{"_id":"581351f34f1c1b6c1ebc24fb","slug":"50-thousand-hectares-in-the-state-increased-area-under-sugarcane","type":"story","status":"publish","title_hn":"सूबे में 50 हजार हेक्टेयर बढ़ा गन्ने का रकबा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सूबे में 50 हजार हेक्टेयर बढ़ा गन्ने का रकबा
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Fri, 28 Oct 2016 11:55 PM IST
विज्ञापन
sugar cane
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चालू पेराई सत्र में गन्ना मूल्य तय करने को उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने दिए इनपुट
104 साल में सूबे में गन्ने की पैदावार 180 से बढ़कर हुई 660 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
सूबे में चालू पेराई सत्र 2016 -17 में किसानों के लिए गन्ना मूल्य निर्धारण को राज्य गन्ना आयुक्त ने बैठक बुलाई। जिसमें किसानों और मिल प्रबंधनों के साथ ही शाहजहांपुर के उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने भी अपना इनपुट दिया है। परिषद के अनुसार, सूबे में इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में 50 हजार हेक्टेयर ज्यादा रकबे में गन्ने की बुआई किसानों ने की है। इस बार भी चीनी का परते के औसत में बढ़ोत्तरी के अनुमान हैं।
बैठक से भाग लेकर लौटे परिषद के निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि गत वर्ष सूबे में कुल करीब 20.20 लाख हेक्टेयर में गन्ने की बुआई हो पाई थी जो कि इस बार बढ़कर करीब 20.70 लाख हेक्टेयर हो गई है। देश में कुल गन्ना रकबे में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी इस समय करीब 40 फीसदी है। परिषद की ओर से किसानों के बीच नगदी फसल के रूप में गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने को लगातार शोध कार्य जारी हैं। उसी का नतीजा है कि 104 साल पहले जब परिषद की शाहजहांपुर में स्थापना हुई थी तब सूबे में प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन की दर करीब 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी जो कि अब बढ़कर 660 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई है। इस अवधि में परिषद ने कुल 216 गन्ने की नई प्रजातियां विकसित कर किसानों को मुहैया कराई हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि परिषद से इस समय प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कुल 117 चीनी मिलें और 40 लाख गन्ना किसान जुड़े हैं और नई- नई अविष्कृत प्रजातियों और रोगों से रोकथाम के लिए प्राकृतिक उपचारों में मदद ले रहे हैं। प्रेसवार्ता में निदेशक के मौजूद प्रसार अधिकारी और गन्ना विज्ञानी डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि परिषद की वर्ष 1912 में हुई स्थापना से पहले से ही गन्ना किसानों के लिए शाहजहांपुर न केवल प्रदेश और देश में बल्कि विदेश में अपना कई दशक पहले लोहा मनवा चुका है। वर्ष 1880 -90 के दौरान जावा में गन्ने में सेरेह नाम की भयंकर बीमारी लगी थी। उससे वहां का चीनी उद्योग और गन्ना किसान संकट में आ गए थे। तब शाहजहांपुर से ही डच शुगरकेन एक्सपर्ट कोबस यहां की देशी प्रजाति चुन्नी को ले जाकर संकरण द्वारा वहां नई प्रजाति विकसित कर अपने देश के गन्ना किसान और चीनी उद्योग को बचाया था ।
विज्ञापन
विज्ञापन
104 साल में सूबे में गन्ने की पैदावार 180 से बढ़कर हुई 660 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
सूबे में चालू पेराई सत्र 2016 -17 में किसानों के लिए गन्ना मूल्य निर्धारण को राज्य गन्ना आयुक्त ने बैठक बुलाई। जिसमें किसानों और मिल प्रबंधनों के साथ ही शाहजहांपुर के उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने भी अपना इनपुट दिया है। परिषद के अनुसार, सूबे में इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में 50 हजार हेक्टेयर ज्यादा रकबे में गन्ने की बुआई किसानों ने की है। इस बार भी चीनी का परते के औसत में बढ़ोत्तरी के अनुमान हैं।
बैठक से भाग लेकर लौटे परिषद के निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि गत वर्ष सूबे में कुल करीब 20.20 लाख हेक्टेयर में गन्ने की बुआई हो पाई थी जो कि इस बार बढ़कर करीब 20.70 लाख हेक्टेयर हो गई है। देश में कुल गन्ना रकबे में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी इस समय करीब 40 फीसदी है। परिषद की ओर से किसानों के बीच नगदी फसल के रूप में गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने को लगातार शोध कार्य जारी हैं। उसी का नतीजा है कि 104 साल पहले जब परिषद की शाहजहांपुर में स्थापना हुई थी तब सूबे में प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन की दर करीब 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी जो कि अब बढ़कर 660 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई है। इस अवधि में परिषद ने कुल 216 गन्ने की नई प्रजातियां विकसित कर किसानों को मुहैया कराई हैं।
विज्ञापन
डॉ. शर्मा ने बताया कि परिषद से इस समय प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कुल 117 चीनी मिलें और 40 लाख गन्ना किसान जुड़े हैं और नई- नई अविष्कृत प्रजातियों और रोगों से रोकथाम के लिए प्राकृतिक उपचारों में मदद ले रहे हैं। प्रेसवार्ता में निदेशक के मौजूद प्रसार अधिकारी और गन्ना विज्ञानी डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि परिषद की वर्ष 1912 में हुई स्थापना से पहले से ही गन्ना किसानों के लिए शाहजहांपुर न केवल प्रदेश और देश में बल्कि विदेश में अपना कई दशक पहले लोहा मनवा चुका है। वर्ष 1880 -90 के दौरान जावा में गन्ने में सेरेह नाम की भयंकर बीमारी लगी थी। उससे वहां का चीनी उद्योग और गन्ना किसान संकट में आ गए थे। तब शाहजहांपुर से ही डच शुगरकेन एक्सपर्ट कोबस यहां की देशी प्रजाति चुन्नी को ले जाकर संकरण द्वारा वहां नई प्रजाति विकसित कर अपने देश के गन्ना किसान और चीनी उद्योग को बचाया था ।
विज्ञापन