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जिला पंचायत ने पारित किया 36.61 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट

Mon, 26 Mar 2018 12:51 AM IST
Updated Mon, 26 Mar 2018 12:51 AM IST
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जिला पंचायत ने पारित किया 36.61 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट
शाहजहांपुर। विकास भवन सभागार में रविवार को हुई जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 36.61 करोड़ रुपये का वार्षिक आय-व्यय बजट पारित हो गया। इसी मौके पर चालू वित्त वर्ष में 53.93 करोड़ रुपये के पुनरीक्षित बजट को सदस्यों ने मंजूरी दी। इससे पहले बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप यादव ने शिक्षा, विद्युत, कृषि, जल निगम, स्वास्थ्य आदि कई विभागों के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान जन प्रतिनिधियों समेत जिला पंचायत सदस्यों की ओर से बताई गई समस्याओं का समाधान नहीं होने पर अधिकारियों से नाराजगी व्यक्त कर संबंधित अफसरों को सवालों के कटघरे में खड़ा किया। प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने अधिकारियों को उठाए गए बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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नए वित्त वर्ष को स्वीकृत मूल बजट में आय और व्यय के स्रोतों का मद वार उल्लेख करते हुए अपर मुख्य अधिकारी शिशुपाल सिंह यादव ने बताया कि शासकीय अनुदान के तौर पर 30.32 करोड़ रुपये, कर एवं शुल्क के माध्यम से 1.20 करोड़ रुपये, काजी हाउस से दस हजार रुपये, मेला एवं प्रदर्शनी से 30 लाख रुपये, संपत्तियों से 20 लाख रुपये, कृषि एवं तरुपालन सेे 21 लाख रुपये, ब्याज मद मेें 70 लाख रुपये, प्रकीर्ण मद में 1.10 करोड़ रुपये और ऋण समेत अन्य स्रोतों से 1.02 करोड़ रुपये आय होने का अनुमान है। एएमए ने बताया कि इसमें सामान्य प्रशासन पर 1.08 करोड़ रुपये और निर्माण एवं वेतन भत्तों पर 70 लाख रुपये व्यय होने का अनुमान है।
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आरोप-प्रत्यारोप से गरमाया वातानुकूलित सभागार का माहौल
एक वर्ष के अंतराल पर हुई बैठक को लेकर सदस्यों में इतना उत्साह रहा कि वे नियत समय से एक घंटा पहले ही विकास भवन के सभागार में पहुंचने लगे। कैबिनेट मंत्री खन्ना के पहुंचते ही बैठक की शुरुआत में अपर मुख्य अधिकारी ने गत वर्ष 27 मई को हुई बैठक की कार्यवाही की सदस्यों से पुष्टि कराई। एजेंडा के दूसरे बिंदु पर विभिन्न कार्यों की विभागवार समीक्षा का दौर शुरू होते ही वातानुकूलित सभागार का माहौल गरमाने लगा। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए पंचायत सदस्यों ने बीएसए से एकल व्यवस्था पर आधारित स्कूलों का ब्यौरा मांगा।
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बीएसए ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण कई स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक और शिक्षा मित्र के जरिए शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। इस दौरान कई सदस्यों ने तमाम स्कूलों में चार-चार शिक्षकों की नियुक्ति पर ऐतराज किया। कई सदस्यों ने बगैर मान्यता चलाए जा रहे स्कूलों पर आपत्ति करते हुए कहा कि ऐसे स्कूलों के संचालक सिर्फ दो-तीन माह तक अपनी दुकानें चलाते हैं और बाद में बच्चों के नाम निकटवर्ती मान्यता प्राप्त स्कूलों में दर्ज करा देते हैं। इस पर बीएसए ने माना कि उनके संज्ञान मेें ऐसे 201 स्कूल आए हैं। शिक्षक विधायक संजय मिश्रा के ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई के सवाल पर बीएसए ने कहा कि निरीक्षण को जाने पर ऐसे स्कूल बंद कर दिए जाते हैं। विद्युत विभाग की समीक्षा के दौरान सदस्यों की आम शिकायत रही कि पॉवर ऑफ आल योजना में शामिल गांवों का विद्युतीकरण होना तो दूर रहा, वहां ट्रांसफार्मर समेत अन्य जरूरी सामान नहीं पहुंचाया गया है।
इस दौरान पॉवर कारपोरेशन के अधिशासी अभियंता ग्रामीण आरबी यादव ने विभाग का पक्ष रखना चाहा, लेकिन कार्यगत ढिलाई से तमतमाए सदस्य उनके तर्क खारिज करते रहे। तिलहर क्षेत्र के विधायक रोशन लाल वर्मा ने भी सदस्यों के कथन का समर्थन कर ऐसे कई गावों के नाम गिनाए, जहां विद्युतीकरण होना शेष है। कैबिनेट मंत्री खन्ना ने चर्चा को विराम देते हुए कहा कि जिस विभाग से जुड़े जो भी काम होने हैं, उनके बारे में सदस्य लिखित रूप से एक सप्ताह में अवगत कराएं। बैठक में विधायक मानवेंद्र सिंह, चेतराम, शरदवीर सिंह, वीर विक्रम सिंह प्रिंस, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र पाल यादव, पीसीएफ के चेयरमैन बलवीर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी संजीव सिंह समेत अन्य तमाम सदस्य मौजूद रहे।

 
जिला पंचायत की कार्यशैली पर प्रमोद ने उठाए सवाल
शाहजहांपुर। तिलहर क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य एवं भारतीय कृषक दल के राष्ट्रीय महासचिव प्रमोद कुमार यादव ने जिला पंचायत समेत सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सदन को बिंदुवार आपत्तियों से अवगत कराया और बाद में सीडीओ को संबंधित ज्ञापन दिया। उन्होंने गेहूं खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सभी क्रय केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, अवशेष गन्ना का दोबारा सर्वे कर उसी के अनुरूप कैलेंडर बनाने, जिला पंचायत समितियों की कार्य पद्धति सार्वजनिक करने, नियमित अंतराल पर बैठक बुलाने, जिला पंचायत की टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की।
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