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20 हजार हेक्टेयर कम हुई गन्ना की खेती
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 29 Jul 2015 09:18 PM IST
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बकाया गन्ना भुगतान में बेहिसाब लेटलतीफी ने किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग कर दिया है। शाहजहांपुर समेत बरेली मंडल के चारों जिलों में वर्ष 2015-16 के सीजन में वर्ष 2014-15 की तुलना में 20 हजार हेक्टेयर यानी करीब 10 फीसदी कम रकबे में इसकी खेती हुई है। यह तथ्य मंडल के गन्ना उपायुक्त डॉ. दिनेश्वर मिश्र ने स्वीकारा, लेकिन अभी यह आंकड़े नहीं मिल पाए हैं कि इस बार कितने किसानों ने गन्ने की खेती नहीं की है। गत बार मंडल में कुल साढ़े चार लाख किसानों का गन्ना मिलों पर पहुंचा था।
हालांकि उन्होंने दावा किया कि गन्ने का रकबा भले ही घटे, लेकिन उत्पादन में बहुत कमी नहीं आएगी। गत वर्ष ही उसके पहले की सीजन की तुलना में करीब आठ फीसदी ज्यादा उत्पादन हुआ। मंडल में करीब 621 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से गन्ना उपजा, जबकि प्रदेश में यह औसत करीब 655 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का रहा, बावजूद इसके जमीनी सच्चाई यह है कि बकाया गन्ना भुगतान की मार ने किसानों को काफी मायूस किया। मंडल के चीनी मिलों पर अब भी करीब 700 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इनमें से सिर्फ बरेली जनपद के बहेड़ी चीनी मिल पर आरसी की कार्रवाई करते हुए किसानों को भुगतान कराने के प्रशासनिक तौर पर अनुमति जारी हुई है। इस पर करीब सवा सौ करोड़ रुपये बकाया है। शाहजहांपुर जिला में पांच चीनी मिलों पर कुल 172.70 करोड़ रुपये भुगतान बकाया है।
अर्थशास्त्री की तरह करें गन्ने की खेती
शाहजहांपुर। गन्ने की खेती किसान अर्थशास्त्री की तरह करें। कम लागत में अधिक और गुणवत्ता वाली किस्म की प्रजाति की बुुआई करें। विज्ञानियों के व्यावहारिक शोध और सलाह का लाभ लेकर एक हजार कुंतल प्रति हेक्टेयर ऐसा उपज प्राप्त करें जिससे 10 फीसदी चीनी का परता मिले। साथ ही इसकी खेती में अंत : फसल वाली उपज का भी लाभ लें तो वित्तीय संकट सरीखी हालत से बचाव संभव है। यह बातें बरेली मंडल के गन्ना उपायुक्त डॉ. दिनेश्वर मिश्र ने कहीं। वह बुधवार को उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र में Òगन्ने के साथ अंत:फसली खेती और फसल सुरक्षा प्रबंधÓ विषय पर प्रशिक्षण के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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संस्थान के सहायक निदेशक पीके कपिल ने प्रशिक्षु प्रगतिशील किसानों को समझाया कि गन्ना फसल की दो नाली के बीच कम समय में तैयार होने वाली अंत:फसल के रूप में आलू, लाही, मटर, चना, मसूलर, लहसुन, उर्द, मूंग, राजमा, प्याज, भिंडी की खेती का विकल्प उम्दा है। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने शासकीय स्तर पर जारी योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान गन्ना वैज्ञानिक डॉ.केपी सिंह, डॉ. अतुल सिंह, डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. अनेग सिंह, डॉ. केपी पांडेय, डॉ. अर्चना आदि मौजूद थे।
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हालांकि उन्होंने दावा किया कि गन्ने का रकबा भले ही घटे, लेकिन उत्पादन में बहुत कमी नहीं आएगी। गत वर्ष ही उसके पहले की सीजन की तुलना में करीब आठ फीसदी ज्यादा उत्पादन हुआ। मंडल में करीब 621 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से गन्ना उपजा, जबकि प्रदेश में यह औसत करीब 655 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का रहा, बावजूद इसके जमीनी सच्चाई यह है कि बकाया गन्ना भुगतान की मार ने किसानों को काफी मायूस किया। मंडल के चीनी मिलों पर अब भी करीब 700 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इनमें से सिर्फ बरेली जनपद के बहेड़ी चीनी मिल पर आरसी की कार्रवाई करते हुए किसानों को भुगतान कराने के प्रशासनिक तौर पर अनुमति जारी हुई है। इस पर करीब सवा सौ करोड़ रुपये बकाया है। शाहजहांपुर जिला में पांच चीनी मिलों पर कुल 172.70 करोड़ रुपये भुगतान बकाया है।
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अर्थशास्त्री की तरह करें गन्ने की खेती
शाहजहांपुर। गन्ने की खेती किसान अर्थशास्त्री की तरह करें। कम लागत में अधिक और गुणवत्ता वाली किस्म की प्रजाति की बुुआई करें। विज्ञानियों के व्यावहारिक शोध और सलाह का लाभ लेकर एक हजार कुंतल प्रति हेक्टेयर ऐसा उपज प्राप्त करें जिससे 10 फीसदी चीनी का परता मिले। साथ ही इसकी खेती में अंत : फसल वाली उपज का भी लाभ लें तो वित्तीय संकट सरीखी हालत से बचाव संभव है। यह बातें बरेली मंडल के गन्ना उपायुक्त डॉ. दिनेश्वर मिश्र ने कहीं। वह बुधवार को उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र में Òगन्ने के साथ अंत:फसली खेती और फसल सुरक्षा प्रबंधÓ विषय पर प्रशिक्षण के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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संस्थान के सहायक निदेशक पीके कपिल ने प्रशिक्षु प्रगतिशील किसानों को समझाया कि गन्ना फसल की दो नाली के बीच कम समय में तैयार होने वाली अंत:फसल के रूप में आलू, लाही, मटर, चना, मसूलर, लहसुन, उर्द, मूंग, राजमा, प्याज, भिंडी की खेती का विकल्प उम्दा है। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने शासकीय स्तर पर जारी योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान गन्ना वैज्ञानिक डॉ.केपी सिंह, डॉ. अतुल सिंह, डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. अनेग सिंह, डॉ. केपी पांडेय, डॉ. अर्चना आदि मौजूद थे।