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दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देगी माइक्रो कामधेनु
शाहजहांपुर
Updated Thu, 16 Jul 2015 11:33 PM IST
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प्रदेश सरकार ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कामधेनु और मिनी कामधेनु योजनाएं पहले से लागू कर रखी हैं। इन योजनाओं के लिए क्रमश: 100 और 50 पशु पालने अनिवार्य हैं। इसके लिए ज्यादा पूंजी की आवश्यकता के कारण अब तक तमाम पशु पालक इन योजनाओं से दूरी बनाए रहे हैं। उनकी इसी दिक्कत को भांपते हुए प्रदेश सरकार ने 25 दुधारू पशुओं की डेयरी संचालित करने के लिए माइक्रो कामधेनु योजना लागू की है। इस संबंध में डीएम और सीडीओ ने संबंधित विभागों के अफसरों के साथ बैठक करके जिले में योजना को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
डीएम शुभ्रा सक्सेना ने बताया कि 25 दुधारू पशुओं की एक यूनिट पर 26.99 लाख रुपये की लागत आएगी और जिले में ऐसी 40 यूनिटें स्थापित कराने का लक्ष्य है। लागत की 25 प्रतिशत धनराशि लाभार्थी को स्वयं वहन करनी होगी। शेष 75 प्रतिशत धनराशि बैंकों से बतौर ऋण जारी होगी। ऋण की धनराशि पर देय 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की प्रतिपूर्ति अनुदान के रूप में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा सीधे संबंधित बैंक को कर दी जाएगी।
इधर, सीडीओ पुलकित खरे ने बैंकर्स और पशु चिकित्सकों के साथ बैठक करके उन्हें योजना के उद्देश्यों से परिचित कराया। उन्होंने कम पूंजी वाले पशुपालकों के लिए माइक्रो कामधेनु योजनना को वरदान बताते हुए कहा कि इससे जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ही उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं का प्रजनन भी बढ़ेगा। उन्होंने बैंकर्स और पशु चिकित्सकों को आपसी तालमेल बनाकर माइक्रो कामधेनु यूनिटें स्थापित कराने के लिए आवेदकों को ऋण जल्दी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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सीवीओ डॉ. इंद्रमणि ने बताया कि उनके कार्यालय में 25 जुलाई तक आवेदन पत्र जमा किए जा सकते हैं। माइक्रो कामधेनु योजना के तहत डेयरी खोलने के इच्छुक जिन लोगों ने मिनी कामधेनु योजना में आवेदन किए हैं, उन्हें दोबारा आवेदन नहीं करना होगा।
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डीएम शुभ्रा सक्सेना ने बताया कि 25 दुधारू पशुओं की एक यूनिट पर 26.99 लाख रुपये की लागत आएगी और जिले में ऐसी 40 यूनिटें स्थापित कराने का लक्ष्य है। लागत की 25 प्रतिशत धनराशि लाभार्थी को स्वयं वहन करनी होगी। शेष 75 प्रतिशत धनराशि बैंकों से बतौर ऋण जारी होगी। ऋण की धनराशि पर देय 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की प्रतिपूर्ति अनुदान के रूप में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा सीधे संबंधित बैंक को कर दी जाएगी।
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इधर, सीडीओ पुलकित खरे ने बैंकर्स और पशु चिकित्सकों के साथ बैठक करके उन्हें योजना के उद्देश्यों से परिचित कराया। उन्होंने कम पूंजी वाले पशुपालकों के लिए माइक्रो कामधेनु योजनना को वरदान बताते हुए कहा कि इससे जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ही उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं का प्रजनन भी बढ़ेगा। उन्होंने बैंकर्स और पशु चिकित्सकों को आपसी तालमेल बनाकर माइक्रो कामधेनु यूनिटें स्थापित कराने के लिए आवेदकों को ऋण जल्दी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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सीवीओ डॉ. इंद्रमणि ने बताया कि उनके कार्यालय में 25 जुलाई तक आवेदन पत्र जमा किए जा सकते हैं। माइक्रो कामधेनु योजना के तहत डेयरी खोलने के इच्छुक जिन लोगों ने मिनी कामधेनु योजना में आवेदन किए हैं, उन्हें दोबारा आवेदन नहीं करना होगा।