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बीमार गायों के इलाज का नहीं हुआ इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो खुटार।
Updated Sat, 20 May 2017 12:07 AM IST
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सुधार
- फोटो : अमर उजाला
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योगी जी गोसदन में अभी और सुधार की दरकार
राजकीय गोसदन की दुर्दशा अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद व्यवस्थाओं में अब सुधार दिखने लगा है, लेकिन बीमार गायों के इलाज का अब तक इंतजाम नहीं हो सका है। शुक्रवार को गोसदन में 26 गायें ऐसी मिलीं जो बीमार होने के कारण चरने के लिए नहीं जा सकीं।
गांव सिमरा वीरान में राजकीय गोसदन के लिए चौहान परिवार की रानी ताजकुंवरि ने विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से प्रभावित होकर 383.62 एकड़ जमीन दान में दी थी। इस गोसदन में हमेशा ही गोवंश की संख्या सौ से सवा सौै के बीच रही है। गोसदन की व्यवस्थाओं पर कऊी ठीक से ध्यान न दिए जाने के कारण यहां पल रहीं गायें हमेशा बीमार और दुर्बल रहती हैैं। डीएम की अध्यक्षता वाले गोसदन पर कई बार भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए, लेकिन जांच के नाम पर केवल कागजी खानापूरी की गई। प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के शपथ लेने के बाद अमर उजाला ने गोसदन की समस्याओं पर 24 मार्च को व्यापक समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद बजरंग दल, विहिप, भाजपा, सामाजिक संस्था पहल, जिला गोरक्षा प्रमुख डॉ. शिवप्रताप सिंह आदि ने अमर उजाला की मुहिम का साथ देते हुए अधिकारियों से मिलकर गोसदन का मामला उठाया। कुछ संगठनों ने जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन भी किया।
इसके बाद तत्कालीन डीएम कर्णसिंह चौहान नौ अप्रैल को गोसदन पहुंचे और यहां की दुर्दशा देखी। नौ अप्रैल को संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना गोसदन पहुंचे। 24 अप्रैल को अयोध्या के संत करपात्री जी महाराज और 28 अप्रैल को डीएम नरेंद्र सिंह गोसदन पहुंचे। सभी ने गोसदन में खामियां पाईं और उनके सुधार के निर्देश दिए। कई सामाजिक संगठन भी इस दौरान गोसदन पहुंचते रहे और मुद्दे को उठाते रहे।
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अप्रैल माह में ही गोसदन में कई गायों की बीमारी से मौत हो गई। अमर उजाला समाचार पत्र और अमर उजाला टीवी ने इस मामले को भी प्रमुखता से उठाना जारी रखा। अंतत: अमर उजाला की मुहिम रंग लाई और गोसदन के अध्यक्ष, जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह ने कई बड़े फैसले लिए। अब गोसदन की तस्वीर बदलने लगी हैं। गोसदन में बिजली का कनेक्शन होने के साथ ही गायों को गर्मी से बचाने के लिए पंखे लग गए हैं। पानी के लिए सबमर्सिबल पंप भी चालू हो गया है और चारा लाने के लिए डनलप भी खरीद लिया गया है।
अभी और सुधार की जरूरत
शुक्रवार दोपहर गोसदन में 26 गायें बीमार मिलीं। गोसदन के पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. विवेक शुक्ला ने बताया कि गोसदन में कुल 112 गोवंशीय पशु हैं। 26 गायें बीमार और चोटिल होने के कारण चरने नहीं जा पाईं। उन्हें गोसदन में ही भूसा दिया जा रहा है। गायों के इलाज की कमी साफ दिखी। इसके अलावा अभी तक हरे चारे की व्यवस्था नहीं हो सकी है। सूखे भूसे में दाना भी नहीं डाला गया था। ज्यादा गायें रखने के लिए टीन शेड को बढ़ाया जाना है, लेकिन यह काम भी अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
तीन दिन पूर्व हुई एक गाय की मौत
गोसदन में तीन दिन पहले भी एक गाय की मोत हो गई। डॉ. विवेक शुक्ला के अनुसार गाय को गोसदन में ही सांड़ ने घायल कर दिया था। इससे उसकी मौत हो गई। गोसदन के ग्वालों ने बताया कि उन्हें दो माह से मजदूरी नहीं दी गई है।
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राजकीय गोसदन की दुर्दशा अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद व्यवस्थाओं में अब सुधार दिखने लगा है, लेकिन बीमार गायों के इलाज का अब तक इंतजाम नहीं हो सका है। शुक्रवार को गोसदन में 26 गायें ऐसी मिलीं जो बीमार होने के कारण चरने के लिए नहीं जा सकीं।
गांव सिमरा वीरान में राजकीय गोसदन के लिए चौहान परिवार की रानी ताजकुंवरि ने विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से प्रभावित होकर 383.62 एकड़ जमीन दान में दी थी। इस गोसदन में हमेशा ही गोवंश की संख्या सौ से सवा सौै के बीच रही है। गोसदन की व्यवस्थाओं पर कऊी ठीक से ध्यान न दिए जाने के कारण यहां पल रहीं गायें हमेशा बीमार और दुर्बल रहती हैैं। डीएम की अध्यक्षता वाले गोसदन पर कई बार भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए, लेकिन जांच के नाम पर केवल कागजी खानापूरी की गई। प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के शपथ लेने के बाद अमर उजाला ने गोसदन की समस्याओं पर 24 मार्च को व्यापक समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद बजरंग दल, विहिप, भाजपा, सामाजिक संस्था पहल, जिला गोरक्षा प्रमुख डॉ. शिवप्रताप सिंह आदि ने अमर उजाला की मुहिम का साथ देते हुए अधिकारियों से मिलकर गोसदन का मामला उठाया। कुछ संगठनों ने जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन भी किया।
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इसके बाद तत्कालीन डीएम कर्णसिंह चौहान नौ अप्रैल को गोसदन पहुंचे और यहां की दुर्दशा देखी। नौ अप्रैल को संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना गोसदन पहुंचे। 24 अप्रैल को अयोध्या के संत करपात्री जी महाराज और 28 अप्रैल को डीएम नरेंद्र सिंह गोसदन पहुंचे। सभी ने गोसदन में खामियां पाईं और उनके सुधार के निर्देश दिए। कई सामाजिक संगठन भी इस दौरान गोसदन पहुंचते रहे और मुद्दे को उठाते रहे।
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अप्रैल माह में ही गोसदन में कई गायों की बीमारी से मौत हो गई। अमर उजाला समाचार पत्र और अमर उजाला टीवी ने इस मामले को भी प्रमुखता से उठाना जारी रखा। अंतत: अमर उजाला की मुहिम रंग लाई और गोसदन के अध्यक्ष, जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह ने कई बड़े फैसले लिए। अब गोसदन की तस्वीर बदलने लगी हैं। गोसदन में बिजली का कनेक्शन होने के साथ ही गायों को गर्मी से बचाने के लिए पंखे लग गए हैं। पानी के लिए सबमर्सिबल पंप भी चालू हो गया है और चारा लाने के लिए डनलप भी खरीद लिया गया है।
अभी और सुधार की जरूरत
शुक्रवार दोपहर गोसदन में 26 गायें बीमार मिलीं। गोसदन के पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. विवेक शुक्ला ने बताया कि गोसदन में कुल 112 गोवंशीय पशु हैं। 26 गायें बीमार और चोटिल होने के कारण चरने नहीं जा पाईं। उन्हें गोसदन में ही भूसा दिया जा रहा है। गायों के इलाज की कमी साफ दिखी। इसके अलावा अभी तक हरे चारे की व्यवस्था नहीं हो सकी है। सूखे भूसे में दाना भी नहीं डाला गया था। ज्यादा गायें रखने के लिए टीन शेड को बढ़ाया जाना है, लेकिन यह काम भी अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
तीन दिन पूर्व हुई एक गाय की मौत
गोसदन में तीन दिन पहले भी एक गाय की मोत हो गई। डॉ. विवेक शुक्ला के अनुसार गाय को गोसदन में ही सांड़ ने घायल कर दिया था। इससे उसकी मौत हो गई। गोसदन के ग्वालों ने बताया कि उन्हें दो माह से मजदूरी नहीं दी गई है।