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पत्नी की रिपोर्ट लेने जा रहे सेना में हवलदार की ट्रेन से गिरने से मौत
सार
रोजा थाना क्षेत्र के मोहल्ला लोदीपुर निवासी सेना में हलवदार ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (38) मोरध्वज एक्सप्रेस से गिर गए।इस बीच उनकी पत्नी संजू सिंह उर्फ मातेश्वरी के पेट में दर्द होने पर उन्हें लखनऊ कमांड अस्पताल में दिखाया था।तुरंत ही एंबुलेंस के जरिये राजकीय मेडिकल कॉलेज भेजा।
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विस्तार
शाहजहांपुर। रोजा थाना क्षेत्र के मोहल्ला लोदीपुर निवासी सेना में हलवदार ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (38) मोरध्वज एक्सप्रेस से गिर गए। हादसे में उनके दोनों पैर कट गए और सिर में गंभीर चोट आई। राजकीय मेडिकल कॉलेज में उन्हें मृत घोषित कर दिया। वे पत्नी की रिपोर्ट लेने लखनऊ जा रहे थे।
मूल रूप से लखीमपुर जिले के थाना शिवपुरी के ग्राम जानकीनगर निवासी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का लोदीपुर में भट्ठे वाली गली में मकान है। वह सियाचिन बॉर्डर पर तैनात थे। ज्ञानेंद्र की मां उर्मिला देवी का दो महीने पहले निधन हो गया था। वह डेढ़ महीने पूर्व छुट्टी लेकर आए थे। इस बीच उनकी पत्नी संजू सिंह उर्फ मातेश्वरी के पेट में दर्द होने पर उन्हें लखनऊ कमांड अस्पताल में दिखाया था। डॉक्टर ने रिपोर्ट लेने बुलाया था। शनिवार सुबह ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह जम्मूतवी से बरौनी जाने वाली मोरध्वज एक्सप्रेस में सवार हो गए। 8.45 बजे ट्रेन रोजा पहुंची। बताते हैं कि फौजी को यात्रियों ने बताया कि ट्रेन लखनऊ नहीं जाएगी बल्कि यहां से सीधे सीतापुर होते हुए गोरखपुर को जाएगी। यह बात सुनकर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह चलती ट्रेन से उतरे तो प्लेटफार्म पर गिर गए। ट्रेन की चपेट में आकर उनकी दोनों टांगे कट गईं। सिर पर भी गंभीर चोट आई। हादसे को देखकर जीआरपी के सिपाही दौड़ पड़े। तुरंत ही एंबुलेंस के जरिये राजकीय मेडिकल कॉलेज भेजा। जहां से डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जीआरपी ने पोस्टमार्टम कराया है।
2001 में सिपाही से हुए थे भर्ती
किसान परिवार के ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सेना में भर्ती होने के लिए काफी मेहनत की थी। 2001 में बरेली में रायफल रेजीमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उसके बाद धीरे-धीरे पदोन्नति पाकर हवलदार पोस्ट तक पहुंचे थे।
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शाम को ड्यूटी जाना था, जेसीओ पोस्ट पर करना था ज्वाइन
पत्नी की रिपोर्ट लेकर आने के बाद ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को शाम को ट्रेन से ड्यूटी जाना था। उन्हें 26 सितंबर को कमांड सेंटर में रिपोर्ट करनी थी। भाई विनय प्रताप सिंह ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही ज्ञानेंद्र ने परीक्षा दी थी। इसके रिजल्ट में वह पास होकर जेसीओ बन गए थे। उनकी पदोन्नति से पूरा परिवार काफी खुश था। वह ड्यूटी पर लौटकर जेसीओ के पद पर ज्वाइन करने वाले थे।
पति का आईकार्ड देखकर रो पड़ी पत्नी, बोली ऐसे छोड़ के न जाना
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। पत्नी संजू को ज्ञानेंद्र की मौत की खबर मिली तो वह बिलख पड़ीं। पोस्टमार्टम हाउस पर भी उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पति के आईकार्ड में फोटो देखकर रोते हुए बोली कि ऐसे छोड़कर नहीं जाना। बड़ी बेटी अंशिका भी रो पड़ी। वही उन्हें स्कूटी से स्टेशन छोड़कर आई थी।
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मूल रूप से लखीमपुर जिले के थाना शिवपुरी के ग्राम जानकीनगर निवासी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का लोदीपुर में भट्ठे वाली गली में मकान है। वह सियाचिन बॉर्डर पर तैनात थे। ज्ञानेंद्र की मां उर्मिला देवी का दो महीने पहले निधन हो गया था। वह डेढ़ महीने पूर्व छुट्टी लेकर आए थे। इस बीच उनकी पत्नी संजू सिंह उर्फ मातेश्वरी के पेट में दर्द होने पर उन्हें लखनऊ कमांड अस्पताल में दिखाया था। डॉक्टर ने रिपोर्ट लेने बुलाया था। शनिवार सुबह ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह जम्मूतवी से बरौनी जाने वाली मोरध्वज एक्सप्रेस में सवार हो गए। 8.45 बजे ट्रेन रोजा पहुंची। बताते हैं कि फौजी को यात्रियों ने बताया कि ट्रेन लखनऊ नहीं जाएगी बल्कि यहां से सीधे सीतापुर होते हुए गोरखपुर को जाएगी। यह बात सुनकर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह चलती ट्रेन से उतरे तो प्लेटफार्म पर गिर गए। ट्रेन की चपेट में आकर उनकी दोनों टांगे कट गईं। सिर पर भी गंभीर चोट आई। हादसे को देखकर जीआरपी के सिपाही दौड़ पड़े। तुरंत ही एंबुलेंस के जरिये राजकीय मेडिकल कॉलेज भेजा। जहां से डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जीआरपी ने पोस्टमार्टम कराया है।
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2001 में सिपाही से हुए थे भर्ती
किसान परिवार के ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सेना में भर्ती होने के लिए काफी मेहनत की थी। 2001 में बरेली में रायफल रेजीमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उसके बाद धीरे-धीरे पदोन्नति पाकर हवलदार पोस्ट तक पहुंचे थे।
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शाम को ड्यूटी जाना था, जेसीओ पोस्ट पर करना था ज्वाइन
पत्नी की रिपोर्ट लेकर आने के बाद ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को शाम को ट्रेन से ड्यूटी जाना था। उन्हें 26 सितंबर को कमांड सेंटर में रिपोर्ट करनी थी। भाई विनय प्रताप सिंह ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही ज्ञानेंद्र ने परीक्षा दी थी। इसके रिजल्ट में वह पास होकर जेसीओ बन गए थे। उनकी पदोन्नति से पूरा परिवार काफी खुश था। वह ड्यूटी पर लौटकर जेसीओ के पद पर ज्वाइन करने वाले थे।
पति का आईकार्ड देखकर रो पड़ी पत्नी, बोली ऐसे छोड़ के न जाना
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। पत्नी संजू को ज्ञानेंद्र की मौत की खबर मिली तो वह बिलख पड़ीं। पोस्टमार्टम हाउस पर भी उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पति के आईकार्ड में फोटो देखकर रोते हुए बोली कि ऐसे छोड़कर नहीं जाना। बड़ी बेटी अंशिका भी रो पड़ी। वही उन्हें स्कूटी से स्टेशन छोड़कर आई थी।