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सूखा राहत : फसली नुकसान का सर्वे करेगी जिलास्तरीय अधिकारियों की संयुक्त टीम

Sat, 10 Sep 2022 12:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2022 12:53 AM IST
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66 percent less rain than normal, crops will be surveyed,
शाहजहांपुर। मानसून सीजन में प्रदेश के अन्य जनपदों की तरह जिले में भी सामान्य से करीब 66 फीसदी कम वर्षा हुई है। किसानों के फसली नुकसान का सर्वे कराने के लिए डीएम उमेश प्रताप सिंह ने आपदा राहत प्रभारी/एडीएम फाइनेंस त्रिभुवन की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को कई विभागों के जिलास्तरीय अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर दी।
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मुख्यमंत्री ने बारिश की कमी से फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर किसानों को सूखा से राहत देने के लिए जिलास्तर पर एडीएम की अध्यक्षता में सर्वे टीम बनाने के निर्देश दिए हैं। शासन की गाइडलाइन में सर्वे की टीम मेें कृषि, उद्यान और गन्ना विकास विभाग के अधिकारियों को शामिल करने के निर्देश हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह और जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव को सर्वे टीम में सदस्य बनाया गया।
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इनके अतिरिक्त एडीएम फाइनेंस ने अपने स्तर से नलकूप खंड व सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंताओं समेत उप निदेशक कृषि प्रसार और जिला कृषि रक्षा अधिकारी को भी सर्वे टीम में शामिल किया है। एडीएम के अनुसार जिले में नहर और नलकूपों का सिंचन क्षेत्र व्यापक होने के कारण फसलों को ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं है। इसके बावजूद टीम में शामिल नलकूप व सिंचाई विभाग के अभियंता यह देखेंगे कि किन फसलों को कितना पानी मिल सका। इसी तरह कृषि रक्षा अधिकारी बारिश की कमी से कीट-रोगों से प्रभावित फसलों के क्षेत्रफल का आकलन करेंगे।
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पहले चरण में सूख चुकी फसलों का होगा आकलन
अभी धान में बालियां नहीं पड़ सकी हैं। इसलिए बारिश की कमी से पैदावार में गिरावट का अनुमान लगाना अभी संभव नहीं होगा। इसीलिए पहले चरण के सर्वे में केवल उन फसलों के क्षेत्रफल का आकलन किया जाएगा, जहां पानी की कमी से फसलें सूख चुकी हैं या फिर पौधों की पत्तियां पीली पड़ने के साथ फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है। एडीएम के अनुसार अगले चरण में बालियां पकने और फसल की कटाई शुरू होने के दौरान सर्वे कराकर यह पता लगाया जाएगा कि धान समेत अन्य फसलों की उत्पादकता में कितनी कमी आई है। इसी आधार पर किसानों को देय राहत सहायता तय होगी।
इसलिए जरूरी हुआ फसली नुकसान का सर्वे
जुलाई में सामान्य से 80 प्रतिशत कम वर्षा होने के बाद अगस्त में भी निर्धारित वर्षा मानक की तुलना में केवल 60 प्रतिशत पानी बरसा। चालू माह में अभी तक सिर्फ 2.8 मिमी बारिश हुई। इस तरह मानसून सीजन में अभी तक सामान्य से 66 फीसदी कम वर्षा होने से करीब 40 फीसदी से ज्यादा फसलें सूखा से प्रभावित होने की आशंका है। क्योंकि लघु सीमांत श्रेणी के अधिसंख्य किसान सिंचाई के व्यक्तिगत साधन नहीं होने से खरीफ सीजन में मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहते हैं।

जिन किसानों ने फसली बीमा कराया है, उन्हें बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा देय होगा। गैर बीमित फसलें भी सूखा प्रभावित होने पर संबंधित किसानों को शासन से प्राप्त होने वाले दिशा निर्देशों के तहत राहत सहायता सुलभ कराई जाएगी। कृषि विभाग की ओर से किसानों को वैकल्पिक फसलें उगाने को बीज वितरण निशुल्क किया जाएगा। -त्रिभुवन, आपदा राहत प्रभारी/एडीएम फाइनेंस
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