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कुछ विभागों की झोली खाली तो कई खर्च नहीं कर पाए
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 18 Jan 2015 12:51 AM IST
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सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं और निर्माण कार्यक्रमों के तहत जनहित के काम कराने के लिए बनाई गई 1.72 अरब रुपये की जिला योजना को लेकर शासन गंभीर नहीं है। चालू वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही मेें ढाई माह शेष बचने पर भी अभी तक लाखों की प्लानिंग करने वाले कई महकमों की झोली खाली है। दूसरी ओर कई विभाग एक तिहाई अवमुक्त धनराशि खर्च करने में फिसड्डी रहे।
इन मदों और विभागों को नहीं मिली रकम
उद्यान, मत्स्य, सहकारिता, राजकीय लघु सिंचाई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, रेशम उद्योग, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेलकूद, होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा, नगर विकास, ग्रामीण पेयजल एवं ग्राम्य विकास, अनुसूचित जाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, समाज कल्याण (सामान्य जाति), आईटीआई प्रशिक्षण, पुष्टाहार आदि से संबंधित कार्यों के लिए 28 करोड़ 71 हजार रुपये बजट अनुमोदित किया गया, लेकिन शासन से धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी।
रकम खर्च करने में पिछड़ गए यह विभाग
विभिन्न योजनाओं के संचालन का दारोमदार संभाले पशुपालन, पंचायत राज, खादी एवं ग्रामोद्योग, पर्यावरण, प्रादेशिक विकास दल आदि महकमे प्राप्त धनराशि से कोई भी प्रस्तावित काम नहीं करा सके। बीते दिसंबर माह में शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार इन विभागों को जो भी रकम दी गई, उसे बिल्कुल खर्च नहीं किया गया। अवमुक्त धनराशि के खर्च को क्रियाशीलता का पैमाना मानें तो ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रमों, भूमि संरक्षण एवं जल संसाधनों के विकास, रोजगार कार्यक्रम, माध्यमिक शिक्षा, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य, ग्रामीण स्वच्छता, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण आदि विभागों ने सौ फीसदी रकम खर्च कर ली। दूसरी ओर प्राप्त धनराशि का केवल सात प्रतिशत खर्च करके गन्ना विभाग फिसड्डी साबित हुआ। कृषि, वन आदि विभाग भी काम कराने में पिछड़ गए।
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इन योजनाओं और कामों में पड़ी रुकावट
धनराशि के अभाव में उद्यान विभाग की राज्य औद्यागिक मिशन योजना, पपीते की खेती के प्रसार, मछली पालन के तालाबों का सुधार, नलकूप विभाग की गूलों और पाइप लाइनों की मरम्मत, नए पंचायत घरों की स्थापना, पार्कों को ईको फ्रैंडली बनाने, स्कूलों में प्रेक्टिकल लैब, नए होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पताल खोलने, गांवों में नए हैंडपंप लगाने आदि काम शुरू नहीं हो सके।
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इन मदों और विभागों को नहीं मिली रकम
उद्यान, मत्स्य, सहकारिता, राजकीय लघु सिंचाई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, रेशम उद्योग, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेलकूद, होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा, नगर विकास, ग्रामीण पेयजल एवं ग्राम्य विकास, अनुसूचित जाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, समाज कल्याण (सामान्य जाति), आईटीआई प्रशिक्षण, पुष्टाहार आदि से संबंधित कार्यों के लिए 28 करोड़ 71 हजार रुपये बजट अनुमोदित किया गया, लेकिन शासन से धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी।
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रकम खर्च करने में पिछड़ गए यह विभाग
विभिन्न योजनाओं के संचालन का दारोमदार संभाले पशुपालन, पंचायत राज, खादी एवं ग्रामोद्योग, पर्यावरण, प्रादेशिक विकास दल आदि महकमे प्राप्त धनराशि से कोई भी प्रस्तावित काम नहीं करा सके। बीते दिसंबर माह में शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार इन विभागों को जो भी रकम दी गई, उसे बिल्कुल खर्च नहीं किया गया। अवमुक्त धनराशि के खर्च को क्रियाशीलता का पैमाना मानें तो ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रमों, भूमि संरक्षण एवं जल संसाधनों के विकास, रोजगार कार्यक्रम, माध्यमिक शिक्षा, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य, ग्रामीण स्वच्छता, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण आदि विभागों ने सौ फीसदी रकम खर्च कर ली। दूसरी ओर प्राप्त धनराशि का केवल सात प्रतिशत खर्च करके गन्ना विभाग फिसड्डी साबित हुआ। कृषि, वन आदि विभाग भी काम कराने में पिछड़ गए।
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इन योजनाओं और कामों में पड़ी रुकावट
धनराशि के अभाव में उद्यान विभाग की राज्य औद्यागिक मिशन योजना, पपीते की खेती के प्रसार, मछली पालन के तालाबों का सुधार, नलकूप विभाग की गूलों और पाइप लाइनों की मरम्मत, नए पंचायत घरों की स्थापना, पार्कों को ईको फ्रैंडली बनाने, स्कूलों में प्रेक्टिकल लैब, नए होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पताल खोलने, गांवों में नए हैंडपंप लगाने आदि काम शुरू नहीं हो सके।