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Shahjahanpur News: आरटीई फर्जीवाड़े के बाद जागे... एनआईसी वेबसाइट पर डाली सूची, मांगीं आपत्तियां

Sat, 20 Sep 2025 12:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 20 Sep 2025 12:43 AM IST
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After the RTE scam, the government has put the list on the NIC website and sought objections.
शाहजहांपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) की धनराशि में हेरफेर करने वाले दो प्रधानाचार्यों-प्रबंधकों पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले में शिक्षा विभाग कलान के अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। फिलहाल अब बीएसए ने वर्ष 2024-25 की सूची एनआईसी शाहजहांपुर की वेबसाइट पर डालकर आपत्तियां मांगी हैं। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित से सरकारी धन की रिकवरी की जाएगी।
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कलान के गांव मुसरिया नगला निवासी कमलेश ने गबन के मामले को उठाया था। उन्होंने कलान स्थित ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल व आदर्श बाल विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य व प्रबंधक पर शुल्क प्रतिपूर्ति व वित्तीय सहायता में प्राप्त धनराशि को साजिश व फर्जी दस्तावेज से छात्रों के खातों में नहीं भेजकर गबन करने का आरोप लगाया था।
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बीएसए की जांच के बाद कलान बीईओ ने दो प्रबंधकों व दो प्रधानाचार्यों पर 11,23,750 व 5,11,500 रुपये गबन करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामला दर्ज होने के बाद बीएसए दिव्या गुप्ता ने अन्य ऐसे मामलों की तलाश को शुरू करा दिया।
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उन्होंने वर्ष 2024-25 में आरटीई के तहत छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में भेजी धनराशि व लाॅटरी के माध्यम से वर्ष 2025-26 में विद्यालयों में सीट आवंटन सूची एनआईसी (shahjahanpur.nic.in) की वेबसाइट पर डलवा दी है।
बीएसए ने बताया कि संबंधित अभिभावक डाटा को देख लें। किसी सूची में विसंगति मिलने पर साक्ष्य व अभिलेख कार्यालय में व्यक्तिगत, रजिस्टर्ड व गोपनीय लिफाफे में उपलब्ध करा सकते हैं।
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कई स्तर पर होती है जांच, फिर भी फर्जीवाड़ा
आरटीई के तहत आवेदन करने वाले विद्यार्थी की जांच कई स्तर पर की जाती है। पहले विद्यार्थी के अभिलेख जांचें जाते हैं। फार्म की फीडिंग में जन्मतिथि, आय और निवास प्रमाण पत्र देखा जाता है। उसके बाद चयन हो जाता है। लाॅटरी के बाद सीट आवंटन होती है, साथ ही धनराशि भेजी जाती है। इस कार्य में विभाग के कर्मचारी, शिक्षक से लेकर बीईओ तक की जिम्मेदारी बनती है। प्रकरण भी संबंधित की जवाबदेही तय की जा सकती है।

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जांच में आधार में संशोधन की बात आई सामने
बीईओ की जांच के दौरान संबंधित छात्रों के आधार में संशोधन की बात रखी गई। बीईओ के अनुसार, ओटीपी शेयर किए बिना आधार संशोधित नहीं हो सकता है। बताते हैं कि जांच कमेटी के सामने संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्य और प्रबंधक ने अपना पक्ष भी नहीं रखा था।
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