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अरुण के भाजपा में शामिल होने से बदले समीकरण
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहजहांपुर
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:00 AM IST
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जश्न मनाते भाजपाई
- फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
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वर्ष 2012 में पुवायां विधानसभा क्षेत्र से बसपा के प्रत्याशी रहे अरुण सागर ने शनिवार को लखनऊ में भाजपा का दामन थाम लिया है। प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने उन्हें विधिवत पार्टी में शामिल कराया है। अरुण सागर के भाजपा में शामिल होने से पुवायां से टिकट के दावेदारों में एक नाम और बढ़ गया है।
कभी बसपा के कद्दावर नेता रहे अरुण सागर बसपा शाहजहांपुर के जिलाध्यक्ष, कई जोन के कोआर्डिनेटर, लोकसभा प्रभारी और बसपा की सरकार में राजकीय निर्माण निगम के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। कुछ समय पहले उनके रिश्ते बसपा से खराब हो गए और अरुण सागर को पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद से वह नई पार्टी से जुड़ कर राजनीतिक जमीन पर फिर से मजबूती से खड़े होने की कोशिश कर रहे थे।
गत विधानसभा चुनाव में अरुण सागर को लगभग 51 हजार वोट मिले थे और वह सपा की शकुंतला देवी से 8898 वोटों से चुनाव हारकर दूसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेस के चेतराम तीसरे स्थान पर रहे थे। बसपा 2007 में भी इस सीट पर दूसरे नंबर पर रही थी। अरुण सागर के भाजपा में शामिल होने से पुवायां सीट से टिकट के आधा दर्जन से अधिक दावेदारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई हैं। समझा जाता है कि इससे विधानसभा सीट पर नए समीकरण बन सकते हैं।
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पार्टी चाहेगी तो लड़ूंगा चुनाव: अरुण
पुवायां। भाजपा में शामिल होने के बाद फोन पर हुई वार्ता में अरुण ने कहा कि वह भाजपा में चुनाव लड़ने के लालच में शामिल नहीं हुए हैं। अब वह भाजपा के सच्चे सिपाही की हैसियत से पार्टी को मजबूत करने का काम करेंगे। पार्टी यदि टिकट देगी तो वह चुनाव जरूर लड़ेंगे। कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार बहुत ही बढ़िया कार्य कर रही है। आगामी विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश भी भाजपा की सरकार बनना तय है।
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कभी बसपा के कद्दावर नेता रहे अरुण सागर बसपा शाहजहांपुर के जिलाध्यक्ष, कई जोन के कोआर्डिनेटर, लोकसभा प्रभारी और बसपा की सरकार में राजकीय निर्माण निगम के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। कुछ समय पहले उनके रिश्ते बसपा से खराब हो गए और अरुण सागर को पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद से वह नई पार्टी से जुड़ कर राजनीतिक जमीन पर फिर से मजबूती से खड़े होने की कोशिश कर रहे थे।
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गत विधानसभा चुनाव में अरुण सागर को लगभग 51 हजार वोट मिले थे और वह सपा की शकुंतला देवी से 8898 वोटों से चुनाव हारकर दूसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेस के चेतराम तीसरे स्थान पर रहे थे। बसपा 2007 में भी इस सीट पर दूसरे नंबर पर रही थी। अरुण सागर के भाजपा में शामिल होने से पुवायां सीट से टिकट के आधा दर्जन से अधिक दावेदारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई हैं। समझा जाता है कि इससे विधानसभा सीट पर नए समीकरण बन सकते हैं।
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पार्टी चाहेगी तो लड़ूंगा चुनाव: अरुण
पुवायां। भाजपा में शामिल होने के बाद फोन पर हुई वार्ता में अरुण ने कहा कि वह भाजपा में चुनाव लड़ने के लालच में शामिल नहीं हुए हैं। अब वह भाजपा के सच्चे सिपाही की हैसियत से पार्टी को मजबूत करने का काम करेंगे। पार्टी यदि टिकट देगी तो वह चुनाव जरूर लड़ेंगे। कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार बहुत ही बढ़िया कार्य कर रही है। आगामी विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश भी भाजपा की सरकार बनना तय है।