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चकलुआ घाट पर पगडंडी बनी सड़क
Shahjahanpur
Updated Sun, 04 Aug 2013 05:35 AM IST
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बाइक, साइकिल और पैदल गुजरने लायक ही रह गया है रास्ता
- सड़क के बीच में हो गया है गहरा गड्ढा
- करोड़ों की लागत से बने पुल का नहीं कोई लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां/जेबां। नाम चकलुआ घाट, लेकिन सड़क पगडंडी से गई गुजरी। कुछ ऐसी ही हालत है कि गोमती नदी के चकलुआ घाट पर बने पुल के दोनों तरफ की। लगभग तीन करोड़ की लागत से बना पुल नेताओं और अधिकारियों की अनदेखी के चलते बेकार साबित हो रहा है। कई बार पुल के पास सड़क के दोनाें ओर पत्थर डलवाए जाने और नाली बनवाए जाने की मांग रखी गई, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
खुटार पुवायां मार्ग पर बसे गांव गंगसरा से सिरयाली, कुंडा फार्म होते हुए गांव महमूदपुर सैंजनिया, औरंगाबाद, रघुनाथपुर के अलावा खीरी के गांव पिपरिया कप्तान, मूड़ा आदि होते हुआ गोला, मोहम्मदी और लखीमपुर जाने को यह सीधा रास्ता था। चकलुआ घाट पर आवागमन की परेशानी को देखते हुए और सरकार की ओर निराश होकर एक संत जी के सहयोग से क्षेत्र के लोगों ने कारसेवा कर पुल का निर्माण किया था। पुल जर्जर होने के बाद सांसद मिथलेश कुमार के प्रयास से लगभग तीन करोड़ की लागत से पुल का निर्माण कराया गया, लेकिन पुल के दोनों ओर रेत वाली मिट्टी डाल दी गई। जिससे हर बार बारिश में मिट्टी बह जाने के बाद पुल के दोनों तरफ आवागमन बंद हो जाता है। इस बार भी पुल के दोनों ओर सड़क कटकर नदी में समा जाने से चार पहिया वाहनों का आवागमन बंद है। लगभग दो दर्जन गांवों के लोगों को गंगसरा जाने के लिए पन्न्घाट से गांव जेवां, पुवायां होते हुए जाना पड़ता है।
ध्यान नहीं देते नेता और अधिकारी
गांव महमूदपुर सैंजनियां के विचित्र सिंह, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह, जसवंत सिंह, गज्जन सिंह, रंजीत सिंह, लखवीर सिंह, दिग्विजय सिंह, नक्षत्र सिंह, रामप्रीत, मुन्ना भारती आदि ने बताया कि गत वर्ष सड़क पूरी तरह कट जाने के कारण आवागमन बंद रहा था। तमाम बार शिकायत करने पर छह माह पूर्व मिट्टी डालकर सड़क बनाई गई, लेकिन नाली का निर्माण नहीं कराया गया। इससे बारिश के पानी में मिट्टी बह जाने से सड़क कट गई और ट्रैक्टर सहित अन्य वाहनों को आवागमन बंद हो गया।
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गंगसरा में रहते हैं
सपा महासचिव
लोगों का कहना है कि सपा के महासचिव राजेंद्र यादव का गंगसरा में मेडिकल स्टोर है। वह पास के ही गांव के रहने वाले हैं, लेकिन थोड़ी दूर स्थित चकलुआ घाट की ओर उनका ध्यान नहीं जा रहा है। यदि वह पार्टी जिलाध्यक्ष, सांसद और विधायक से एक बार भी कह दें तो समस्या का समाधान होते देर नहीं लगेगी।
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- सड़क के बीच में हो गया है गहरा गड्ढा
- करोड़ों की लागत से बने पुल का नहीं कोई लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां/जेबां। नाम चकलुआ घाट, लेकिन सड़क पगडंडी से गई गुजरी। कुछ ऐसी ही हालत है कि गोमती नदी के चकलुआ घाट पर बने पुल के दोनों तरफ की। लगभग तीन करोड़ की लागत से बना पुल नेताओं और अधिकारियों की अनदेखी के चलते बेकार साबित हो रहा है। कई बार पुल के पास सड़क के दोनाें ओर पत्थर डलवाए जाने और नाली बनवाए जाने की मांग रखी गई, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
खुटार पुवायां मार्ग पर बसे गांव गंगसरा से सिरयाली, कुंडा फार्म होते हुए गांव महमूदपुर सैंजनिया, औरंगाबाद, रघुनाथपुर के अलावा खीरी के गांव पिपरिया कप्तान, मूड़ा आदि होते हुआ गोला, मोहम्मदी और लखीमपुर जाने को यह सीधा रास्ता था। चकलुआ घाट पर आवागमन की परेशानी को देखते हुए और सरकार की ओर निराश होकर एक संत जी के सहयोग से क्षेत्र के लोगों ने कारसेवा कर पुल का निर्माण किया था। पुल जर्जर होने के बाद सांसद मिथलेश कुमार के प्रयास से लगभग तीन करोड़ की लागत से पुल का निर्माण कराया गया, लेकिन पुल के दोनों ओर रेत वाली मिट्टी डाल दी गई। जिससे हर बार बारिश में मिट्टी बह जाने के बाद पुल के दोनों तरफ आवागमन बंद हो जाता है। इस बार भी पुल के दोनों ओर सड़क कटकर नदी में समा जाने से चार पहिया वाहनों का आवागमन बंद है। लगभग दो दर्जन गांवों के लोगों को गंगसरा जाने के लिए पन्न्घाट से गांव जेवां, पुवायां होते हुए जाना पड़ता है।
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ध्यान नहीं देते नेता और अधिकारी
गांव महमूदपुर सैंजनियां के विचित्र सिंह, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह, जसवंत सिंह, गज्जन सिंह, रंजीत सिंह, लखवीर सिंह, दिग्विजय सिंह, नक्षत्र सिंह, रामप्रीत, मुन्ना भारती आदि ने बताया कि गत वर्ष सड़क पूरी तरह कट जाने के कारण आवागमन बंद रहा था। तमाम बार शिकायत करने पर छह माह पूर्व मिट्टी डालकर सड़क बनाई गई, लेकिन नाली का निर्माण नहीं कराया गया। इससे बारिश के पानी में मिट्टी बह जाने से सड़क कट गई और ट्रैक्टर सहित अन्य वाहनों को आवागमन बंद हो गया।
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गंगसरा में रहते हैं
सपा महासचिव
लोगों का कहना है कि सपा के महासचिव राजेंद्र यादव का गंगसरा में मेडिकल स्टोर है। वह पास के ही गांव के रहने वाले हैं, लेकिन थोड़ी दूर स्थित चकलुआ घाट की ओर उनका ध्यान नहीं जा रहा है। यदि वह पार्टी जिलाध्यक्ष, सांसद और विधायक से एक बार भी कह दें तो समस्या का समाधान होते देर नहीं लगेगी।