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अगहनी पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने किया ढाईघाट में गंगा स्नान
मिर्जापुर।
Updated Fri, 25 Dec 2015 11:12 PM IST
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मार्गशीर्ष पूर्णिमा (अगहनी पूर्णिमा) पर ढाईघाट गंगातट पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा मइया में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। इस अवसर पर गंगातट पर मेला लगा। श्रद्धालुओं ने गंगास्नान के बाद जरूरत के सामान की खरीददारी की।
भोर की किरण फूटने से पहले ही कड़ाके की सर्दी में हजारों श्रद्धालु विभिन्न वाहनों से गंगातट की ओर दौड़े चले जा रहे थे। श्रद्धालुओं ने सन सन कर चलती पछुआ हवा के बीच कांपते हुए हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ गंगा मइया में डुबकी लगाई। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा पुरोहितों को अन्न, वस्त्र और नगद मुद्रा दानकर मोक्ष की कामना की। कुछ श्रद्धालुओं ने सत्यनारायण भगवान की कथा सुनी और ब्राह्मणों तथा कन्याओं को भोज करवाया। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर कुल देवता की पूजा की भी यहां प्रथा है।
सर्दी में नहीं याद आई अलाव जलवाने की
मिर्जापुर। कड़ाके की सर्दी के बाद भी सरकार और समाजसेवियों को गरीब बेसहारा लोगों की याद नहीं आयी है। कई दिन से हाड़ कंपा देने वाली सर्दी के बाद भी तहसील प्रशासन ने न तो अब तक सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाये हैं और न ही गरीबों को कंबल या गरम कपड़ों का वितरण करवाया है। इससे गरीब बेसहारा लोग बेहद परेशान हैं।
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पिछले कई दिन से सर्दी ने जोर पकड़ लिया है। कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए गरीब बेसहारा लोग कूड़ा करकट और पॉलीथिन जलाकर समय काट रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या उन गरीब मजदूरों की है, जो दिन निकलते ही काम की तलाश मे सार्वजनिक स्थानों और चौराहों पर जमा होते हैं। सुबह के समय चलती तेज पछुआ हवाओं मे गरीब मजदूरों के दांत कड़कड़ाने लगते हैं। ठंड से बचने के लिए उन्हें पुराने टायर या कूड़े से पन्नी ढूंढकर जलाते हैं।
प्रसाद चढ़ाकर मांगी भक्तों ने मनौतियां
सेहरामऊ दक्षिणी। अगहनी पूर्णिमा पर महमदपुर स्थित साधू बाबा स्थान पर शुक्रवार को मेला लगा। इसमें भक्तों ने प्रसाद चढ़ाकर मनौती मांगी।
बता दें कि क्षेत्र के गांव महमदपुर में काफी पुराना साधू बाबा के नाम से प्रसिद्ध स्थान है। यहां हर साल अगहन और बैसाखी पूर्णिमा के अवसर पर मेला लगता है। पुजारी राम निवास चतुर्वेदी ने बताया इस स्थान पर मांगी गई मनौती जल्द पूर्ण होती है। मेले में आए भक्तों ने प्रसाद चढ़ाकर मनौती मांगी। महिलाओं और बच्चों ने मेले में लगी विशातखाना से खरीददारी की और चाट पकौड़ी का आनंद लिया। मेले की व्यवस्था में बाबूराम पाल, हरीओम मिश्रा, नन्हें त्रिवेदी, अभिराम त्रिवेदी, मुनेश्वर दयाल, छविनाथ, राम प्रकाश वर्मा, जय करन, गंगा विश्नू, सत्तू तिवारी आदि का सहयोग रहा।
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भोर की किरण फूटने से पहले ही कड़ाके की सर्दी में हजारों श्रद्धालु विभिन्न वाहनों से गंगातट की ओर दौड़े चले जा रहे थे। श्रद्धालुओं ने सन सन कर चलती पछुआ हवा के बीच कांपते हुए हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ गंगा मइया में डुबकी लगाई। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा पुरोहितों को अन्न, वस्त्र और नगद मुद्रा दानकर मोक्ष की कामना की। कुछ श्रद्धालुओं ने सत्यनारायण भगवान की कथा सुनी और ब्राह्मणों तथा कन्याओं को भोज करवाया। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर कुल देवता की पूजा की भी यहां प्रथा है।
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सर्दी में नहीं याद आई अलाव जलवाने की
मिर्जापुर। कड़ाके की सर्दी के बाद भी सरकार और समाजसेवियों को गरीब बेसहारा लोगों की याद नहीं आयी है। कई दिन से हाड़ कंपा देने वाली सर्दी के बाद भी तहसील प्रशासन ने न तो अब तक सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाये हैं और न ही गरीबों को कंबल या गरम कपड़ों का वितरण करवाया है। इससे गरीब बेसहारा लोग बेहद परेशान हैं।
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पिछले कई दिन से सर्दी ने जोर पकड़ लिया है। कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए गरीब बेसहारा लोग कूड़ा करकट और पॉलीथिन जलाकर समय काट रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या उन गरीब मजदूरों की है, जो दिन निकलते ही काम की तलाश मे सार्वजनिक स्थानों और चौराहों पर जमा होते हैं। सुबह के समय चलती तेज पछुआ हवाओं मे गरीब मजदूरों के दांत कड़कड़ाने लगते हैं। ठंड से बचने के लिए उन्हें पुराने टायर या कूड़े से पन्नी ढूंढकर जलाते हैं।
प्रसाद चढ़ाकर मांगी भक्तों ने मनौतियां
सेहरामऊ दक्षिणी। अगहनी पूर्णिमा पर महमदपुर स्थित साधू बाबा स्थान पर शुक्रवार को मेला लगा। इसमें भक्तों ने प्रसाद चढ़ाकर मनौती मांगी।
बता दें कि क्षेत्र के गांव महमदपुर में काफी पुराना साधू बाबा के नाम से प्रसिद्ध स्थान है। यहां हर साल अगहन और बैसाखी पूर्णिमा के अवसर पर मेला लगता है। पुजारी राम निवास चतुर्वेदी ने बताया इस स्थान पर मांगी गई मनौती जल्द पूर्ण होती है। मेले में आए भक्तों ने प्रसाद चढ़ाकर मनौती मांगी। महिलाओं और बच्चों ने मेले में लगी विशातखाना से खरीददारी की और चाट पकौड़ी का आनंद लिया। मेले की व्यवस्था में बाबूराम पाल, हरीओम मिश्रा, नन्हें त्रिवेदी, अभिराम त्रिवेदी, मुनेश्वर दयाल, छविनाथ, राम प्रकाश वर्मा, जय करन, गंगा विश्नू, सत्तू तिवारी आदि का सहयोग रहा।