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इलाज में लापरवाही पर डाक्टर पर दो लाख जुर्माना

Sat, 30 Apr 2016 12:08 AM IST
ब्यूरो/शाहजहांपुर
ब्यूरो/शाहजहांपुर Updated Sat, 30 Apr 2016 12:08 AM IST
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2 lakh fine for bad practice on doctor
supreme court
शहर के कोतवाली क्षेत्र के हुंडाल खेल स्थित बृजदीप अस्पताल के डॉ. बृजेंद्र सक्सेना को मरीज के इलाज में लापरवाही बरते जाने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष न्यायाधीश रमेश चंद्र मिश्रा और फोरम की सदस्य रूबी गुप्ता ने दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। फोरम ने डाक्टर को निर्देश दिया है कि वह 60 दिनों में यह राशि वादी हरिओम गुप्ता को भुगतान कर दें। 
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फोरम द्वारा शुक्रवार को जारी फैसले की प्रति के अनुसार, कालीचरण रोड मोहल्ला चौक हरिओम गुप्ता को गिर जाने के चलते चोट आ गई थी और उसके इलाज के लिए डॉ. बृजेंद्र को दिखाया। उन्होंने 19 सितंबर 2009 को वादी के कूल्हे का बृजदीप अस्पताल में आपरेशन कर स्क्रू डाला और 28 सितंबर 2009 को अस्पताल से छोड़ दिया। उसके बाद भी कूल्हे में दर्द बने रहने पर वादी ने फिर उक्त डाक्टर को दिखाया तो समझाया गया कि दर्द धीरे - धीरे कम होगा और दो साल बाद स्क्रू निकाले जाएंगे। उसके बाद भी दर्द लगातार बढ़ता गया तो विवश होकर वादी ने बरेली में न्यूरो सर्जन को दिखाया जहां ब्रेन एमआरआई रिपोर्ट के आधार पर ब्रेन हैमरेज होना बताया गया। उसका इलाज अब भी जारी है। फिर 25 अगस्त 2011 को डॉ. बृजेंद्र ने वादी का आपरेशन कर स्क्रू निकाल दिया एवं 26 अगस्त 2011 को अस्पताल से छुट्टी कर दी। उसके बाद भी दर्द में आराम न होने पर डॉ. बृजेंद्र की सलाह पर वादी ने बरेली के एसआरएमएस में एमआरआई कराया। वहां चिकित्सकों ने बताया कि शाहजहांपुर वाले चिकित्सक द्वारा आपरेशन में लापरवाही बरते जाने के चलते वादी का एवीएन ग्रेड थ्री नर्व कट गया है जिससे दाहिने कूल्हे में खून का संचार बंद होने से गुल्ला बैठ गया है। फिर कानपुर में विशेषज्ञ चिकित्सक ने भी इसकी पुष्टि की तो वादी दिल्ली के एम्स गया। वहां भी इसी तथ्य की चिकित्सकों ने पुष्टि करते हुए 16 अक्तूबर 2012 को आपरेशन कर गुल्ला बदल दिया। 
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इस दौरान हुए लाखों रुपये खर्च के अलावा शारीरिक और मानसिक कष्ट झेलने की स्थिति में डालने वाले जिम्मेदार चिकित्सक और बीमा कंपनी के खिलाफ वादी ने फोरम में वाद दायर किया। आरोपी चिकित्सक और बीमा कंपनी ने अपने बचाव में तर्क प्रस्तुत किए लेकिन वादी की ओर से अधिवक्ता विवेक शर्मा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्य एवं तर्क का गंभीरता से अवलोकन करने के बाद फोरम ने अपना फैसला सुनाया।
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