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Shahjahanpur News: चीन से आएंगी बैटरियां व मॉड्यूल...महीने के अंत तक सही हो सकेंगी ई-बसें
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शाहजहांपुर। जुलाई में बाढ़ से खराब हुईं पांच ई-बसें साल भर बीतने के बाद ठीक नहीं हो सकी हैं। इन बसों की बैटरियां व मॉड्यूल चीन से मंगाए गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि महीने के अंत तक ई-बसें मार्ग पर दौड़ाई जाएंगी।
गत वर्ष गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने पर न्यू सिटी ककरा बाढ़ के पानी से घिर गया था। वहां खड़ी ई-बसें बैटरी व मॉडयूल तक पानी पहुंचने के चलते खराब हो गई थीं। बाढ़ का प्रकोप कम होने के बाद गाजियाबाद, लखनऊ और बरेली से आई टीमों ने जांच करने के बाद 12 ई-बसों की बैटरी ठीक कर ली थी। 13 ई-बसों की बैटरी व मॉडयूल ठीक नहीं हो पाए थे।
धीरे-धीरे अन्य बसों को ठीक कराया गया। लेकिन पांच ई-बसें अभी तक ठीक नहीं हो पाई हैं। उनकी बैटरी व मॉड्यूल को चीन से मंगाया जाना है। बसें ककरा स्थित चार्जिंग स्टेशन पर खड़ी कर दी गईं। ई-बस सेवा के प्रबंधक संदीप लाहा ने बताया कि कंपनी से लगातार वार्ता चल रही है। महीने के अंत तक सामग्री यहां आने की संभावना है। उसके बाद बसों को ठीक कराकर मार्ग पर संचालन को शुरू कराया जाएगा।
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ग्रामीण इलाके के लोगों को पसंद आ रहा ई-बसों का सफर
शहर में अतिक्रमण की वजह से पांच ई-बसों को चलाया जा रहा है। प्रत्येक बस पर सात से आठ सौ रुपये प्रतिदिन आय आ रही है। वहीं पुवायां, निगोही, जलालाबाद आदि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग ई-बसों का सफर पसंद कर रहे हैं। यहां पर बसें भरकर चल रही हैं।
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गत वर्ष गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने पर न्यू सिटी ककरा बाढ़ के पानी से घिर गया था। वहां खड़ी ई-बसें बैटरी व मॉडयूल तक पानी पहुंचने के चलते खराब हो गई थीं। बाढ़ का प्रकोप कम होने के बाद गाजियाबाद, लखनऊ और बरेली से आई टीमों ने जांच करने के बाद 12 ई-बसों की बैटरी ठीक कर ली थी। 13 ई-बसों की बैटरी व मॉडयूल ठीक नहीं हो पाए थे।
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धीरे-धीरे अन्य बसों को ठीक कराया गया। लेकिन पांच ई-बसें अभी तक ठीक नहीं हो पाई हैं। उनकी बैटरी व मॉड्यूल को चीन से मंगाया जाना है। बसें ककरा स्थित चार्जिंग स्टेशन पर खड़ी कर दी गईं। ई-बस सेवा के प्रबंधक संदीप लाहा ने बताया कि कंपनी से लगातार वार्ता चल रही है। महीने के अंत तक सामग्री यहां आने की संभावना है। उसके बाद बसों को ठीक कराकर मार्ग पर संचालन को शुरू कराया जाएगा।
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ग्रामीण इलाके के लोगों को पसंद आ रहा ई-बसों का सफर
शहर में अतिक्रमण की वजह से पांच ई-बसों को चलाया जा रहा है। प्रत्येक बस पर सात से आठ सौ रुपये प्रतिदिन आय आ रही है। वहीं पुवायां, निगोही, जलालाबाद आदि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग ई-बसों का सफर पसंद कर रहे हैं। यहां पर बसें भरकर चल रही हैं।