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मशरूम की खेती दूर कर सकती है बेरोजगारी
Updated Tue, 06 Mar 2018 06:52 PM IST
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फोटो-21,,पुवायां में कमरे के अंदर तैयार किया गया मशरूम
फोटो-22,गांव नाहिल निवासी कृषि प्रवक्ता सुमित शुक्ला
बेरोजगारी दूर कर सकती है मशरूम की खेती
बेहद कम लागत में एक कमरे में शुरू हो सकता है उत्पादन
महिलाएं भी कर सकती है अतिरिक्त आय
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां (शाहजहांपुर)।
किसी भी समारोह में खाने के व्यंजनों में मशरूम की सब्जी अब आम गई है। शहर के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों की दावतों में भी मशरूम बनाई जाने लगी हैं। मशरूम बढ़ती डिमांड के कारण अब छोटी जगहों पर भी इसका उत्पादन कर लाभ उठाया जा सकता है। खास बात यह है कि बहुत कम लागत और बेहद कम जगह में मशरूम का काम शुरू किया जा सकता है।
पुवायां के गांव नाहिल निवासी और गांव नियामतपुर के श्री फूलसिंह शिक्षा निकेतन इंटर कालेज में कृषि प्रवक्ता सुमित शुक्ला मशरूम से बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को मशरूम उत्पादन के गुर बताते हुए उन्हें जागरूक कर रहे हैं। सुमित के अनुसार बटन, ढेंगरी, पैडीस्ट्रा और मिल्की चार प्रकार की मशरूम में बटन के उत्पादन की विधि थोड़ी सी कठिन है, क्योंकि इसका उत्पादन करने के लिए भूसे की कंपोस्ट तैयार करनी पड़ती है, लेकिन अन्य तीनों प्रकार के मशरूम बेहद आसानी से उगाए जा सकते हैं। हालांकि बाजार में लोग बटन मशरूम को ज्यादा पहचानते हैं। इसकी मांग भी ज्यादा है, लेकिन अन्य मशरूम भी खूब बिकता है। सुमित के अनुसार मशरूम उगाकर युवा बेराजेगारी दूर कर सकते हैं और महिलाएं भी घर के काम के साथ ही मशरूम उत्पादन कर अतिरिक्त आय ले सकती हैं। सुमित शुक्ला तमाम युवाओं को मशरूम उत्पादन की जानकारी देकर रोजगार से जोड़ चुके हैं।
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इस तरह तैयार करें मशरूम
सुमित शुक्ला के अनुसार मशरूम तैयार करने के लिए दो सौ लीटर का ड्रम लेकर डेढ़ सौ लीटर पानी भर लें। पानी में 125 मिली फार्मालीन दवा, चार ग्राम बेबीस्टोन दवा और सौ ग्राम बुझा चूना डालकर घोल दें। यह दवाएं पेस्टीसाइडस की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हैं। बीज पंतनगर, बनारस, नोएडा में 70 से सौ रुपये प्रति किलो उपलब्ध हैं। सुमित खुद भी बीज उपलब्ध करा देते हैं। घोल में 10 किलो भूसा डालकर 24 घंटे के लिए ढक दें। इसके बाद भूसे को निकालकर ढेर लगा दें, जिससे पानी निकल जाए। 60 प्रतिशत नमी रहने के बाद भूसे के ढेर में मशरूम का बीज मिला दें और 13 गुणा 16 के पॉलीथीन बैग में भरकर रस्सी के सहारे कमरे में टांग दें। कमरे में अंधेरा होना चाहिए। 25 दिन में मशरूम की पहली फसल तैयार हो जाएगी। इसे तोड़ लें और फिर पॉलीथिन बैग को फाड़ दें। बचे भूसे पर पानी का स्प्रे करते रहे, आठ दिन में मशरूम की दूसरी फसल भी तैयार हो जाएगी।
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यह है फसल चक्र
बटन मशरूम सितंबर से मार्च, ढेंगरी सितंबर से अप्रैल, मिल्की अप्रैल से जुलाई तक तैयार किया जा सकता है। चूंकि इन दिनों शादी, बारात का मौसम होता है, सो बिक्री में भी कोई दिक्कत नहीं होती। इसे बाजार में आसानी से बेचा जा सकता है। अपने प्रयोग में भी लाया जा सकता है। पौष्टिकता से भरपूर मशरूम की बाजार में खूब मांग है।
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फोटो-22,गांव नाहिल निवासी कृषि प्रवक्ता सुमित शुक्ला
बेरोजगारी दूर कर सकती है मशरूम की खेती
बेहद कम लागत में एक कमरे में शुरू हो सकता है उत्पादन
महिलाएं भी कर सकती है अतिरिक्त आय
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां (शाहजहांपुर)।
किसी भी समारोह में खाने के व्यंजनों में मशरूम की सब्जी अब आम गई है। शहर के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों की दावतों में भी मशरूम बनाई जाने लगी हैं। मशरूम बढ़ती डिमांड के कारण अब छोटी जगहों पर भी इसका उत्पादन कर लाभ उठाया जा सकता है। खास बात यह है कि बहुत कम लागत और बेहद कम जगह में मशरूम का काम शुरू किया जा सकता है।
पुवायां के गांव नाहिल निवासी और गांव नियामतपुर के श्री फूलसिंह शिक्षा निकेतन इंटर कालेज में कृषि प्रवक्ता सुमित शुक्ला मशरूम से बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को मशरूम उत्पादन के गुर बताते हुए उन्हें जागरूक कर रहे हैं। सुमित के अनुसार बटन, ढेंगरी, पैडीस्ट्रा और मिल्की चार प्रकार की मशरूम में बटन के उत्पादन की विधि थोड़ी सी कठिन है, क्योंकि इसका उत्पादन करने के लिए भूसे की कंपोस्ट तैयार करनी पड़ती है, लेकिन अन्य तीनों प्रकार के मशरूम बेहद आसानी से उगाए जा सकते हैं। हालांकि बाजार में लोग बटन मशरूम को ज्यादा पहचानते हैं। इसकी मांग भी ज्यादा है, लेकिन अन्य मशरूम भी खूब बिकता है। सुमित के अनुसार मशरूम उगाकर युवा बेराजेगारी दूर कर सकते हैं और महिलाएं भी घर के काम के साथ ही मशरूम उत्पादन कर अतिरिक्त आय ले सकती हैं। सुमित शुक्ला तमाम युवाओं को मशरूम उत्पादन की जानकारी देकर रोजगार से जोड़ चुके हैं।
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इस तरह तैयार करें मशरूम
सुमित शुक्ला के अनुसार मशरूम तैयार करने के लिए दो सौ लीटर का ड्रम लेकर डेढ़ सौ लीटर पानी भर लें। पानी में 125 मिली फार्मालीन दवा, चार ग्राम बेबीस्टोन दवा और सौ ग्राम बुझा चूना डालकर घोल दें। यह दवाएं पेस्टीसाइडस की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हैं। बीज पंतनगर, बनारस, नोएडा में 70 से सौ रुपये प्रति किलो उपलब्ध हैं। सुमित खुद भी बीज उपलब्ध करा देते हैं। घोल में 10 किलो भूसा डालकर 24 घंटे के लिए ढक दें। इसके बाद भूसे को निकालकर ढेर लगा दें, जिससे पानी निकल जाए। 60 प्रतिशत नमी रहने के बाद भूसे के ढेर में मशरूम का बीज मिला दें और 13 गुणा 16 के पॉलीथीन बैग में भरकर रस्सी के सहारे कमरे में टांग दें। कमरे में अंधेरा होना चाहिए। 25 दिन में मशरूम की पहली फसल तैयार हो जाएगी। इसे तोड़ लें और फिर पॉलीथिन बैग को फाड़ दें। बचे भूसे पर पानी का स्प्रे करते रहे, आठ दिन में मशरूम की दूसरी फसल भी तैयार हो जाएगी।
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यह है फसल चक्र
बटन मशरूम सितंबर से मार्च, ढेंगरी सितंबर से अप्रैल, मिल्की अप्रैल से जुलाई तक तैयार किया जा सकता है। चूंकि इन दिनों शादी, बारात का मौसम होता है, सो बिक्री में भी कोई दिक्कत नहीं होती। इसे बाजार में आसानी से बेचा जा सकता है। अपने प्रयोग में भी लाया जा सकता है। पौष्टिकता से भरपूर मशरूम की बाजार में खूब मांग है।