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आंगनबाड़ी वर्कर्स हड़ताल पर, कैसे हो टीकाकरण
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Sun, 18 Sep 2016 11:30 PM IST
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आंगनबाड़ी वर्कर्स हड़ताल पर, कैसे हो टीकाकरण
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आंगनबाड़ी वर्कर्स दो सप्ताह से हड़ताल पर हैं। उनकी हड़ताल की वजह से टीकाकरण का काम प्रभावित हो गया है। इससे सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित हुआ है। उनकी हड़ताल से नौनिहालों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है।
बीती पांच सितंबर से अपनी मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर्स हड़ताल पर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण का कार्य आंगनबाड़ी वर्कर्स पर ही निर्भर है। चाहे वह गर्भवती महिलाओं के टीका लगाना हो या फिर नौनिहालों को, हड़ताल की वजह से टीकाकरण नहीं हो पा रहा है, जिससे बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। आशाओं की हड़ताल के बाद स्वास्थ्य विगाग ने भी कोई अलग से इंतजाम नहीं किए हैं। ग्रामीण महिलाएं, शहर की मलिन बस्तियों में रहने वाली महिलाएं बच्चों को टीके लगवाने के लिए भटक रहीं हैं। आशाआें की हड़ताल से आगामी 25 सितंबर से शुरू होने वाला पोलियो अभियान भी खतरे में पड़ गया है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भोजन उपलब्ध कराना, कुपोषित बच्चों की देखभाल इन पर निर्भर है। हड़ताल होने से यह सब काम ठप पड़ गए हैं।
कुछ आशा वर्कर्स हड़ताल से वापस आ गई हैं। टीकाकरण की सूची आशाओं के पास भी होती है। इनकी हड़ताल से कुपोषित बच्चों की देखभाल और आगामी पोलिया अभियान पर असर पड़ेगा। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
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- डॉ. कमल कुमार, सीएमओ, शाहजहांपुर
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बीती पांच सितंबर से अपनी मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर्स हड़ताल पर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण का कार्य आंगनबाड़ी वर्कर्स पर ही निर्भर है। चाहे वह गर्भवती महिलाओं के टीका लगाना हो या फिर नौनिहालों को, हड़ताल की वजह से टीकाकरण नहीं हो पा रहा है, जिससे बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। आशाओं की हड़ताल के बाद स्वास्थ्य विगाग ने भी कोई अलग से इंतजाम नहीं किए हैं। ग्रामीण महिलाएं, शहर की मलिन बस्तियों में रहने वाली महिलाएं बच्चों को टीके लगवाने के लिए भटक रहीं हैं। आशाआें की हड़ताल से आगामी 25 सितंबर से शुरू होने वाला पोलियो अभियान भी खतरे में पड़ गया है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भोजन उपलब्ध कराना, कुपोषित बच्चों की देखभाल इन पर निर्भर है। हड़ताल होने से यह सब काम ठप पड़ गए हैं।
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कुछ आशा वर्कर्स हड़ताल से वापस आ गई हैं। टीकाकरण की सूची आशाओं के पास भी होती है। इनकी हड़ताल से कुपोषित बच्चों की देखभाल और आगामी पोलिया अभियान पर असर पड़ेगा। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
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- डॉ. कमल कुमार, सीएमओ, शाहजहांपुर