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अमर उजाला अभियान स्वास्थ्य: गंभीर बीमारियों से ग्रसित किशोर-किशोरियों को नहीं लगी वैक्सीन
Wed, 30 Mar 2022 01:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2022 01:30 AM IST
सार
कोरोना की लहर में स्कूल बंद हो गए। पढ़ाई भी पटरी से उतर गईं। टीकाकरण का नंबर आया तो सबसे पहले किशोर-किशोरियों को टीका लगाने चिंता अभिभावकों ने की। यही वजह रही है कि स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण के लक्ष्य को चंद दिनों में पूरा कर लिया।
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जैतीपुर के बझेड़ा भगवानपुर के आंगनबाड़ी केंद्र पर वैक्सीनेशन करती एएनएम
- फोटो : SHAHJAHANPUR
विस्तार
कोरोना महामारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीनेशन की मुहिम को काफी तेजी से आगे बढ़ाया। 15 से 17 वर्ष तक के 98 प्रतिशत किशोर-किशोरियों ने वैक्सीन लगवाकर सुरक्षा का कवच ग्रहण कर लिया। एचआईवी से पीड़ित और गंभीर रूप से बीमार किशोर-किशोरियों को वैक्सीन नहीं लग पाई। अधिकारियों का मानना है कि उपचार के दौरान जिन किशोर-किशोरी को डॉक्टरों ने मना किया था वही वैक्सीनेशन से वंचित रह गए हैं।
कोरोना की लहर में स्कूल बंद हो गए। पढ़ाई भी पटरी से उतर गईं। टीकाकरण का नंबर आया तो सबसे पहले किशोर-किशोरियों को टीका लगाने चिंता अभिभावकों ने की। यही वजह रही है कि स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण के लक्ष्य को चंद दिनों में पूरा कर लिया। टीकाकरण के नोडल अधिकारी डॉ. पीपी श्रीवास्तव बताते हैं कि एचआईवी से पीड़ित या गंभीर रूप से बीमार बच्चों को डॉक्टरों द्वारा टीका लगवाने से मना किया गया। ऐसे ही बच्चे वैक्सीनेशन से वंचित रह गए हैं। शेष सभी को पहली डोज लगा दी गई। उन्होंने बताया कि बहुत से किशोर-किशोरी बीमारी के चलते वैक्सीनेशन से दूरी बनाए हुए थे। स्वस्थ होने के बाद बच्चों ने वैक्सीन लगवा ली। कुछ मामले सामने आए हैं।
चरणबद्ध अभियान से आई तेजी
स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर चरणबद्ध अभियान चलाया। स्कूल-कॉलेजों, मोहल्लों में शिविर लगने के बाद वैक्सीनेशन अभियान की गति तेज हो गईं। वहीं दूसरी तरफ जागरुकता अभियान से भी बच्चों को वैक्सीन लगाने में काफी सहायता मिली।
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रिकार्ड अपडेट करने में गड़बड़ी के सामने आए मामले
टीकाकरण के शुरुआत में वैक्सीन के रिकार्ड अपडेट करने को लेकर गड़बड़ी के कई मामले सामने आए हैं। कई लोगों ने अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई कि पहली डोज लगने के बाद दूसरी डोज लगने का मैसेज उनके मोबाइल फोन पर आ गया।
दूसरी लहर ने डराया तो टीकाकरण की बढ़ी रफ्तार
कोरोना की दूसरी लहर काफी ज्यादा खतरनाक थी। कोविड की चपेट में आने से तमाम लोगों ने अपनों को खो दिया। कई प्रतिष्ठित लोगों की कोविड के चलते मौत हो गई। कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ने के बाद वायरस से डरे लोगों ने टीकाकरण कराने में दिलचस्पी दिखाई।
पोलियो अभियान का पड़ता है टीकाकरण पर असर
पल्स पोलियो अभियान का असर वैक्सीनेशन पर काफी ज्यादा पड़ता है। कर्मचारियों के पोलियो अभियान में लगने के कारण वैक्सीनेशन के कार्य की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। पहले गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने से मना किया गया था। टेस्टिंग के बाद गर्भवती महिलाओं को वैक्सीनेशन कराने की अनुमति मिल गई। टीकाकरण का अभियान का काफी तेजी से चल रहा है।
-डॉ. पीपी श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी
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कोरोना की लहर में स्कूल बंद हो गए। पढ़ाई भी पटरी से उतर गईं। टीकाकरण का नंबर आया तो सबसे पहले किशोर-किशोरियों को टीका लगाने चिंता अभिभावकों ने की। यही वजह रही है कि स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण के लक्ष्य को चंद दिनों में पूरा कर लिया। टीकाकरण के नोडल अधिकारी डॉ. पीपी श्रीवास्तव बताते हैं कि एचआईवी से पीड़ित या गंभीर रूप से बीमार बच्चों को डॉक्टरों द्वारा टीका लगवाने से मना किया गया। ऐसे ही बच्चे वैक्सीनेशन से वंचित रह गए हैं। शेष सभी को पहली डोज लगा दी गई। उन्होंने बताया कि बहुत से किशोर-किशोरी बीमारी के चलते वैक्सीनेशन से दूरी बनाए हुए थे। स्वस्थ होने के बाद बच्चों ने वैक्सीन लगवा ली। कुछ मामले सामने आए हैं।
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चरणबद्ध अभियान से आई तेजी
स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर चरणबद्ध अभियान चलाया। स्कूल-कॉलेजों, मोहल्लों में शिविर लगने के बाद वैक्सीनेशन अभियान की गति तेज हो गईं। वहीं दूसरी तरफ जागरुकता अभियान से भी बच्चों को वैक्सीन लगाने में काफी सहायता मिली।
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रिकार्ड अपडेट करने में गड़बड़ी के सामने आए मामले
टीकाकरण के शुरुआत में वैक्सीन के रिकार्ड अपडेट करने को लेकर गड़बड़ी के कई मामले सामने आए हैं। कई लोगों ने अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई कि पहली डोज लगने के बाद दूसरी डोज लगने का मैसेज उनके मोबाइल फोन पर आ गया।
दूसरी लहर ने डराया तो टीकाकरण की बढ़ी रफ्तार
कोरोना की दूसरी लहर काफी ज्यादा खतरनाक थी। कोविड की चपेट में आने से तमाम लोगों ने अपनों को खो दिया। कई प्रतिष्ठित लोगों की कोविड के चलते मौत हो गई। कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ने के बाद वायरस से डरे लोगों ने टीकाकरण कराने में दिलचस्पी दिखाई।
पोलियो अभियान का पड़ता है टीकाकरण पर असर
पल्स पोलियो अभियान का असर वैक्सीनेशन पर काफी ज्यादा पड़ता है। कर्मचारियों के पोलियो अभियान में लगने के कारण वैक्सीनेशन के कार्य की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। पहले गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने से मना किया गया था। टेस्टिंग के बाद गर्भवती महिलाओं को वैक्सीनेशन कराने की अनुमति मिल गई। टीकाकरण का अभियान का काफी तेजी से चल रहा है।
-डॉ. पीपी श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी