव्यांग रनपाल को कटरी इलाके के रेतीले और कीचड़युक्त रास्ते पर घिसट-घिसटकर निकलने को मजबूर कर दिया। शनिवार को जब वह रास्ते से निकल रहा था तो वहां से गुजर रहे राहगीर शायद यही सोच रहे थे कि पता नहीं कब इस मुसीबत से छुटकारा मिल सकेगा। रनपाल ने बताया कि नदी के पार खेत में सरसों की फसल की थी, लेकिन पुल टूटने के बाद से वह खेत पर नही पहुंच सके। फसल की चिंता ने उसे खेत जाने पर मजबूर कर दिया।
पुल टूटने से जलालाबाद में चौपट हुआ कारोबार
जलालाबाद। कोलाघाट पुल टूटने के छह दिन बाद भी अब तक आने-जाने की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगा है। मिर्जापुर व जरियनपुर के अलावा शमशाबाद इलाके तक छोटे दुकानदार जो जलालाबाद से थोक में सामान खरीदकर ले जाते थे, अब उनके लिए फर्रुखाबाद जनपद ज्यादा सुविधाजनक हो गया है। सब्जी, आलू और गल्ले का कारोबार भी काफी हद तक सिमट जाने से व्यापारी परेशान हैं। नगर में सब्जी की थोक मंडी से मिर्जापुर, जरीनपुर, ढाई, शमशाबाद और कलान इलाके से आने वाले विक्रेता खरीद करते थे। कोला पुल टूटने के बाद इन गतिविधियों पर विराम लग गया।
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निगम के अभियंताओं का मानना है कि नदी में तेज बहाव के कारण मिट्टी कटने से पुल के अन्य कई पिलर भी दलदली जमीन में धंस सकते हैं। इसके लिए अन्य कई पिलर के आसपास भी मिट्टी की जांच कराई जाएगी जो कि नदी की मुख्य धारा के नजदीक हैं। इस बीच वहां पैंटून पुल के लिए सामान पहुंचने लगा है, लेकिन लोगों की आवागमन से जुड़ी दिक्कतें जस की तस बनी हुई हैं।
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पिलर धसने की वजह जानने को मृदा परीक्षण के लिए होने वाली बोरिंग का कार्य शनिवार को दूसरे दिन भी ठप रहा। मौके पर किसी जिम्मेदार अधिकारी के मौजूद न होने से अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि परीक्षण के इस कार्य को आगे सेतु निर्माण की टीम ही करेगी या किसी प्राइवेट एजेंसी की सहायता ली जाएगी।
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गत 29 नवंबर को पिलर के जमीन में समा जाने से तीन टुकड़ों में बंटे कोला पुल की जांच को यहां पहुंचे अधिकारियों के लिए यह मामला हैरान करने वाला था। धंसे पिलर के पास बोरिंग के जरिए मृदा परीक्षण के लिए सेतु निर्माण निगम लखनऊ की सॉयल इन्वेस्टिगेशन की टीम 30 नवंबर को यहां पहुंच गई। इस टीम ने काम शुरू करते हुए बोरिंग के जरिए मिट्टी के 12 नमूने लिए।
टीम को सात अलग अलग होने वाली बोरिंग के जरिये विभिन्न नमूनों को एकत्र कर जांच को लैब भेजा जाना था, लेकिन यह कार्य एक दिन चलकर ही बंद हो गया। बताया कि अब मृदा परीक्षण का यह कार्य किसी प्राइवेट कंपनी से कराया जाएगा, जो शनिवार तक कार्यस्थल पर पहुंच जाएगी, लेकिन आज टीम के न पहुंचने से यह कार्य ठप रहा।
हालांकि, क्षेत्र के लोगों को इस बात की तसल्ली है कि पैंटून पुल बनाने का सामान कोलाघाट पहुंचने लगा है। शनिवार को पैंटून पुल बनाने को चार कछुए, कुछ गार्डर व लोहे के पटले कटरी इलाके में पहुंच गए, लेकिन लोनिवि ने रास्ता बनाने को अभी तक कोई कार्य शुरू नहीं किया है जबकि राहगीरों को दलदली रेतीला इलाका पैदल तय करने में सबसे ज्यादा मुसीबत उठानी पड़ रही है।
कटरी के रेतीले रास्ते पर घिसटने को मजबूर दिव्यांग
जलालाबाद। खेत का हाल जानने की चिंता ने मिर्जापुर क्षेत्र के गांव बीघापुर कसारी निवासी दिव्यांग रनपाल को कटरी इलाके के रेतीले और कीचड़युक्त रास्ते पर घिसट-घिसटकर निकलने को मजबूर कर दिया। शनिवार को जब वह रास्ते से निकल रहा था तो वहां से गुजर रहे राहगीर शायद यही सोच रहे थे कि पता नहीं कब इस मुसीबत से छुटकारा मिल सकेगा। रनपाल ने बताया कि नदी के पार खेत में सरसों की फसल की थी, लेकिन पुल टूटने के बाद से वह खेत पर नही पहुंच सके। फसल की चिंता ने उसे खेत जाने पर मजबूर कर दिया।
पुल टूटने से जलालाबाद में चौपट हुआ कारोबार
जलालाबाद। कोलाघाट पुल टूटने के छह दिन बाद भी अब तक आने-जाने की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगा है। मिर्जापुर व जरियनपुर के अलावा शमशाबाद इलाके तक छोटे दुकानदार जो जलालाबाद से थोक में सामान खरीदकर ले जाते थे, अब उनके लिए फर्रुखाबाद जनपद ज्यादा सुविधाजनक हो गया है। सब्जी, आलू और गल्ले का कारोबार भी काफी हद तक सिमट जाने से व्यापारी परेशान हैं। नगर में सब्जी की थोक मंडी से मिर्जापुर, जरीनपुर, ढाई, शमशाबाद और कलान इलाके से आने वाले विक्रेता खरीद करते थे। कोला पुल टूटने के बाद इन गतिविधियों पर विराम लग गया।

जलालाबाद में कोलाघाट पुल के पड़े लोहे के दो कछुए। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR