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कोटा चयन प्रस्ताव पारित होने के बाद भी विपक्षी कर रहे साजिश
Updated Sun, 02 Jul 2017 05:39 PM IST
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शाहजहांपुर। कोटा चयन का प्रस्ताव खुली बैठक में पारित होने के बाद भी प्रस्ताव को फर्जी करार देने पर तुले विपक्षियों की साजिश को बेनकाब करने के लिए कोटेदार के समर्थन में ग्रामीणों ने सीडीओ को ज्ञापन सौंपा हैं। इसके साथ ही कोटा प्रस्ताव के लिए बुलाई गई खुली बैठक की वीडियोग्राफी की सीडी भी उनके हवाले की।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान का आवंटन सितंबर 2016 में पूरा हो गया था। इसके बाद से 27 जून तक दुकान का आवंटन नहीं होने के कारण ग्रामीणों को राशन की परेशानी हो रही है। दुकान के आवंटन को लेकर प्रधान ने तीन बार बैठक बुर्लाई, लेकिन प्रधान के एक सहयोगी का नाम स्वीकार नहीं किए जाने के कारण बैठक तीनों बार निरस्त हो गई। 27 जून को ग्राम पंचायत अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी व अन्य ग्रामीणों के सामने आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई। इस बैठक में प्रधान भी मौजूद थे। वीडियोग्राफी के साथ मतदान कराकर सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान का प्रस्ताव 283 वोट मिलने पर रामशंकर के पक्ष में हो गया, जबकि विपक्षी के पक्ष में 261 वोट पड़े। ग्रामीणों ने बताया कि इसके बाद भी विपक्षीगण पारित प्रस्ताव को फर्जी बताते हुए निरस्त कराए जाने की मांग कर रहे हैं। सीडीओ को ज्ञापन देने वालों में रामशंकर, रामवीर, चेतराम, सुरेंद्रपाल, राजवर्धन सिंह, सुमित सिंह, प्रदीप कुमार, अरुण कुमार, महिपाल, अजयपाल, रावेंद्र, पुष्पा देवी, विजेंद्र आदि लोग मौजूद थे।
फर्जी तरीके से कर लिया कोटा चयन का प्रस्ताव
मीरानपुर कटरा। गांव पोसिल में दो दिन पहले हुए सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के प्रस्ताव को फर्जी बताते हुए ग्रामीणों ने डीएम व अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर पारित प्रस्ताव को निरस्त कराने की मांग की है।
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पत्र में ग्रामीणों ने कहा है कि 27 मई को गांव में किसी को सूचना दिए बगैर दूसरे पक्ष के लोगों ने फर्जी तरीके से खुली बैठक दर्शाकर कोटेदार से आर्थिक साठगांठ कर उसके नाम कोटा का प्रस्ताव कर दिया। किसी भी ग्रामीण को कोई जानकारी नही दी गई। ग्रामीणों ने कहा है कि अगर शीघ्र ही प्रशासन ने इस बार ध्यान नही दिया तो फर्जी प्रस्ताव के जरिये राशन की दुकान की संस्तुति करा ली जाएगी। यह ग्रामीणों के साथ अन्याय होगा। ग्रामीणों ने अधिकारियों से फर्जी प्रस्ताव को निरस्त कर फिर से खुली बैठक कर कोटे का चयन कराने की मांग की है। पत्र में विकास मिश्रा, रंजीत, इरशाद, केपी सिंह, रमेशपाल, ध्रुवपाल आदि के हस्ताक्षर हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान का आवंटन सितंबर 2016 में पूरा हो गया था। इसके बाद से 27 जून तक दुकान का आवंटन नहीं होने के कारण ग्रामीणों को राशन की परेशानी हो रही है। दुकान के आवंटन को लेकर प्रधान ने तीन बार बैठक बुर्लाई, लेकिन प्रधान के एक सहयोगी का नाम स्वीकार नहीं किए जाने के कारण बैठक तीनों बार निरस्त हो गई। 27 जून को ग्राम पंचायत अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी व अन्य ग्रामीणों के सामने आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई। इस बैठक में प्रधान भी मौजूद थे। वीडियोग्राफी के साथ मतदान कराकर सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान का प्रस्ताव 283 वोट मिलने पर रामशंकर के पक्ष में हो गया, जबकि विपक्षी के पक्ष में 261 वोट पड़े। ग्रामीणों ने बताया कि इसके बाद भी विपक्षीगण पारित प्रस्ताव को फर्जी बताते हुए निरस्त कराए जाने की मांग कर रहे हैं। सीडीओ को ज्ञापन देने वालों में रामशंकर, रामवीर, चेतराम, सुरेंद्रपाल, राजवर्धन सिंह, सुमित सिंह, प्रदीप कुमार, अरुण कुमार, महिपाल, अजयपाल, रावेंद्र, पुष्पा देवी, विजेंद्र आदि लोग मौजूद थे।
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फर्जी तरीके से कर लिया कोटा चयन का प्रस्ताव
मीरानपुर कटरा। गांव पोसिल में दो दिन पहले हुए सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के प्रस्ताव को फर्जी बताते हुए ग्रामीणों ने डीएम व अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर पारित प्रस्ताव को निरस्त कराने की मांग की है।
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पत्र में ग्रामीणों ने कहा है कि 27 मई को गांव में किसी को सूचना दिए बगैर दूसरे पक्ष के लोगों ने फर्जी तरीके से खुली बैठक दर्शाकर कोटेदार से आर्थिक साठगांठ कर उसके नाम कोटा का प्रस्ताव कर दिया। किसी भी ग्रामीण को कोई जानकारी नही दी गई। ग्रामीणों ने कहा है कि अगर शीघ्र ही प्रशासन ने इस बार ध्यान नही दिया तो फर्जी प्रस्ताव के जरिये राशन की दुकान की संस्तुति करा ली जाएगी। यह ग्रामीणों के साथ अन्याय होगा। ग्रामीणों ने अधिकारियों से फर्जी प्रस्ताव को निरस्त कर फिर से खुली बैठक कर कोटे का चयन कराने की मांग की है। पत्र में विकास मिश्रा, रंजीत, इरशाद, केपी सिंह, रमेशपाल, ध्रुवपाल आदि के हस्ताक्षर हैं।