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बेअसर शासन का फरमान मिट रहे जनता के अरमान
Shahjahanpur
Updated Wed, 09 Jul 2014 05:33 AM IST
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- समय से कार्यालय नहीं पहुंचते अधिकारी कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। एक ओर शासन जनता को राहत देने के लिए तमाम योजनाएं चला रहा है और उनके सही क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों के पेंच कसे जा रहे हैं। अधिकारियों को समय से कार्यालय पहुंचने और जनता की समस्याएं सुनने के निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारी और कर्मचारी सरकार की नीतियों पर काम करना जरूरी नहीं समझते हैं। डीएम भले ही समय से कार्यालय पहुंचे और गांवों की खाक छानकर विकास कार्यों का जायजा लें, लेकिन अधीनस्थ कर्मचारी इस ओर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं समझते हैं। मंगलवार को दस बजे के बाद कुछ कार्यालयों का नजारा कैसा था यह आपको भी बताते हैं।
स्थान खंड विकास अधिकारी कार्यालय समय 10:45 सुबह।
बीडीओ नजमा सिद्दीकी का कार्यालय बंद पड़ा था। कार्यालय के बाहर जनता से मिलने का समय सुबह 10 से 12 तक लिखा था। कुछ फरियादी भी आ पहुंचे थे, लेकिन बीडीओ का अता-पता नहीं था। एक कर्मचारी ने बताया कि बीडीओ शाहजहांपुर में रहती हैं और वहां से रोजाना आती-जाती हैं, इस कारण देर हो जाती है।
स्थान एसडीएम कार्यालय समय 11:00 सुबह।
एसडीएम विनय पाठक का कार्यालय बंद था। लोगों ने बताया कि वह जनता की शिकायतें भी न्यायालय में ही बैठकर सुनते हैं। श्री पाठक न्यायालय में भी मौजूद नहीं थे। एक कर्मचारी ने बताया कि एसडीएम किसी काम से सीओ के कार्यालय में बैठे हुए हैं। एसडीएम कार्यालय के बाहर कई लोग अपनी समस्या बताने आए थे, लेकिन उनके नहीं मिलने से बाहर बैठकर इंतजार कर रहे थे।
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स्थान सरकारी अस्पताल समय 11:20 सुबह।
सीएचसी प्रभारी डॉ. धर्मराज मानू का कक्ष खुला था, लेकिन वह नदारद थे। एक कर्मचारी ने बताया कि प्रभारी कंप्यूटर रूम में कुछ काम निपटा रहे हैं। कक्ष के बाहर तमाम रोगी बैठे हुए थे। रोगियों ने बताया कि प्रभारी अक्सर गायब रहते हैं जिस कारण रोगियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। डॉ. अभिषेक गुप्ता के कक्ष में रोगियों की भारी भीड़ थी।
यह अधिकारी कर रहे थे काम
पुवायां। कई अधिकारी अपने काम के प्रति मुस्तैद भी दिखे। तहसीलदार पीएन सिंह दस बजे के बाद अपने कक्ष में काम निपटाते मिले। सीओ बीएस मोतला भी कार्यालय में फरियादियों की समस्याएं सुनने में तल्लीन दिखे। थाने में कोतवाल यतेंद्र बाबू भारद्वाज भी एक फरियादी की समस्या का निस्तारण करने में लगे थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। एक ओर शासन जनता को राहत देने के लिए तमाम योजनाएं चला रहा है और उनके सही क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों के पेंच कसे जा रहे हैं। अधिकारियों को समय से कार्यालय पहुंचने और जनता की समस्याएं सुनने के निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारी और कर्मचारी सरकार की नीतियों पर काम करना जरूरी नहीं समझते हैं। डीएम भले ही समय से कार्यालय पहुंचे और गांवों की खाक छानकर विकास कार्यों का जायजा लें, लेकिन अधीनस्थ कर्मचारी इस ओर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं समझते हैं। मंगलवार को दस बजे के बाद कुछ कार्यालयों का नजारा कैसा था यह आपको भी बताते हैं।
स्थान खंड विकास अधिकारी कार्यालय समय 10:45 सुबह।
बीडीओ नजमा सिद्दीकी का कार्यालय बंद पड़ा था। कार्यालय के बाहर जनता से मिलने का समय सुबह 10 से 12 तक लिखा था। कुछ फरियादी भी आ पहुंचे थे, लेकिन बीडीओ का अता-पता नहीं था। एक कर्मचारी ने बताया कि बीडीओ शाहजहांपुर में रहती हैं और वहां से रोजाना आती-जाती हैं, इस कारण देर हो जाती है।
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स्थान एसडीएम कार्यालय समय 11:00 सुबह।
एसडीएम विनय पाठक का कार्यालय बंद था। लोगों ने बताया कि वह जनता की शिकायतें भी न्यायालय में ही बैठकर सुनते हैं। श्री पाठक न्यायालय में भी मौजूद नहीं थे। एक कर्मचारी ने बताया कि एसडीएम किसी काम से सीओ के कार्यालय में बैठे हुए हैं। एसडीएम कार्यालय के बाहर कई लोग अपनी समस्या बताने आए थे, लेकिन उनके नहीं मिलने से बाहर बैठकर इंतजार कर रहे थे।
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स्थान सरकारी अस्पताल समय 11:20 सुबह।
सीएचसी प्रभारी डॉ. धर्मराज मानू का कक्ष खुला था, लेकिन वह नदारद थे। एक कर्मचारी ने बताया कि प्रभारी कंप्यूटर रूम में कुछ काम निपटा रहे हैं। कक्ष के बाहर तमाम रोगी बैठे हुए थे। रोगियों ने बताया कि प्रभारी अक्सर गायब रहते हैं जिस कारण रोगियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। डॉ. अभिषेक गुप्ता के कक्ष में रोगियों की भारी भीड़ थी।
यह अधिकारी कर रहे थे काम
पुवायां। कई अधिकारी अपने काम के प्रति मुस्तैद भी दिखे। तहसीलदार पीएन सिंह दस बजे के बाद अपने कक्ष में काम निपटाते मिले। सीओ बीएस मोतला भी कार्यालय में फरियादियों की समस्याएं सुनने में तल्लीन दिखे। थाने में कोतवाल यतेंद्र बाबू भारद्वाज भी एक फरियादी की समस्या का निस्तारण करने में लगे थे।