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Shahjahanpur News: कागजों पर आग बुझाने के इंतजाम...छह साल से बिना एनओसी संचालित हो रहा राजकीय मेडिकल कॉलेज

Wed, 16 Apr 2025 12:28 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Wed, 16 Apr 2025 12:28 AM IST
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Arrangements for extinguishing fire are only on paper...Government Medical College is being run without NOC for six years
शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज का अस्थायी संकरा गेट। संवाद - फोटो : Sanvad
शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज छह वर्षों से बिना फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के संचालित हो रहा है। अस्पताल में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। संकरे मार्गों वाले अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में मात्र अग्निशमन यंत्र ही लगे हैं। झांसी में अग्निकांड के बाद हादसे से बचाव को लेकर शुरू की गई कवायद कागजों में दबकर रह गई है।
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2019 में मोहल्ला अजीजगंज स्थित जिला अस्पताल को राजकीय मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिया गया था। राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में ही बने सौ बेड के भवन में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम हैं। वहीं, 330 बेड के मुख्य भवन में आग बुझाने के उपकरणों के नाम पर छलावा किया जा रहा है।
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ओपीडी में करीब चार हजार लोग रोजाना आते-जाते हैं। वहां भी मात्र दो अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं। पूरे अस्पताल में 150 अग्निशमन यंत्र लगे होने का दावा किया है। अग्निशमन विभाग के मानक पूर्ण नहीं होने के चलते अस्पताल कई वर्षों से बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहा है। यहां पर हादसा होने पर अस्पताल से बाहर निकलने के पर्याप्त रास्ते तक नहीं हैं। ओपीडी जाने वाले दरवाजे को छोड़कर प्राचार्य कार्यालय के गेट के नजदीक वाले रास्ते में सबसे ज्यादा आवाजाही रहती है। यहां रास्ता काफी संकरा है। भगदड़ मचने पर भीड़ का निकलना तक मुश्किल हो जाएगा। हादसा होने पर दूसरे तल पर जाने वाली सीढि़यों से निकलना भी मुश्किल होगा।
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झांसी में हादसे के बाद शुरू की कवायद
नवंबर 2024 में झांसी के अस्पताल में अग्निकांड की घटना होने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में अग्नि सुरक्षा के संसाधन को मजबूत करने के साथ ही पोषण पुनर्वास केंद्र को नए भवन में शिफ्ट करने की योजना बनाई गई थी। पांच महीने गुजरने के बाद स्थिति जस की तस बनी है। पोषण पुनर्वास केंद्र में नवजात को मशीनों पर भर्ती किया जाता है। बिजली के तारों का जाल होने के बावजूद केंद्र का मुख्य गेट अक्सर बंद रहता है। इसी तरह अस्थायी गेट से निकलना मुश्किल है।
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3.95 लाख का प्रस्ताव बनाकर भेजा था
झांसी कांड के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में आग से बचाव के संसाधन को जुटाने के लिए 3.95 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। इसके जरिये पानी की पाइप लाइन, हौज रील, स्प्रिंकलर, अलार्म सिस्टम और फायर उपकरण लगाए जाने हैं। अधिकारियों के अनुसार, बजट पास हो गया है। कार्यदायी संस्था को जिम्मेदारी दी गई है। जल्द ही कार्य को शुरू कराया जाएगा।
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सीएमओ कार्यालय में अस्त-व्यस्त रखे उपकरण
-पुराने जिला अस्पताल स्थित सीएमओ कार्यालय में अग्नि से बचाव के इंतजाम किए गए हैं। हालांकि उपकरण अस्त-व्यस्त रखे हैं। उनकी सफाई तक नहीं होती हैं। जीने के नीचे रखे उपकरणाें को आग लगने पर जल्दी निकालना भी मुश्किल होगा।
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ये हैं मानक
-50 हजार लीटर पानी की टंकी, हौज रील, स्प्रिंकलर, फायर अलार्म, पाइप लगा होना चाहिए। मानक के तहत दो सौ वर्ग मीटर में एक अग्निशमन यंत्र लगना चाहिए।
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अस्पताल में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं। आग से बचाव के अन्य संसाधनों के लिए बजट मिल गया है। उसका कार्य भी जल्द ही शुरू कराया जाएगा।
डॉ.राजेश कुमार, प्राचार्य
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-राजकीय मेडिकल कॉलेज की एनओसी नहीं है। आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन होने के बाद ही एनओसी को जारी किया जाएगा। सौ बेड के भवन में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन हैं। सीएचसी-पीएचसी के मानक पूर्ण न होने से एनओसी नहीं है। निजी अस्पतालों ने अपने सारे संसाधन पूर्ण करा लिए हैं।

डॉ.बीएन पटेल, एफएसओ

शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज का अस्थायी संकरा गेट। संवाद

शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज का अस्थायी संकरा गेट। संवाद- फोटो : Sanvad

शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज का अस्थायी संकरा गेट। संवाद

शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज का अस्थायी संकरा गेट। संवाद- फोटो : Sanvad

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