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किसानों ने आलू का रकबा बढ़ाया तो घटने लगे दाम
Shahjahanpur
Updated Sat, 06 Dec 2014 05:30 AM IST
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मंडी में 40 रुपये पंसेरी के भाव बिक रहा नया आलू
- अधिक मुनाफा के फेर में लागत निकलना मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। पिछले साल आलू के थोक रेट बेहतर मिलने से इस बार किसानों ने आलू का रकबा करीब एक हजार हेक्टेयर बढ़ा दिया, जिससे मंडी में थोक रेट घटने शुरू हो गए। जिले में नए आलू की खेतों से अभी निकासी का काम शुरू भी नहीं हो पाया कि थोक भाव के समानान्तर बाजारों में आलू के फुटकर दाम भी गिरने लगे। किसानों का कहना है कि अगर आलू का बाजार भाव और गिरा तो भविष्य में इसकी बुवाई में कटौती करनी पड़ेगी।
जिले में पिछले साल 9450 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू बोया गया था। उसी दौरान चीनी मिलों में गन्ना की बेकद्री होने से तमाम किसानों का आलू की पैदावार लेने का मोह जागा, क्योंकि उस वक्त ‘सब्जियों का राजा’ का बाजार भाव उठान पर था। यही देख किसानों ने गन्ने के खेत खाली करके आलू की बुवाई कर दी। नतीजे में आलू का रकबा बढ़कर 10600 हेक्टेयर हो गया। अब थोक रेट गिरने से आलू 20 रुपये में डेढ़ किलो के फुटकर भाव अभी से बिक रहा है। किसानों को आशंका है कि आलू के दामों में गिरावट का दौर जारी रहा तो लागत निकलनी कठिन हो जाएगी।
आलू की कम पैदावार
से किसान परेशान
पुवायां। क्षेत्र में आलू किंग के नाम से मशहूर गांव नत्थापुर के रहने वाले अमरजीत सिंह का मानना है कि आलू यदि 10 रुपये किलो तक बिकता है तो यह रेट ठीक है, इससे किसान को घाटा नहीं होगा और आम लोगों को भी लाभ मिलेगा। दिसंबर में लगभग यही रेट रहता है, लेकिन आलू की कम पैदावार ने किसानों को चिंतित कर दिया है।
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उन्होंने बताया कि अमूनन प्रति एकड़ 150 से 300 क्विंटल तक आलू निकलना चाहिए, लेकिन इस बार सर्दी कम पड़ने से आलू की पैदावार पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। इसलिए 50 से 75 क्विंटल प्रति एकड़ आलू निकल रहा है। उनका कहना है कि गत वर्ष आलू दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। इस कारण किसान ने आलू का रकबा बढ़ा दिया, जो गलत निर्णय रहा। किसानों को भेड़चाल पर न जाकर अपने हिसाब से खेती करनी चाहिए और क्राप रोटेशन करते रहना चाहिए।
आलू की निकासी में
अभी एक माह लगेगा
‘जिले में बोए गए आलू की निकासी अभी शुरू हो पाई है। खेतों से आलू निकलकर मंडियों में पहुंचने तक एक माह लगने का अनुमान है। आलू की फसल लेने में लागत ज्यादा आती है, लेकिन पिछली बार रेट अच्छा मिलने से इस बार किसानों का ऊझान आलू की खेती की ओर बढ़ गया। इसीलिए पिछले साल की तुलना में आलू का क्षेत्रफल भी बढ़ गया है।’
-रामनरेश वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
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- अधिक मुनाफा के फेर में लागत निकलना मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। पिछले साल आलू के थोक रेट बेहतर मिलने से इस बार किसानों ने आलू का रकबा करीब एक हजार हेक्टेयर बढ़ा दिया, जिससे मंडी में थोक रेट घटने शुरू हो गए। जिले में नए आलू की खेतों से अभी निकासी का काम शुरू भी नहीं हो पाया कि थोक भाव के समानान्तर बाजारों में आलू के फुटकर दाम भी गिरने लगे। किसानों का कहना है कि अगर आलू का बाजार भाव और गिरा तो भविष्य में इसकी बुवाई में कटौती करनी पड़ेगी।
जिले में पिछले साल 9450 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू बोया गया था। उसी दौरान चीनी मिलों में गन्ना की बेकद्री होने से तमाम किसानों का आलू की पैदावार लेने का मोह जागा, क्योंकि उस वक्त ‘सब्जियों का राजा’ का बाजार भाव उठान पर था। यही देख किसानों ने गन्ने के खेत खाली करके आलू की बुवाई कर दी। नतीजे में आलू का रकबा बढ़कर 10600 हेक्टेयर हो गया। अब थोक रेट गिरने से आलू 20 रुपये में डेढ़ किलो के फुटकर भाव अभी से बिक रहा है। किसानों को आशंका है कि आलू के दामों में गिरावट का दौर जारी रहा तो लागत निकलनी कठिन हो जाएगी।
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आलू की कम पैदावार
से किसान परेशान
पुवायां। क्षेत्र में आलू किंग के नाम से मशहूर गांव नत्थापुर के रहने वाले अमरजीत सिंह का मानना है कि आलू यदि 10 रुपये किलो तक बिकता है तो यह रेट ठीक है, इससे किसान को घाटा नहीं होगा और आम लोगों को भी लाभ मिलेगा। दिसंबर में लगभग यही रेट रहता है, लेकिन आलू की कम पैदावार ने किसानों को चिंतित कर दिया है।
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उन्होंने बताया कि अमूनन प्रति एकड़ 150 से 300 क्विंटल तक आलू निकलना चाहिए, लेकिन इस बार सर्दी कम पड़ने से आलू की पैदावार पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। इसलिए 50 से 75 क्विंटल प्रति एकड़ आलू निकल रहा है। उनका कहना है कि गत वर्ष आलू दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। इस कारण किसान ने आलू का रकबा बढ़ा दिया, जो गलत निर्णय रहा। किसानों को भेड़चाल पर न जाकर अपने हिसाब से खेती करनी चाहिए और क्राप रोटेशन करते रहना चाहिए।
आलू की निकासी में
अभी एक माह लगेगा
‘जिले में बोए गए आलू की निकासी अभी शुरू हो पाई है। खेतों से आलू निकलकर मंडियों में पहुंचने तक एक माह लगने का अनुमान है। आलू की फसल लेने में लागत ज्यादा आती है, लेकिन पिछली बार रेट अच्छा मिलने से इस बार किसानों का ऊझान आलू की खेती की ओर बढ़ गया। इसीलिए पिछले साल की तुलना में आलू का क्षेत्रफल भी बढ़ गया है।’
-रामनरेश वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी