तुलसी विवाह को देवी-देवता भी सजे

Shahjahanpur Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
विवाह की तैयारियों में जुटे कृष्णा नगर के नर-नारी
- आज शोभायात्रा निकालकर सालिगराम संग पड़ेंगी भांवरें
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। कार्तिक मास में जहां गंगा स्नान का महत्व है, वहीं तुलसी और भगवान सालिगराम का विवाह कराना भी पुनीत कार्य माना जाता है। नगर में यह आयोजन कृष्णा नगर के श्री राधा-कृष्ण मंदिर और राम नगर के राधा-कृष्ण मंदिर में धूमधाम से आयोजित किया जाता है। कृष्णा नगर मंदिर में भव्यता के साथ यह अनुष्ठान पूरा किया जाता है।
गुरुवार को होने वाले तुलसी जी और भगवान सालिगराम के वैवाहिक कार्यक्रम की तैयारियां कृष्णा नगर मंदिर में जोरशोर से चल रही हैं। क्षेत्र की महिलाओं ने बारात में शामिल होने के लिए बुधवार को साज-श्रंगार की तैयारी की। महिलाओं और युवतियों ने मेंहदी और डाई लगाकर बारात की तैयारियां पूरी कीं। वहीं मंदिर पुजारी पंडित अखिलेश कुमार शास्त्री की देखरेख में पुष्पा सचदेवा देव प्रतिमाओं को नवीन वस्त्र पहनाकर उनका श्रंगार करने में जुटी थीं।
वैवाहिक कार्यक्रमों की श्रंखला दो दिन पहले ही शुरू हो चुकी है। मंगलवार को मेंहदी की रस्म हुई थी। इसी दिन सात कन्याओं का विवाह भी कराया गया था, जो तुलसी माता और भगवान सालिगराम के विवाह का ही हिस्सा था। वुधवार की रात मना नाच का आयोजन किया जाएगा, इस कार्यक्रम में महिलाएं मंदिर में मंगलगीत गाएंगी। कल 29 नवंबर को अपरान्ह दो बजे से नगर में शोभायात्रा निकाली जाएगी। लंगर के बाद रात में तुलसी संग भगवान सालिगराम की भांवरें डाली जाएंगी।


वैवाहिक कार्यक्रमों के सूत्रधार
वैवाहिक कार्यक्रम में रमेश चंद्र खुराना वर पक्ष का दायित्व निभा रहे हैं, जबकि चतुर सिंह वधू पक्ष की संभाले हुए हैं। दोनों परिवारों में बारात की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। परिवारों में हर्ष और उल्लास का वातावरण है।



पुण्य दिलाता है तुलसी का विवाह: शास्त्री
मंदिर पुजारी पंडित अखिलेश कुमार शास्त्री ने बताया कि कार्तिक मास में तुलसी माता की पूजा-अर्चना बहुत महत्व रखती है। उनका विवाह भगवान सालिगराम से कराना पुण्य दिलाता है। यह आयोजन तो सतयुग से चला आ रहा है। इससे मन को शांति मिलती है और भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।



भसीन ने बुने ऊन के शाल
विनोद भसीन ने मौसम को देखते हुए कृष्णा नगर मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं के शाल बुने हैं। जिस समय मंदिर की मूर्तियों का श्रंगार किया जा रहा था, उस समय विनोद भसीन भगवा रंग की ऊन से अधूरे शाल पूरे करने में जुटी थीं। बोलीं: यह तो वह अपने ठाकुर जी की प्रेरणा से कर रही हैं। दो माह से छोटी-बड़ी सभी मूर्तियों के लिए उन्होंने शाल बुने हैं।



विवाह के कई गीत
तैयार किए हैं: पूनम
पूनम अवस्थी बताती हैं कि उन्होंने तुलसी माता के विवाह के लिए कई गीत भी तैयार किए हैं। विदाई गीत का जिक्र होते ही उन्होंने ‘बचपन से पाला पोसा तन मन लगाइके, आज से हमारी तुलसा हो गईं पराई रे’ गीत गाकर भी सुनाया। बताया: तुलसी जी को मिश्री बहुत पसंद है, इसलिए मिश्री से ही उनका भोग लगाया जाएगा।

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