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पुरवा के ठंडे थपेड़ों से सर्दी ने हांड कंपाया
Updated Mon, 25 Dec 2017 10:24 PM IST
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ठंड
- फोटो : अमर उजाला
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लगातार तीसरे दिन सोमवार को भी तापमान में दर्ज हुई गिरावट
हावड़ा-पंजाब और लखनऊ-दिल्ली रूट की तमाम ट्रेनें घंटों लेट
लांग रूट की रोडवेज बसों की घटी रफ्तार, संचालन प्रभावित
वातावरण में बढ़ी नमी से आलू फसल में झुलसा की आशंका
शाहजहांपुर। सुबह-शाम घने कोहरे के साथ दिन में पुरवा हवाएं चलने से सर्दी अपने पूरे रंग में आ गई है। कोहरे का कहर रविवार को दिन ढलने के बाद एकाएक बढ़ गया और सोमवार को दिन निकलने के बाद तक जारी रहा। इस कारण यहां से गुजरने वाली लखनऊ-दिल्ली और हावड़ा-पंजाब रूट की ट्रेनें घंटों लेट हो गईं और लांग रूट की रोडवेज बसों का संचालन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। कोहरे के कारण तापमान में गिरावट का दौर लगातार तीसरे दिन सोमवार को भी जारी रहा। साथ ही वातावरण में बढ़ी हुई नमी ने आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ा दी है।
सर्दी के सीजन में सुबह और शाम के वक्त कोहरे की चादर कई दिन से छा रही थी, लेकिन इसमें रविवार सुबह से खासा इजाफा हो गया। बीते दिन कुछ देकर को हल्की धूप निकली, लेकिन सूर्योदय से पहले सूरज आसमान पर छाई बदली के पीछे छिपा तो शाम चार बजे से ठिठुरन बढ़ गई और छह बजे दिन ढलने तक घना कोहरा जमीन पर उतर आया। दो घंटे बाद यह स्थिति हो गई कि सड़कों पर कुछ कदम आगे का दिखना दूभर हो गया। सोमवार की भोर आसमान साफ दिखा, लेकिन सूर्योदय होने तक कोहरा फिर पसर गया।
आलू, सरसों पर कोहरा-पाला की मार से किसान परेशान
लगातार कोहरा-पाला गिरने से आलू की फसल पर झुलसा के प्रकोप और सरसों की पत्तियां मुरझाने से किसान परेशान हो उठे हैं। पुवायां क्षेत्र में गेहूं के साथ आलू की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। इसलिए वहां आलू की फसल पर झुलसा के असर से किसान परेशान हो उठे हैं। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार कोहरा और पाला गिरने का दौर अभी अगले कुछ दिन तक जारी रहने के आसार हैं। मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि कोहरा घना होने के कारण सुबह वातावरण में नमी बढ़कर 100 प्रतिशत हो गई। उन्होंने बताया कि दिन में धूप निकलने से आद्रता में 25 फीसदी कमी रिकार्ड की गई, लेकिन शाम को नमी फिर बढ़ गई और इसी वजह से आलू, सरसों आदि मौसमी फसलों पर संकट के बादल घिरे हैं।
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इस वर्ष जिले में करीब 9500 हेक्टेयर में आलू की बुवाई की गई है। अगैती आलू खेतों से उठकर बाजार पहुंच चुका है, लेकिन जिन किसानों ने आलू की लेट बुवाई की, वे फसल सुरक्षित रखने को लेकर खासे चिंतित हैं। गांव नत्थापुर के अमरजीत सिंह तो आलू की इतने बड़े भू भाग पर खेती करते हैं कि उन्हें आलू किंग कहा जाता है। किसानों ने बताया कि पाला गिरने के कुछ ही दिन बाद से आलू की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। जबकि आलू अभी पक नहीं पाया है। ऐसे में आलू का उत्पादन कम होने का अनुमान है और ऐसा होने पर उन्हें कर्ज आदि चुकता करना मुश्किल हो जाएगा।
आलू अनुसंधान संस्थान ने पिछैती झुलसा, किया अलर्ट
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी और नम वातावरण को देखते किसानों को आलू की फसल में पिछैती झुलसा बीमारी से अलर्ट किया है। जिला उद्यान अधिकारी जयराम वर्मा ने आलू अनुसंधान केंद्र के मोदीपुरम (मेरठ) स्थित क्षेत्रीय केंद्र के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए बताया कि वातावरण में 80 फीसदी से अधिक आद्र्रता होने पर पत्तियां सिरे से झुलसना शुरू कर देती हैं। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में झुलसा के लक्षण दिखाई देने लगे हैं, उस पर नियंत्रण के लिए किसान भाई फफूंदनाशक मेटा लेक्जिल युक्त रसायन 2.5 किलो अथवा साइमोक्जेनिल युक्त फफूंदनाशक 3.0 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करें।
प्रतिकूल मौसम के मद्देनजर किसानों को नजदीकी कृषि वैज्ञानिकों से फसल का मुआयना करा लेना चाहिए। आलू की पत्तियां खराब होने का कारण पाले के अलावा कोई रोग भी हो सकता है। पत्ती खराब होने की दशा में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होने सेे पौधे को भोजन नहीं मिलेगा और इससे फसल प्रभावित होगी। यदि पाले के कारण फसल खराब हो रही है तो किसानों को गंधक का एक लीटर तेजाब एक हजार लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टयेर खेत में छिड़कना चाहिए। इससे लाभ होगा।
-डॉ. अशोक शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सरसों अनुसंधान केंद्र, भरतपुर (राजस्थान)
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हावड़ा-पंजाब और लखनऊ-दिल्ली रूट की तमाम ट्रेनें घंटों लेट
लांग रूट की रोडवेज बसों की घटी रफ्तार, संचालन प्रभावित
वातावरण में बढ़ी नमी से आलू फसल में झुलसा की आशंका
शाहजहांपुर। सुबह-शाम घने कोहरे के साथ दिन में पुरवा हवाएं चलने से सर्दी अपने पूरे रंग में आ गई है। कोहरे का कहर रविवार को दिन ढलने के बाद एकाएक बढ़ गया और सोमवार को दिन निकलने के बाद तक जारी रहा। इस कारण यहां से गुजरने वाली लखनऊ-दिल्ली और हावड़ा-पंजाब रूट की ट्रेनें घंटों लेट हो गईं और लांग रूट की रोडवेज बसों का संचालन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। कोहरे के कारण तापमान में गिरावट का दौर लगातार तीसरे दिन सोमवार को भी जारी रहा। साथ ही वातावरण में बढ़ी हुई नमी ने आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ा दी है।
सर्दी के सीजन में सुबह और शाम के वक्त कोहरे की चादर कई दिन से छा रही थी, लेकिन इसमें रविवार सुबह से खासा इजाफा हो गया। बीते दिन कुछ देकर को हल्की धूप निकली, लेकिन सूर्योदय से पहले सूरज आसमान पर छाई बदली के पीछे छिपा तो शाम चार बजे से ठिठुरन बढ़ गई और छह बजे दिन ढलने तक घना कोहरा जमीन पर उतर आया। दो घंटे बाद यह स्थिति हो गई कि सड़कों पर कुछ कदम आगे का दिखना दूभर हो गया। सोमवार की भोर आसमान साफ दिखा, लेकिन सूर्योदय होने तक कोहरा फिर पसर गया।
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आलू, सरसों पर कोहरा-पाला की मार से किसान परेशान
लगातार कोहरा-पाला गिरने से आलू की फसल पर झुलसा के प्रकोप और सरसों की पत्तियां मुरझाने से किसान परेशान हो उठे हैं। पुवायां क्षेत्र में गेहूं के साथ आलू की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। इसलिए वहां आलू की फसल पर झुलसा के असर से किसान परेशान हो उठे हैं। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार कोहरा और पाला गिरने का दौर अभी अगले कुछ दिन तक जारी रहने के आसार हैं। मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि कोहरा घना होने के कारण सुबह वातावरण में नमी बढ़कर 100 प्रतिशत हो गई। उन्होंने बताया कि दिन में धूप निकलने से आद्रता में 25 फीसदी कमी रिकार्ड की गई, लेकिन शाम को नमी फिर बढ़ गई और इसी वजह से आलू, सरसों आदि मौसमी फसलों पर संकट के बादल घिरे हैं।
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इस वर्ष जिले में करीब 9500 हेक्टेयर में आलू की बुवाई की गई है। अगैती आलू खेतों से उठकर बाजार पहुंच चुका है, लेकिन जिन किसानों ने आलू की लेट बुवाई की, वे फसल सुरक्षित रखने को लेकर खासे चिंतित हैं। गांव नत्थापुर के अमरजीत सिंह तो आलू की इतने बड़े भू भाग पर खेती करते हैं कि उन्हें आलू किंग कहा जाता है। किसानों ने बताया कि पाला गिरने के कुछ ही दिन बाद से आलू की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। जबकि आलू अभी पक नहीं पाया है। ऐसे में आलू का उत्पादन कम होने का अनुमान है और ऐसा होने पर उन्हें कर्ज आदि चुकता करना मुश्किल हो जाएगा।
आलू अनुसंधान संस्थान ने पिछैती झुलसा, किया अलर्ट
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी और नम वातावरण को देखते किसानों को आलू की फसल में पिछैती झुलसा बीमारी से अलर्ट किया है। जिला उद्यान अधिकारी जयराम वर्मा ने आलू अनुसंधान केंद्र के मोदीपुरम (मेरठ) स्थित क्षेत्रीय केंद्र के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए बताया कि वातावरण में 80 फीसदी से अधिक आद्र्रता होने पर पत्तियां सिरे से झुलसना शुरू कर देती हैं। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में झुलसा के लक्षण दिखाई देने लगे हैं, उस पर नियंत्रण के लिए किसान भाई फफूंदनाशक मेटा लेक्जिल युक्त रसायन 2.5 किलो अथवा साइमोक्जेनिल युक्त फफूंदनाशक 3.0 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करें।
प्रतिकूल मौसम के मद्देनजर किसानों को नजदीकी कृषि वैज्ञानिकों से फसल का मुआयना करा लेना चाहिए। आलू की पत्तियां खराब होने का कारण पाले के अलावा कोई रोग भी हो सकता है। पत्ती खराब होने की दशा में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होने सेे पौधे को भोजन नहीं मिलेगा और इससे फसल प्रभावित होगी। यदि पाले के कारण फसल खराब हो रही है तो किसानों को गंधक का एक लीटर तेजाब एक हजार लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टयेर खेत में छिड़कना चाहिए। इससे लाभ होगा।
-डॉ. अशोक शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सरसों अनुसंधान केंद्र, भरतपुर (राजस्थान)